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  • 7 minutes ago
चुनाव आयोग में कथित मनमानी को लेकर विवाद, विपक्ष ने CEC का इस्तीफा मांगा

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00:00खेट अब आगे बढ़ते हैं अगली खबर का रुक करते हैं आपको ये बताते हैं कि इस वक्त पूरे विपक्ष
00:04के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है चुनाव आयोग
00:07और हमारे देश में चुनाव आयोग सिर्फ चुनाव कराने वाली एक एजनसी नहीं है
00:11भारत के लोकतंतर में करोडों लोगों का जो भरोसा जो विश्वास है चुनाव आयोग को उस विश्वास का सबसे बड़ा
00:20कस्टोडिय यानि संरक्षक माना जाता है
00:23और इसलिए आज जब पूरा विपक्ष चुनाव आयोग की निश्पक्षता पर सवाल उठा रहा है
00:28मुख्य चुनाव आयोग तो ग्यानेश कुमार की गिरफतारी की मांग कर रहा है
00:31इस्तीफा तो दूर अब गिरफतारी की मांग कर रहा है
00:34तब हम आपको इस पूरे विववाद की चड़ तक ले जाना चाहते हैं
00:38क्या रोप लगा रहे है
00:40और जो चुनाव आयोग दलील दे रहा है
00:42सरकार का इस पूरे मुद्दे पर क्या रोप है
00:46उससे पहले आप कॉंग्रस के देश्व्यापी प्रदर्शन की ये तस्वीरे पहले देखिए
00:49जिसमें मुख्य चुनाव आयोक्त ग्यानेश कुमार के स्तीफे की और गिरफतारी की मांग की गई
00:54इनमें भी दिल्ली में चुनाव आयोक के मुख्याले के बाहर भारी प्रदर्शन हुआ
00:59जिसमें प्रदर्शन कारियों ने ग्यानिश कुमार का मास्क पहन कर उन्हें देश दुरू ही बताया
01:04जबकि लखनाओं, कोलकाता, चंडिगर, पत्ना, भोपाल, गौहाटी में कॉंग्रस के बड़े नेताओं की अगवाई में पैदल मार्च निकाले गए
01:15इसके अलावा, शिमला में प्रदर्शन कारियों ने चुनाब आयोक के ओफिस बोर्ड पर कालिक पोट दी है
01:22जबकि लखनाओं में सडकों पर उत्रे कॉंग्रस के कारकरताओं को हिरासत में ले लिया गया
01:27और पटना में भी कॉंग्रसी कारकरताओं पर वाटर क्यानन का इस्तमाल हुआ
01:31बड़ी बात ये है कि इन सभी विरोध प्रदर्श्टों में ग्यानेश कुमार कॉंग्रस के निशाने पर रहे
01:36कुछ शहरों में उनके पुतले जलाए गए जबकि कुछ शहरों में 48 घंटे के अंदर इस्तीफा देने का अल्टिमेटम दिया
01:42गया है
01:42देखिए
01:48जब तक ज्यानेश कुमार का इस्तीफा नहीं हो जाता तब तक हमारा संगर्श जूही सडकों पर जारी रहेगा
02:06हमें सकती हा हओओ लंग तक हमें सОने हैं
02:11कर दो कर दो करえः जूवर्कy में सकती हाओ
02:29कर दो कर दो को कर दो कर दो
02:30कर दो कर दो कर दो
02:34i ढयाוב� Solar
02:47इन विरोध प्रदशनों के बीच ऐसी खबरे भी आई
02:50कि चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में अपने दो कारक्रम स्थगित कर दिये हैं
02:54जिन में मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार शामिल होने वाले थे
02:58इन में पहला कारक्रम मेरट में आज यानी 25 सितंबर को और दूसा कारक्रम वारणसी में 28 सितंबर को होना
03:06था
03:06और कॉंग्रिस नेताओं का ऐसा दावा है कि विरोध की डर से ग्यानेश कुमार ने खुद इन कारक्रमों को अपस्थगित
03:12कर दिया है
03:13जबकि चुनाव आयोग ने कहा है कि ये दोनों कारक्रम 21 सितंबर को ही स्थगित किये गए थे और इसका
