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आर्कटिक क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक नए सुरक्षा समझौते के तहत ग्रीनलैंड में दोबारा सैन्य ठिकाने स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित स्थानों में नरसार्सुआक शामिल है, जहां कभी अमेरिका का ब्लूई वेस्ट वन बेस हुआ करता था। दूसरा स्थान मेस्टर्सविग है, जो फिलहाल डेनमार्क की सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल के इस्तेमाल में है।

इस समझौते के बाद ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को फिर से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जबकि आर्कटिक की सुरक्षा को व्यापक NATO ढांचे से जोड़ा जा सकता है। हालांकि, समझौते की सटीक शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। ऐसे में यह कदम आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक और सैन्य मौजूदगी के बड़े विस्तार का संकेत माना जा रहा है।

A major shift is unfolding in the Arctic as the United States reportedly moves to reestablish military sites in Greenland under a new security agreement with Denmark and Greenland. The planned locations include Narsarsuaq, home to the former U.S. Bluie West One base, and Mestersvig, a remote site currently used by Denmark’s Sirius Dog Sled Patrol. The agreement is expected to bring renewed U.S. military activity to Greenland while placing Arctic security within a broader NATO framework. With the exact terms still undisclosed, the move could mark a significant expansion of America’s strategic presence in the Arctic.

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~PR.516~HT.408~ED.104~GR.538~VG.HM~

