00:01पित्रपक्ष के शिर्वात हो चुकी है तमाम लोग अपने पुर्वजों को लेकर के इस्ट्राध्ध और तरपड कर रहे हैं लेकिन
00:07ऐसे में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें ये पता ही नहीं है कि उनके मा ता पिता
00:12या फिर उनके पुर्वजों के तिथी क्
00:18किस तरीके से स्ट्राध्ध करें और क्या कुछ इसका विधान होगा इन तमाम विश्यों पर बाचित करने के लिए हमारे
00:26साथ काशी के प्रख्याद जो तिशाचार है पंडित पवंत रिपाठी जी मौझूद है जिन से हम ये बाचित करके समझेंगे
00:32कि जिन लोगों को उन
00:34मौने पुर्वजों की तीथियों का पता नहीं होता वो तरीके से उनका तर्फर करें पत्यपक्ष की शिर� канट हो चूखी
00:40है लें तमाम लोगों के सामने ये एक समत्या के रूप में बेंदू रहता है कि उन्हें की तीथियों का
00:46घ्याथ नहीं होता ऐसे में क्या कुछ मानि
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01:25प्रश्विवा पर निवास अस्थान धर्म वह स्थ्र में पता आया डिया है जब कण्ञवाशी
01:32के more hanivasum prohibus from Tarwa it is the memberными s обязitta at high
01:40Sky का दो맛 का संबंद muskंद्र प्रस्वी वासियों से सीधे जुड़ जाता है
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02:01He has arrived to see what they are doing and what they are doing.
02:08And if they are seeing what they are doing, then they are not going out of the way.
02:11This is not what they are doing and the rest of the time they are doing so far.
02:19What do we need to do so?
02:21who says that the
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03:29I am going to have a good idea of the
03:32human being and is
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03:47human being.
03:48It is a human being.
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07:12पंडित पवंत्रपाथी जी मौजूद थी जोनों ने बताया कि किस तरीके से इस पित्रपक्ष में आप अपने पित्रों को प्रसंद
07:18कर सकते हैं.
07:18बड़ी बात यह है कि तमाम ऐसे लोग हैं जिनको अपने पुरवजों की तीथियों के बारे में ज्यात नहीं है,
07:24वो चतुरदसी, द्वादसी, नौमी और अमवश्या के दिन अपने पुरवजों का तरपड कर सकते हैं और इसके साथ यह दिया
07:30आप अपने पित्रों को प्रस
07:44हूईर्ण को च्टान प्रस जोग कर सकते हैं ज्यात वादसी पुर्वजों का तर अवश्यात ग्वेरा आप हैं ज्वादसी, पुरवजों के
07:45यह दित्स तवित्सणाय कि दिन का पित्साओवें।