03:18मौझूदा विवाद से कोई संबन नहीं है
03:20अब यहाँ विवाद क्या है वो भी समझे है ये बात सब जानते हैं कि विपक्ष पिछले कई महीनों से
03:25चुनाव आयोग की निश्पक्षता पर सवाल उठा रहा है
03:27इनमें भी सबसे बड़ा मुद्दा उसने वोटर लिस्ट के रिविजिन को बनाया जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिविजिन कहते हैं यानि SIR
03:35आपने भी सुना होगा
03:36ये वही रिविजिन है जिसके तहट अब तक 30 राजियों और केंदर शासित प्रदेशों में 13 करोड नाम वोटर लिस्ट
03:43से काटे जा चुके हैं
03:45और विपक्षी दलों ने इस पर बार बार सवाल उठाए
03:48इसी साल बार मार्च को कुछ विपक्षी पार्टियां मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार को उनके पच से हचाने के लिए
03:55महाभयोग प्रस्ताव लाना चाहती थी
03:58और उनका आरोग था कि ग्यानेश कुमार एसायार के जर्ये वोटर्स का नाम काट कर चुनावों में बीजेपी का फायदा
04:04पहुचा रहे है
04:06लेकिन उस वक्त 6 एप्रिल को लोगसभा में ये प्रस्ताव स्पीकर द्वारा खारिच कर दिया गया था
04:11और विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार हमला वर रहा
04:15आप ये भी कह सकते हैं कि विपक्ष ने एसायार के इस मुद्दे को बिहार विधानसभा चुनाओ के बाद कभी
04:21नहीं चोड़ा
04:21और इस पर उसकी तरफ से लगातार चर्चाएं चलती रही और अब जब इस पर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट
04:28में ग्यानेश कुमार की कारिशली पर सवाल उठाए गए
04:31तो विपक्ष को ये साबित करने का मौका मिला कि वो जो सवाल उठा रहा था वो सवाल गलत नहीं
04:37थे
04:37अब देंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट में ऐसा क्या है सरलता से आपको बताते है
04:42ये रिपोर्ट कहती है कि चिनाव आयोग में लगबख सभी बड़े फैसले मुख्य चिनाव आयोग तो ग्यानेश कुमार खुद ले
04:48रहे थे
04:49जबकि ये नेमों के खिलाफ है
04:51कानून कहता है कि चिनाव में जो शिर्ष तीन सदस्य होंगे उन्हें सभी फैसले सर्वसमती यानि युनानेमिटी से लेने हों
04:59या तो तीनों एक तरफ हो या फिर कम से कम दो लोग फैसले के समर्थन में हो
05:04अगर फिर भी सदस्यों में मदबेध है तो जैसा हमने आपको बताया टू आउट उफ त्री
05:09तो निर्णै बहुमत के आधार पर होगा
05:11लेकिन कोई सदस्य या मुख्य चिनाव आयूग खुद अपनी मर्जी से सिर्फ एक तरफा फैसले नहीं ले सकते
05:19जबकि ये रिपोर्ट कहती है कि ये जो मीडिया रिपोर्ट है कि पिछले 10 महीनों में
05:23चिनाव आयूग के कम से कम 14 बड़े और महतफून फैसलों में ग्यानेश कुमार ने बाकी दो आयूगतों की और
05:28सहमती को शामिल ही नहीं किया
05:30ये दो आयूगतें सुबीर सिंग संधू और विवेक जोशी जिनकी तस्वीर आप उनके साथ देख रहे है
05:38दावा है कि इन दोनों चुनाव आयूगतों ने SIR की प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों पर 14 आपत्नियां लिख कर
05:44दी
05:45लेकिन ग्यानेश कुमार ने अपने अन्तिम फैसले में उन्हें शामिल ही नहीं किया
05:50बात इतनी बढ़ गई कि दोनों आयूगतों को कैबनेट सचिफ तक को पत्र लिखना पड़ा लेकिन तब भी स्थिती में
05:56कोई बड़ा बदलाव नहीं आया
