00:00गुरुकुल सिक्षा की परंपरा वर्तमान समय में लगभग समाप्त हो गई है। हजारी बाग में ये परंपरा अभी भी जीवित
00:07है। अचारे कौटेले के निर्देशन पर आर्ष कन्या गुरुकुल का संचालन हो रहा है। जहां 300 से अधिक छातर छात्राएं,
00:15सास्टर और
00:16सस्टर दोनों की विद्या प्राप्त कर रहे हैं, अधिक तर छात्र गरीब परिवार से आते हैं। यहां के विद्यार्थियों को
00:23वेद, उपनिसद, विविन, सास्टर, संस्कृत के साथ साथ आधूनिक सिक्षा दी जाती है। मैट्रिक तक गुरुकुल परिसर में सिक्ष
00:30का प्रवधान है और उचितर सिक्षा के लिए छाचा छात्राएं विविन कॉलेज विश्विद्याले जाते हैं। गुरुकुल के लिए यह बहुत
00:37खुसी का पर ले कि यहां की विरांगना सौमया कुमारी आरिया को राजपाल के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ है�
00:45परसाद मुखरजी विश्विद्याले राची से सहाइते पालनी वियाकरण में में सतर दोहजार चोविस चप्रिश में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है।
00:53महर्सी पालनी कृत अध्यास्टिक सुत्र पाठ में 3970 सुत्र धातु पाठ दोहजार धातू की वियाक्या के साथ �
01:02वियाकरणाचार की छात्रा को उपाधी मिली है। इस विशे की सिक्षा प्राप्त करने वालों की संक्या बेहत कम है।
01:32बाहर के कॉलेज से मेरी परिक्षा होती रही है। और जो पार्टिक्रम होता था वो गुरुफल में ही आचारिय जी
01:40पढ़ाया करते थी। तो आज मुझे इतना बड़ा स्वर्ण पदक का उसर मिला है। राप्त करने का। उसका सारा श्री
01:51तो मैं आचारिक को देना चाहू
02:29पढ़ाय करते हैं।
02:31दर्शन के रूप में हमारे जो छे दर्शन है, उपनिशद है, द्रमण ग्रंद है, इनके बढ़ाय होती है जो बाहर
02:40नहीं पढ़ायी जाती है।
03:02गुरुकुल के संचालक अचार कोटले कहते हैं कि यह सिक्षा बहुत कम चातर प्राप्त करते हैं।
03:07गुरुकुल में ऐसी सिक्षा होती है, यह बहुत खुसी की बात है कि यहां की छातरा ने गोल्ड मेल प्राप्त
03:13किया।
03:13वह भी पाननी व्याकरण में।
03:17पूरे विश्व के अंदर महर्शी पाननी का सबसे जिसको बोलते हैं तफ ग्रामर माना जाता है।
03:24बहुत बहुत बड़ा व्याकरण माना जाता है। जिसमें 4,000 सुत्र हैं, 2,000 धातुइं हैं, 4,000,000 रूप
03:31बनते हैं धातुओं के।
03:32तो उसमें निशनात हो करके और वो विदूशी बनी है, व्याकरणाचारी बनी है वो।
03:37और साथ ही डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्विद्याले से अरी उसने एम्मे किया है और फाइनल में उसका स्वन पदक
03:45को उसको यह पद मिला। उपाधी मिले।
03:49अनिप सिख्षा से कैसे भिनें बाकि क्या कम बच्चे पहाई करते हैं इसका।
03:55इसलिए कि इस समय ने संस्कृत के प्रती लोगों की जो भावना है वो थोड़ा सा अलग है संस्कृत समझते
04:03हैं कि संस्कृत पढ़के क्या करेंगे।
04:04परंतु एक समय अइसा भी रहा जो पूरा विश्वत संस्कृत पढ़ने के लिए भारत वर्ष आया आया करता था।
04:20इसलिए हमने गुरुकुल के नाम भी रखा आर्श कन्या गुरुकुल।
04:26आज एक बिटिया यहां की उन्होंने पीजी में गोल्ड मैडलिस्ट हुई है जो उन्होंने 90% हासिल किया हुआ है।
04:35तो ये सुरू सही गुरुकुल एक बहुत उचे पायदान पर है।
04:41पाननिये सिक्षा संस्कृत व्याकरन और ध्वनी विज्यान का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्राचिन वेद गरंथ है।
04:47वर्थ पान पिड़ी के चात्र इस सिक्षा से दूर होते जा रहे हैं।