00:02क्या भगवान को पाने के लिए किसी महिला का आश्रम जाना और सन्यास लेना जरूरी है ये सवाल आज इसलिए
00:08भी चर्चा में है क्योंकि वरंदावन में प्रेमनन महाराज से जुड़े एक साधक दीपक लोधी और फ्रसिक दुलारी शरण की
00:15चौथी मंजिल से गिरने के बा
00:29किसी एक घटना के अधार पर सभी आश्रमों या सभी संतों पर सवाल खड़ा नहीं किया जा सकता लेकिन जहां
00:35कोई गंभीर आरोप सामने आए वहां सवाल पूछना और निश्पक्ष जांच होना भी जरूरी है इसी बीच एक महिला के
00:41कुछ इंटरव्यूस सामने आए हैं
00:57महिला ने एक दूसरी महिला के बारे में भी दावा किया कि उसके साथ कथित तोर पर गलत वेवार हुआ
01:02और जब वो वहां से निकलना चाहती थी तो उसके लिए तुरंद बाहर जाना असान नहीं था उन्होंने ये भी
01:07दावा किया कि एक महिला को बातरूम में बंद कर दिय
01:09गया और बाद में उसे वहाँ से निकालने की कोशिश की गए। उनका कहना है कि ऐसी शिकायते सिर्फ एक
01:14व्यक्ति तक सीमित नहीं थी और उन्होंने कई लोगों से जुड़ी ऐसी शिकायतों की जानकारी मिलने का दावा किया लेकिं
01:20दिहान रखिये ये उस महिला के इंटर्�
01:36भारती आध्यात्मिक परंपराओं में गरस्त जीवन में रहते हुए भी भक्ती सेवा, ध्यान और साधना करने की परंपरा रही है।
02:06चोड़ने या अपनी आजादी सीवित करने का दबाओ, आश्रम में जाना किसी एक व्यक्ती की अपनी इच्छा से होना चाहिए,
02:13परिवार से दूरी बनाना भी हर व्यक्ती का व्यक्ती का स्पैसला होना चाहिए, कोई मजबूरी नहीं और इतिहास में ऐसे
02:18मामले भी सामने
02:31नित्यानन से जुड़े मामलों में भी आश्रम, महिलाओं और परिवारों को लेकर कानूनी विवात सामने हैं, तो हजार चौबिस में
02:37गुजरात हाई कोट ने दो वयस्क महिलाओं से जुड़े एक मामले में कहा कि कोट की बातचीत में उन्हें जबरन
02:42बंदक बनाय जाने क
02:43संकेत मिले हैं और उन्होंने अपनी आध्यात्मिक रह चुड़ने की बात कही दी, यानि हर आश्रम की कहानी एक जैसी
02:50नहीं है, कुछ जगहों पर गंबीर अपराद अदालतों तक पहुचे हैं, जबकि कुछ मामलों में लगाए गए आरोब अदालत में
02:56उसी तरह साविक �
02:56इसलिए असली सवाल आश्रम बनाम परिवार नहीं, असली सवाल है कि क्या व्यक्ति को अपनी आस्था चुड़ने की अजादी है,
03:03क्या वो सुरक्षित है, क्या वो अपनी इच्छा से वहां रह रहा है, और क्या जरुवत पढ़ने पर वो बिना
03:08डर के वहां से बाहरा सकता
03:10बगवान से जुड़ने के लिए रास्ता कोई एक नहीं, कोई मंदिर में रहे कर भक्ति कर सकता है, कोई घर
03:15में रहे कर पूजा कर सकता है, कोई सेवा के जरीया अध्यात्मिक जीवन जी सकता है, कोई सरन्यास का रास्ता
03:20चुन सकता है, आखिर में फैसला व्यक्ति को होना चाह
03:25जानकारी लेना और अपनी आजादी और सुरक्षा को समझना भी उतना ही जरूरी है
03:30फिलाल इस वीडियो में इतना ही आप क्या कहना चाहेंगे
03:33कॉमेंट सेक्षन में लिख कर जरूर बताएं वीडियो को लाइक करें
03:35शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्को न पोले