05:58हला कि बीजेपी का इस पर दावा है कि कैबनेट सेक्रेटरी को लिखी गई चिफ्थियां या फिर जो भी इन्होंने
06:06आपत्तियां जताई थी उसका कोई भी डॉक्यूमेंट अभी तक सामने नहीं आया है
06:12यानि यहां से अगर आप देखिए तो विपक्ष जो आरोप लगातार लगा रहा है विपक्षी नेताओं का तो यह कहने
06:17का मौका उनको मिली गया कि चुनाव आयोक के अपने ही आयोक सायर की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे
06:22लेकिन ज्यानेश कुमार अपनी मन मर्जिय
06:24चला रहे थे दूसा दावा इस रिपोर्ट में यह है कि चुनाव आयोक के अंदर मद्भेद इस कदर बढ़ चुके
06:31थे कि 9 सितंबर 2026 को हुई बैठक से पहले मुख्य चुनाव आयोक और दोनों चुनाव आयोकतों के बीच पिछले
06:38चार महीने में एक भी संयुक्त बैठक
06:41नहीं हुई थी यानि ये तीनों एक साथ जो फुल कमिशन की बैठक होती है वो चार महीने से नहीं
06:48हुई थी और इस पर भी विपक्षिय सवाल पूछ राए कि क्या ग्यानेश कुमान ने खुद को चुनाव आयोक का
06:53अल्टमेट बॉस समझ लिया था अब यह देखिए कि व
07:09दाता सूची में पहली बार अपना नाम जुडवाता है तब उसे ये फॉर्म भरना होता है पहले इस फॉर्म में
07:14नई वोटर से ये नहीं पूछा जाता था कि उसके माता पिता या दादा दादी का नाम पुरानी वोटर लिस्ट
07:19या इसायर की सूची में था या नहीं लेक
07:35था कि फॉर्म 6 को इस तरह बदला नहीं जा सकता उसमें कोई भी नया पेपर नहीं जोड़ा जा सकता
07:41इसके लिए पहले सरकार को नियम बदलना पड़ेगा सरकार कानून में बदलाव करें फिर यह हो सकता है उनके साथ
07:49दूसरे चुनाव आयुक सुपीर संदू ने भी विरो�
07:53के बावजूद यह सवाल फॉर्म में एक एनेक्शनर के जरिये डाला गया और 21 सितंबर तक इसे हटाया नहीं गया
08:01था
08:03दूसरा बड़ा विवाद इस बात को लेकर था कि बोटरलिस्ट का कंट्रोल स्थानी अधिकारियों के पास रहे या सीदे दिल्ली
08:09में चुनाव आयो के पास रहे
08:12जिसे पहले स्थानी अधिकारी, जो सरकारी अधिकारी हैं जिसे Electoral Registration Officer कहते हैं ERO
08:18वो किसी भी वोटर की जाच कर सकता था
08:20मतलब वोटर का नाम आड करना है या निकालना है यह उसका काम था
08:25अगर उसे लगता था कि उस वोटर का पता सही है, उसने जो जानकारी बताई है उसमें कोई दूटी नहीं
08:30है
08:30तो अपने स्थर पर कंप्यूटर में उस वोटर का नाम मत दाता, सूची में जोड सकता था, घाटा सकता था
08:36और इस व्यवस्था में दिल्ली में बैटे बड़े अफसरों का सीधा दखल होता ही नहीं था
08:40लेकिन पिछले एक साल में आरोपों के मताबिक ये व्यवस्था बदली, मुख्य चुनाव आयोक तो ग्यानेश कुमार के निर्देश पर
08:49इस रिपोर्ट के हवाले से ये कहा गया है कि चुनाव आयोक ने जो आईटी विभाग में नया सॉफ्ट्वेर ECI
08:55NET बनाया है
08:56जिसको डिजिटल बैक्बोर्न चुनाव आयोक का बना देया गया, कई पोर्टल्स, 40 के आसपास पोर्टल्स को खत्म करके
09:01और अब स्थानी अधिकारी सिर्फ नाम का सुझाओ दे सकता था, ये इस रिपोर्ट में दावा किया गया है
09:09कि ECI NET में अब जो स्टेट में जो लोग काम कर रहे थे, धीरे धीरे बताया जा रहा है
09:16आरोप है कि वो जो पहले फैसले ले रहे थे वो अब नहीं ले सकते थे
