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  • 15 minutes ago
 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और दूसरों से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें 2,000 रुपये से ज्यादा के खास यूपीआई पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने अर्जी पर सुनवाई के लिए सहमति जताई और केंद्र, रिजर्व बैंक और दूसरों को चार हफ्ते के अंदर अपने जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. बेंच ने एमडीआर लगाने के केंद्र के फैसले पर कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया. केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने बेंच को बताया कि गेटवे का इस्तेमाल करने वाले 96 परसेंट लोगों को छूट मिली हुई है. बेंच ने कहा, 'यह कानूनी कम और टेक्निकल मुद्दा ज्यादा है.' जब सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया और रेस्पोंडेंट्स को चार हफ़्ते के अंदर अपना जवाबी हलफनामा दाखिला करने का निर्देश दिया, तो पिटीशनर के वकील ने बेंच से रिक्वेस्ट की, 'प्लीज तब तक इस पर रोक लगा दें.' बेंच ने कोई अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया. यह जनहित याचिका (PIL) एडवोकेट अंजन दत्ता ने दायर की थी.

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00:03Supreme Court has UPI MDR on the floor.
00:07The court has 2,000 rupees per person to merchant transaction.
00:12The court has been given to his court.
00:16The court has given to his court,
00:20and the reserve bank has given to 4 weeks in the end.
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00:54This shulk will be 300 rupees and will be 15 October.

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