00:00तुम्हारी बातों का जवाब देने के लिए भी मुझे पैसा लगता है। ये पैसा तुम दोगे क्या।
00:04Teaching है एक छाओं से मुक्ती लेकिन paid courses, subscriptions, donations, ads पूरा ही ecosystem खड़ा किया है।
00:12तो कह रहे हैं कि donation क्यों लेते हो, किताबे फ्री क्यों नहीं बाट रहे हैं।
00:20इसका जवाब दीजिए, आप दीजिए, मैं नहीं दूँगा।
00:22अचारी जी, ये बोलते है कि फ्री क्यों नहीं करते हैं। इस hall का एक दिन का किराई ये पांच
00:29लाक रुप है।
00:29अच्छा जवाब है। तुम्हारी बातों का जवाब देने के लिए भी मुझे पैसा लगता है। ये पैसा तुम दोगे क्या।
00:36ये जहां तुम सब के इन मिथ्या रोपों का मैं जवाब दे रहा हूँ। ये जवाब देने का भी इस
00:43ओडिटोरियम का पांच लाग रुपया लगा है। वो पैसा कहां से आएगा।
00:48या तो तुम ऐसा प्रबंद कर दो कि दुनिया भर में जितने हमारे सर्विस प्रोवाइडर्स हैं वो हमें न चार्ज
00:54करें। और संस्था में जितने कर्म चारी हैं उन बिचारों को सैल्री की जरूरत न पड़े क्योंकि उनको भी दुनिया
01:00में खाना, पीना, मकान सब फ्र
01:18यहां पर 100 200 या 300 में भी किताबे मिलती हैं