00:00जिन लोगो सच मुझ लगता है कि वो मिटल स्टिक टेड़ी कर देते हैं या खंबा यह गरी उनको तो
00:05पता है ना कि यह क्या हो रहा है फिर वो कैसे जहासे में आ जाते हैं यह होता है
00:08दे पावर ओफ कलेक्टिव डिलूशन
00:39सोशल हिस्टीरिया
00:41और वो आएंगे और बहुत वो सिंसेरिटी के साथ कहेंगे नहीं मैं बताता हूँ ऐसा सचमुच होता है मैंने खुद
00:45करा है तुमने खुद क्या करा है तुम्हें पता कहा है तुम्हें आपे की कुछ खबर कहा है तुम जान
00:54ही कहां रहे हो कि तुम्हारा तनमन कैसे काम कर रह
00:59करा और तुम्हें कुछ पता ही नहीं लगने दे रहा अपनी हरकतों का क्योंकि यह जो फील्ड है अंधविश्वास का
01:07इसमें एक तल की सिंसेरिटी भी बहुत चलती है वो कहेंगे मैं पूरी
01:11बैमांदारी से इस अंधविश्वास में यकीन करता हूँ और ऐसे विक्तियों को समझाना या उनसे बहस करना बड़ा मुश्किल हो
01:18जाता है क्योंकि जो बैमान है वो कम से कम जानता तो है कि उसने बैमानी करी है जिसको लगी
01:23ही नहीं रहा कि उसने बैमानी करी है उसके साथ म
01:40पताने वो सेंटिमेंटल और हो जाए को तुम हमें बेमान समझते हो क्या है क्योंकि वो सचमुच अपनी नजरों में
01:45इमानदार है है पक्का बेमान पर होश की कमी इतनी है कि उसको पता भी नहीं है क्यों बेमान है
01:50ऐसो के पास moral authority भी आ जाती है वो आप से ऐसे बात करेंगे �
01:54देखो हम बता रहे हैं हमने देखा हमारा अनुभव है हमारी बात सुनो आचायर फ्रॉड है