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श्राद्ध कर्म केवल पुरुषों तक ही सीमित नहीं है। परिस्थितियों के आधार पर धर्मग्रंथ महिलाओं को भी पिंडदाल का अधिकार देते हैं। हालांकि इसको लेकर जानकारों की राय अलग-अलग हो सकती है। संप्रदाय, पारिवारिक परंपसाओं के अनुसार इसकी विधि भी अलग हो सकती है। लेकिन गरुण पुराण में इसको लेकर क्या कहा गया है आइए इस वीडियो के माध्यम से जानते हैं-
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Transcript
00:00क्या श्राद कर्म सिर्फ पुरुसों तक सीमित है? क्या महिलाएं भी पिंडदान कर सकती है? आखिर गरोण पुरार इसको लेकर
00:08क्या कहता है? क्या यह सब कुछ महिलाएं भी कर सकती है? आएए जानते हैं इस खाश रिपोर्ट में
00:32गरोण पुरार में पित्रों की आत्मा की शांती के लिए श्राद तरपन और पिंडदान का विशेश महत बताये गया है।
00:43आम तोर पर आपने देखा होगा कि पित्रों के निमित किये जाने वाले इन कर्मों को परिवार के पुरुस सदस
00:50ही करते हैं। इसी वज़े से लोगों
00:55श्राद या पिंडदान नहीं कर सकती हाला कि दर्मग्रंथों में इस विशय को लेकर परिष्टियों के आधार पर अलग अलग
01:03नियम बताये गए हैं। हिंदू परंपरा में किसी व्रतिकी म्रत्य के बाद उसके निमित श्राद तरपन और पिंडदान जैसे कर्म
01:11किये जात
01:18हैं। लेकिन सवालिया है कि अगर परिवार में कोई पुत्र या पुरुशुत्रादिकारी मौजूद ना हो तो क्या महिला या कर्म
01:26कर सकती हैं।
01:28गरूण पुरान में इसको लेकर क्या कहा गया। गरूण पुरान में शाथ कर्म के महत्त और इसे करने वाले व्रति
01:36को लेकर चर्चा मिलती है।
01:38इसमें एक श्लोक में पुत्र के आभाव में पत्नी, बहु या अन्य निकट संबंदियों द्वारा शाध किये जाने की बात
01:46कही गई है।
01:48आईए जानते हैं यह श्लोक क्या है।
01:55इस लोक का बावार्थ है कि यदि पुत्र उपलब्ध ना हो तो परषितियों के नुसार पत्नी या बहु श्राध कर्म
02:01कर सकती है।
02:03इनके आभाव में परिवार के अन्य सदस्य जैसे भाई, भातीजा या भांजा भी यह कर्म कर सकते हैं।
02:10यदि ऐसे निकट संबंधी भी उपलब्ध ना हो तो शिष्य, मित्र या अन्य योग व्यक्ति द्वारा श्राध किये जाने की
02:18भी परंपरा है।
02:19इससे यह संकेत मिलता है कि श्राध कर्म को केवल पूरुस तक सीमित मानना पूरी तरह से सही नहीं है।
02:26हाला कि अलग-अलग परंपराओं और धर्म सास्त्रिय मतों में श्राध की विधी और अधिकार को लेकर अंतर भी मिलता
02:34है।
02:35क्या महिलाएं तरपण और पिंडदान कर सकती हैं।
02:38धर्मिक परंपराओं में आम तोर पर पुत्र या निकट पुरुस संबंधी को श्राध और पिंडदान की प्रात्मिक्ता दी जाती है।
02:46लेकिन पुत्र के आभाव या विशेश परिस्तियों में पत्नी, पुत्रवधू या अन्य योग परिजंद्वारा यह कर्म किये जाने का उल्लेक
02:53है।
02:54इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि यह परिस्तियों में महिला को श्राध या पिंडदान करने से पूरी तरह से
03:01वंचित किया गया है।
03:03परिवार की इस्ति, इस्थानिय परंप्रा और संबंधित धार्मिक्मत के नुसार इसकी विधी अलग-अलग हो सकती है।
03:27झाल झाल
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