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पूरा वीडियो: उधार की खरीददारी: किश्तें ख़त्म नहीं होतीं, ज़िंदगी ख़त्म हो जाती है || आचार्य प्रशांत (2026)

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वीडियो जानकारी: 22.08.2026, गोवा

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Transcript
00:00मैं अपने केंपसेस से निकला था, तो एक बार मैंने कहा लोग बड़े नाराज हो गए, तो चर्चा मैंने छेडी
00:06थी कि प्लेस्मेंट वर्सेस प्रोस्टिटूशन, मैंने का इतना ही बता ना तुमकी वहाँ शरीर बेचा जा रहा है, मैंने शरीर
00:12का एक हिस्सा ही तो होता है
00:13जो प्रोस्टिटूशन ने बेचा जाता है, आउन तोर पर जो यौनांग होते हैं, उसको आप बेच देते हो, कहते हो,
00:20इसका मालिक कोई और है, आप एक निश्चित अवधी के लिए अपने शरीर के एक अंग को बेच रहे हो,
00:25उसका नाम क्या है, प्रोस्टिटूशन, और
00:28अगर आप कहो कि सुबह नौ से शाम के पांच तक मेरा ब्रेन आपका है, तो ये क्या हुआ, जेनिटल
00:34भी बॉडी पार्ट है, तो ब्रेन भी तो बॉडी पार्ट है, और उसको भी आप कहते हो, कि नौ से
00:40पांच तक मेरा ब्रेन जो है, मेरे इंप्लॉयर की सेवा में रहे�
00:56और जिसके पास जो चीज है जिसकी दुनिया कीमत करती है उसको बेचने को तैयार है किसी के पास शरीर
01:03है जिसको दुनिया खरीदने को तैयार है उसने अपने जनिटल्स बेच दी है तुम्हारे पास ब्रेन है जिसके दुनिया पैसा
01:10देने को तैयार है तो तुम जाकर गे अ�
01:25करनी थी मैंने करी

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