09:20लेकिन अंतिम बटन ये अप्रूवल दिल्ली से होता था और इस बदलाव का भी दोनों चुनाव आयुक्त ने लिखे त्विरोद
09:25किया था
09:26लेकिन आरोप है कि ग्यानेश कुमार ने इन आपतियों को नजर अंदास कर दिया
09:31अब इससे हुआ ये कि गोवा में जिनमत दाताओं को स्थाने चुनाव अधिकारियों ने सही पाया
09:38उनके नाम भी दिल्ली में बैठे अफसरों ने वोटर लिस में शामिल नहीं किये
09:41जिससे ये विवाद और बढ़ गया
09:43और आरोप यही है कि गोवा से बार बार उन 97 वोटर्स के लिए चिट्थियां लिखी जा रही थी
09:48लेकिन बावजूद इसके उनको नहीं जोडा गया
09:52तीसरा आरोप पश्चम बंगाल के उन मद्दाताओं को ले कर था जिनका नाम वोटर लिस से हटाए गया
09:57और यहां भी दावा है कि दोनों चुनाव आयुक्त मुख्यों चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार के फैसलों से सहमत नहीं थे
10:03लेकिन फिर भी इन फैसलों को लागू किया गया
10:06और आखिर बड़ा विवाद तब हुआ जब जुलाई के अंत में चुनाव आयुक्त के अंदर प्रशासनिक काम के बटवारे को
10:14लेकर आदेश जारी किया गया
10:15और उसे दोने आयुक्तों ने खारिच कर दिया और ये कहा कि इसके ज़रिये चुनाव आयुक्त को सिर्फ एक व्यक्ती
10:20द्वारा नियंतरत करने की कोशश हो रही है
10:23और क्यूकि विपक्षी दल पहले से ग्यानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग कर रहे थे
10:27इसले इस रिपोर्ट के आते ही नया सियासी बखेडा शुरू हुआ
10:30विपक्षी दल यही कह रहे है कि ग्यानेश कुमार का सितीफा और गिरफतारी दोनों चाहिए
10:40इसी के साथ साथ देश भर में विरोध की बात कौक्षो जनता पार्टी भी कर रही है
10:44और उनका कहना है कि ग्यानेश कुमार ने सितीफा नहीं दिया तो दो अक्टूबर से देश व्यापी आंदोलन करें
10:50विपक्षी दल ही नहीं बलकि एंडिये के तीन सहयोगी दलों ने भी चिनाव आयोग से स्पष्टी करण मांगा है
10:55इनमें पहले हैं केंद्र मंत्री चिराग पासवान जिनोंने ये कहा है कि चिनावी प्रक्रिया पर संदेह बढ़ना ठीक नहीं चिनाव
11:02आयोग को अपना पक्ष रखना चाहिए
11:04इनडिये में शामिल उपेंद्र कुश्वाहा ने भी कहा है कि SIR और EVM से जुड़े विवात को लेकर जनता में
11:10भ्रम है
11:10इसलिए चिनाव आयोग को तुरं सही स्थती स्पष्ट करनी चाहिए
11:14आंदरप्रदेश में चंदरबावु नायरू की पार्टी टीडीपी ने भी चुनाव आयोग से सवालों और का जबाब देने और स्थती स्पष्ट
11:20करने की मांग की ताकि उस पर जनता का भरोसा मजबूट रहे सुनिए
11:25मैं मानता हूँ कि ये स्वतंत्र एजंसे संस्थाएं हैं निस्पक्षता से कारे करती होंगी पर अकर देश के एक भी
11:32नागरिक के मन में इस तरीके का भ्रहम आता है तो इसको दूर करने की जिम्मेदारी भी चुनाव आयोग के
11:38ऊपर ही है
11:56चुनाव आयोग ने इस देश में बहुत बड़ा घोटाला बहुत बड़ा कांड और भष्टाचार किया है
12:03चुनाव को हज्याक किया है वोट चूरी की है सब कुछ क्या है एसायर का जो बुद्दा सामने आया है
12:10वो क्या है
12:11हर्याना में महराष्ट में बिहार में बंगाल में एक के बाद एक वोट चुरा चुरा के सरकारें चुरा चुरा के
12:21इनकी जोली में डाल दी
12:22आज उनको इस्तीफा दिना चाहिए उन पर कानोनी कारवाई होनी चाहिए

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