00:04मेरट जील की चार दिवारी के अंदर से अगर आपको प्यार जुदाई और धोके वाले पुराने गानों की अवास सुनाई
00:10दे तो शायद एक पल के लिए आप भी सूच में पढ़ जाएंगे
00:13आखिर जील में बंद कैदियों को ऐसे गाने सबसे ज़ादा क्यों पसंद आ रहे हैं मामला किसी फिल्म की कहानी
00:19का नहीं बलकि मेरट जो की उत्तर प्रदेश में है उस जील का है उसके अंदर एका प्रोग्राम चल रहा
00:25है जो की है रेडियो परवास दरसल ये पूरा रेडिय
00:29रेडियो इस्टेशन जील के अंदर ही चल रहा है जहां कैदी सिर्फ गाने नहीं सुन रहे हैं बलकि खुद आर्जी
00:35बनकर रेडियो चला रहे हैं मिरट जिला जील में शुरू किया गया ये इंटरनल रेडियो इस्टेशन कैदियों के लिए एंटरटेर्मेंट
00:55और कनेक्�
00:57सिर्फ उनका बैरेक नंबर बताया जाता है सबसे इंटरस्टिंग बात है उनकी गानों की पसंद दरसर रिपोर्ट की माने तो
01:0390, 80 और 70 के दशक के पुराने हिंदी गाने कैदियों के बीच काफी जादा पॉपलर हैं पुरुष कैदिय जुदाई
01:10धोके वाले सौंग और भ
01:25हिला कैदियों के बच्चे जिल से बाहर रहते हैं अधिकतर ऐसा दिखा जाता है ऐसे में मा बच्चों और परिवार
01:32से जुड़े गाने अपने घर और अपनों की याद दिला देते हैं यानि कि इन गानों के बीचे सिर्फ एंटरटेर्मेंट
01:37नहीं बलकि एक एमोशनल एं�
01:53के निबाता है और बाकी चुक कैदी स्टूडियों में आकर गाने बजाते हैं और उन्हीं गाना गाने का मौका भी
01:59मिलता है ये रेडियो करीब रोज चार घंटे चलता है सुबह दो घंटे और शांप को दो घंटे इसके लिए
02:05कंप्यूटर मिक्सर और जो हाई-टेक स्पी
02:22की 11 रेडियो परवास सेंटर उत्रपरदेश के अलग-अलग जीलों में चलाये जा रहे हैं यानि कि जिस जगा को
02:27आमतोर पर सिर्फ सजा और बंदिशों से जोड़ा जाता है वहां म्यूजिक एक अलग तरह का कनेक्शन बना रहा है
02:33प्यार जुदाई धोके और प्यार की य
02:52की 11 वालग जीज़ा भी तरह कर ear बंदिशों सेंटर धर जाता है टन्ट अलग-जीक यारा-जी यार घ
03:01है लेंगी है झालग-जीज़ खना की 11 वाल-बंदेशब क्या झाल-बंदा भी टूलग-जीज़ ओर सब्सक्या का ड़पना
03:01का अवाफनीज़ और स्वारे ओंसक्र प्