00:04बादरपद माहा के शुक्ल पक्षकी द्वादसी तिथी को वामन द्वादसी मनाई जाती है जो इस सल 23 सितंबर को मनाई
00:11जाएगी
00:11इस दिन महिलाय अपने परिवार के सुक्षान्ती और धन वैवब बनाये रखने के लिए वामन भगवान के निमित वरत रखती
00:18है
00:18हिंदू धर्मपुरान, शास्त्रो और वेदो में वामन भगवान को विष्णु जी का पांचवा अफ़तार माना गया है
00:24धार्मिक मानिता के नुसार इसी दिन अभिजीत महूरत में भगवान विष्णु ने वामन अफ़तार लिया था
00:43वामन भदश्री की पौराने कथा के नुसार एक बार अत्यांत बलचाली देत्ते राजा बली ने इंद्र देव से देव लोग
00:50छीन लिया
00:51तब इंद्र देव सभी देवताओं के साथ भगवान विष्णु से मदद मांगने पहुचे
00:55क्योंकि उन्हें डर था कि राजा बली परमशाशक बन सकते हैं और देव लोग पर अधिकार कर लेंगे
01:01भगवान विष्णु ने सभी देवी देवताओं को विश्वास दिलाया कि वो जल्द ही इस समस्या का समधान निकालेंगे
01:08और उनको देव लोग वापस दिलाएंगे इंद्र देव के कहने पर भगवान विष्णु ने वामन के रूप में धर्ती पर
01:14अपना पाच वावतार लिया
01:16दैत्य असुर राजबली प्रहलात के पौत्र भी थे इसलिए वो दयालू असुर के नाम से चाने चाते थे
01:22वामन देव ने बौने ब्रामन का वेश बिदला और राजबली के पास गए राजबली ने एक यग्य क्या आयोजन खराया
01:30जिसमें भगवान बामन भी पहुचे और वहाँ पहुचकर उन्होंने राजबली से रहने के लिए तीन पक भूमी मांगी
01:37राजबली के द्वार पर जो कोई भी जाता था वो उसे कभी खाली हाथ नहीं भेशते थे उसी यग्य के
01:44दोरान गुरु भी मौजूद थे और उन्होंने भगवान विश्णु को पहचान लिया गुरु शंकराचारे ने राजबली को चेताबनी भी दी
01:52लेकिन बावजोद
01:52जिसके राजबली ने वामन देव को वचन दे डाला वामन देव ने अपना आकार इतना बड़ा कर लिया कि उन्होंने
01:58पहले पक में पूरा भूलोग नाप लिया फिर दूसरे कदम में भगवान मामन ने सारा देव लोग नाप लिया महीं
02:06जब तीसरे पक की बारी आई तो �
02:08भूमी समाप्त हो गई थी लेकिन वचन के पके राजबली ने अपना वादा पूरा करते हुए अपना सिर वामन देव
02:15के आगे रख दिया ये देखकर वामन देव बहुत खुश हुए और उन्होंने राजबली को पाताल लोग देने का निश्चे
02:22किया वामन देव ने रा�
02:27जबली पाताल लोक में पहुच गए उमीद करते हो आपको ये कथा पसंदाई होगी फिलाल हमारे इस वीडियो में इतना
02:32ही वीडियो को लाइक शुरेंड चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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