00:01बर्फ से ढकी एक ऐसी जगह है जहां चारों तरफ सिर्फ सन्नाटा और माइनस 20 डिग्री की जमा देने वाली
00:08ठंड है लेकिन आज उसी बर्फ की चादर के नीचे दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों की महा जंग की
00:14बिसाद बिच रही है
00:15सोच ये जिस ठिकाने को शीत युद्ध यानी कोल्ड वार के दोरान 1950 के दशक में अमेरिका ने बंद घोशित
00:23करके खाली कर दिया था
00:25आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि 70 साल बाद वाशिंग्टन की नजरें फिर से उसी बर्फीले इलाके पर टिक गई
00:30हैं आज हम बात कर रहे हैं ग्रीन लैंड की
00:33जी हाँ वही ग्रीन लैंड जो कभी शान्त बर्फ का महद्वीप माना जाता था लेकिन आज वही ग्रीन लैंड अमेरिका
00:40डेनमार्क और नाटो के नए सुरक्षा चक्र का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है
00:44खबरें और रिपोर्ट काफी समय से आ रही थी लेकिन रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट ने इस पर मुहर लगा दी
00:50है
00:50अमेरिका डेनमार्क और ग्रीन लैंड मिलकर एक ऐसे एतिहासिक और रणनीतिक आर्केटिक सुरक्षा समझोते आर्केटिक सिक्योरिटी एग्रिमेंट पर दस्तखत करने
01:00जा रही है
01:00जो पूरी दुनिया का ध्यान अपनी और खीच रहा है
01:04कहा जा रहा है कि इस हफते नियू यूर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा UNGA की बैठक के दौरान
01:11इस समझोते पर तीनों देशों के बड़े नेता आपचारिक मोहर लगा सकते हैं
01:16अब सवाल ये है कि इस समझोते में ऐसा खास क्या है
01:19इस पूरे समझोते में दो नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है
01:23नारसार सुआक और मेस्टर्स विग आईए आपको थोड़ा पीछे इतिहास में ले चलते हैं
01:29दक्षिनी ग्रीन लैंड का नारसार सुआक
01:32यह कोई आम जगह नहीं है
01:34दूसरे विश्वयुद्ध और शीत युद्ध के द्वार में
01:37अमेरिका का यहां एक मशहूर एर बेस हुआ करता था
01:40जिसे दुनिया ब्लूई वेस्ट वन के नाम से जानती थी
01:441950 के दशक में जब स्थितियां बदली तो अमेरिका ने इसे छोड़ दिया
01:49लेकिन अब करीब 70 साल बाद इसी पुराने ठिकाने को
01:53अमेरिका फिर से जिन्दा करने की योजना बना रहा है
01:56और दूसरा ठिकाना है द्वीब के पूर्वी तटपर स्थित
02:00मेस्टर्स विग
02:01इस जगह की खासियत यह है कि फिलहाल यहां डेन्मार्क की
02:05एक बेहत खास और खतरनाक
02:07स्पेशल फोर्स काम करती है
02:08जिसे सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल कहा जाता है
02:12यह टीम बर्फ के बीच कुत्तों की गाडियों पर गश्ट लगा कर
02:16इस बर्फीले इलाके की रखवाली करती है
02:18अब यह जगह भी अमेरिकी सैन्य उपस्थिती का हिस्सा बनने जा रही है
02:22लेकिन रुकी एक कहानी में एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है
02:25अगर अमेरिका सिर्फ अपने लिए बेस बनाना चाहता है
02:29तो डेन्मार्क की सोच थोड़ी अलग है
02:31रॉइटर्स से बात करने वाले तीन वरिष्ट सूतरों का कहना है
02:35कि हालांकी समझोते की बारीक शर्तें अभी सामने नहीं आई है
02:38और हस्ताक्षर होने तक कुछ चीजें गुप्त रखी जा रही है
02:41लेकिन डेन्मार्क ने एक बहुत बड़ी शर्त रखी है
02:44डेन्मार्क की राजधानी कोपेनहेगन का साफ कहना है
02:47कि ग्रीन लैंड में जो भी सुरक्षा व्यवस्था होगी
02:50वो सिर्फ अमेरिका और डेन्मार्क के बीच का निजी सौधा नहीं होगी
02:54इसे नाटो, North Atlantic Treaty Organization के पूरे छत्री और धांचे के तहत लाया जाएगा
03:00यानि अमेरिका इसे ग्रीन लैंड और अपनी निजी सौधा के तोर पर देख रहा है
03:05जबकि डेन्मार्क इसे पूरे नाटो ब्लॉक की आर्कटिक रणनीती का हिस्सा बनाना चाहता है
03:10अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर इतने दशकों बाद अमेरिका को अचानक ग्रीन लैंड
03:16की याद क्यों आई
03:16जवाब है आर्कटिक का पिघलता हुआ नक्षा
03:20ग्लोबल वार्मिंग की वजह से जैसे जैसे आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है
03:26वहाँ नए समुद्री व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं और साथ ही तेल, गैस और दुरलव खनिजों का बहुत बड़ा खजाना
03:32बाहर आ रहा है
03:33रूस पहले से ही आर्कटिक में अपने सैन्य अड्डे मजबूत कर रहा है और चीन भी इस रास्ते पर अपनी
03:39पकड़ बनाना चाहता है
03:40ऐसे में अमेरिका के लिए ग्रीन लैंड में अपनी मौजूद की बढ़ाना अब कोई पसंद नहीं बलकि एक मजबूरी बन
03:46चुका है
03:46तो क्या सतर साल बाद ग्रीन लैंड में अमेरिकी सेना की वापसी एक नए आर्कटिक कोल्ट वॉर का नगाड़ा बजा
03:53रही है
03:53क्या संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस हफते जब दस्तखत होंगे तो दुनिया में सुरक्षा का एक नया समीकरन जन्म लेगा
04:00इस समझोते की एक-एक बारीकी पर हमारी नजर बनी हुई है
04:05जैसे ही इसके गुप्त दस्तावेश सामने आएंगे हम सबसे पहले आप तक पहुचाएंगे
04:09आपको क्या लगता है क्या ग्रीन लैंड में नाटो और अमेरिका की यह मौझूद की दुनिया में शांती लाएगी
04:15या आर्केटिक को नए तनाव का अड़ा बना देगी
04:18अपनी राए नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए
04:21देश और दुनिया की तमाम बड़ी और प्रमानिक खबरों के लिए देखते रहिए
04:26One India Hindi
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