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00:01बर्फ से ढकी एक ऐसी जगह है जहां चारों तरफ सिर्फ सन्नाटा और माइनस 20 डिग्री की जमा देने वाली
00:08ठंड है लेकिन आज उसी बर्फ की चादर के नीचे दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की महा जंग की
00:14बिसाद बिच रही है
00:15सोच ये जिस ठिकाने को शीत युद्ध यानी कोल्ड वार के दोरान 1950 के दशक में अमेरिका ने बंद घोशित
00:23करके खाली कर दिया था
00:25आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि 70 साल बाद वाशिंग्टन की नजरें फिर से उसी बर्फीले इलाके पर टिक गई
00:30हैं आज हम बात कर रहे हैं ग्रीन लैंड की
00:33जी हाँ वही ग्रीन लैंड जो कभी शान्त बर्फ का महद्वीप माना जाता था लेकिन आज वही ग्रीन लैंड अमेरिका
00:40डेनमार्क और नाटो के नए सुरक्षा चक्र का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है
00:44खबरें और रिपोर्ट काफी समय से आ रही थी लेकिन रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट ने इस पर मुहर लगा दी
00:50है
00:50अमेरिका डेनमार्क और ग्रीन लैंड मिलकर एक ऐसे एतिहासिक और रणनीतिक आर्केटिक सुरक्षा समझोते आर्केटिक सिक्योरिटी एग्रिमेंट पर दस्तखत करने
01:00जा रही है
01:00जो पूरी दुनिया का ध्यान अपनी और खीच रहा है
01:04कहा जा रहा है कि इस हफते नियू यूर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा UNGA की बैठक के दौरान
01:11इस समझोते पर तीनों देशों के बड़े नेता आपचारिक मोहर लगा सकते हैं
01:16अब सवाल ये है कि इस समझोते में ऐसा खास क्या है
01:19इस पूरे समझोते में दो नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है
01:23नारसार सुआक और मेस्टर्स विग आईए आपको थोड़ा पीछे इतिहास में ले चलते हैं
01:29दक्षिनी ग्रीन लैंड का नारसार सुआक
01:32यह कोई आम जगह नहीं है
01:34दूसरे विश्वयुद्ध और शीत युद्ध के द्वार में
01:37अमेरिका का यहां एक मशहूर एर बेस हुआ करता था
01:40जिसे दुनिया ब्लूई वेस्ट वन के नाम से जानती थी
01:441950 के दशक में जब स्थितियां बदली तो अमेरिका ने इसे छोड़ दिया
01:49लेकिन अब करीब 70 साल बाद इसी पुराने ठिकाने को
01:53अमेरिका फिर से जिन्दा करने की योजना बना रहा है
01:56और दूसरा ठिकाना है द्वीब के पूर्वी तटपर स्थित
02:00मेस्टर्स विग
02:01इस जगह की खासियत यह है कि फिलहाल यहां डेन्मार्क की
02:05एक बेहत खास और खतरनाक
02:07स्पेशल फोर्स काम करती है
02:08जिसे सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल कहा जाता है
02:12यह टीम बर्फ के बीच कुत्तों की गाडियों पर गश्ट लगा कर
02:16इस बर्फीले इलाके की रखवाली करती है
02:18अब यह जगह भी अमेरिकी सैन्य उपस्थिती का हिस्सा बनने जा रही है
02:22लेकिन रुकी एक कहानी में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है
02:25अगर अमेरिका सिर्फ अपने लिए बेस बनाना चाहता है
02:29तो डेन्मार्क की सोच थोड़ी अलग है
02:31रॉइटर्स से बात करने वाले तीन वरिष्ट सूतरों का कहना है
02:35कि हालांकी समझोते की बारीक शर्तें अभी सामने नहीं आई है
02:38और हस्ताक्षर होने तक कुछ चीजें गुप्त रखी जा रही है
02:41लेकिन डेन्मार्क ने एक बहुत बड़ी शर्त रखी है
02:44डेन्मार्क की राजधानी कोपेनहेगन का साफ कहना है
02:47कि ग्रीन लैंड में जो भी सुरक्षा व्यवस्था होगी
02:50वो सिर्फ अमेरिका और डेन्मार्क के बीच का निजी सौधा नहीं होगी
02:54इसे नाटो, North Atlantic Treaty Organization के पूरे छत्री और धांचे के तहत लाया जाएगा
03:00यानि अमेरिका इसे ग्रीन लैंड और अपनी निजी सौधा के तोर पर देख रहा है
03:05जबकि डेन्मार्क इसे पूरे नाटो ब्लॉक की आर्कटिक रणनीती का हिस्सा बनाना चाहता है
03:10अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर इतने दशकों बाद अमेरिका को अचानक ग्रीन लैंड
03:16की याद क्यों आई
03:16जवाब है आर्कटिक का पिघलता हुआ नक्षा
03:20ग्लोबल वार्मिंग की वजह से जैसे जैसे आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है
03:26वहाँ नए समुद्री व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं और साथ ही तेल, गैस और दुरलव खनिजों का बहुत बड़ा खजाना
03:32बाहर आ रहा है
03:33रूस पहले से ही आर्कटिक में अपने सैन्य अड्डे मजबूत कर रहा है और चीन भी इस रास्ते पर अपनी
03:39पकड़ बनाना चाहता है
03:40ऐसे में अमेरिका के लिए ग्रीन लैंड में अपनी मौजूद की बढ़ाना अब कोई पसंद नहीं बलकि एक मजबूरी बन
03:46चुका है
03:46तो क्या सतर साल बाद ग्रीन लैंड में अमेरिकी सेना की वापसी एक नए आर्कटिक कोल्ट वॉर का नगाड़ा बजा
03:53रही है
03:53क्या संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस हफते जब दस्तखत होंगे तो दुनिया में सुरक्षा का एक नया समीकरन जन्म लेगा
04:00इस समझोते की एक-एक बारीकी पर हमारी नजर बनी हुई है
04:05जैसे ही इसके गुप्त दस्तावेश सामने आएंगे हम सबसे पहले आप तक पहुचाएंगे
04:09आपको क्या लगता है क्या ग्रीन लैंड में नाटो और अमेरिका की यह मौझूद की दुनिया में शांती लाएगी
04:15या आर्केटिक को नए तनाव का अड़ा बना देगी
04:18अपनी राए नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए
04:21देश और दुनिया की तमाम बड़ी और प्रमानिक खबरों के लिए देखते रहिए
04:26One India Hindi
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