00:02इस सल जीती अवरत 3 अक्टूबर 2026 को रखा जा रहा है ये वरत हिंदू पंचांग के नुसार अश्विन मास
00:09के कृष्ण पक्ष की अश्टमी तिथी को रखते हैं
00:11ये वरत 3 दिनों तक चलता है जसकी शुरुआत नहाय खाय से होती है
00:16अगले दिन महलाएं पूरे 36 घंटे का नर्जला अपवास करती है
00:20फिर सूरुदे के बाद भगवान सूरी को अर्ग देकर अपने वरत का पारण करती है
00:25मानने ता है कि इस वरत को करने से परिवार में सुख समरुद्धी और सकारातमक्ताब बनी रहती है
00:31हाई ये एस वीडियो में जानते हैं कि जीतिया वरत की संपूर्ण पूजा सामगरी क्या होगी
00:37सबसे पहले शुरुआत करते हैं नहाय खाय की सामगरी से
00:40नहाय खाय के देने खाय जाने वाला मुख्य साग जिसे नोनी का साग कहते है
00:44महुआ की रोटी, तोरई, कंदा, यार्बी, पितरों और चील सियारों के लिए भोजन निकालने हैं तू सरसो, तेल और जिंगनी
00:53के पत्ते भी चाहिए
00:55अब ओठगन जिसे हम सरगी यानि की वरत की सुबह आपको क्या कह चाहिए
01:01खीर या हलवा, भोर में वरत शुरू करने से पहले ताजे फल और दही ग्रहन करना
01:06मुख्य पूजा सामगरी यानि की जिस दिन आप नर्जला वरत रखेंगी
01:10उस दिन जिमूत वहन भगवान की प्रतिमा या चत्र, मिट्टी या गाय के गोबर से बने हुए चील या सियारिन
01:16की मूर्ती
01:17कुश जिसमें जिमूत वहन जी की प्रतीक स्वरू प्रतिमा बनाने के लिए रखा जाता है
01:23अक्षत रोली, चंदन और सिंदूर, जीतिया सूत्र, सूती, लाल, पीला, धागा या सरसो के दाने पिरोया हुआ धागा जैसे जीतिया
01:31माला भी कहते हैं
01:32फल और फूल जिसमें सिंदूर, फूल, लाल, फूल और मौसमी फल शामिल हूँ
01:37बांस के पत्ते और जीतनी के पत्ते जिसे तोरई के पत्ते भी कहते हैं
01:41कच्चा दूद और गंगा जल, धूप दीप अगरबत्ती और माचिस, ठेकुआ, भीगा वचना, मटर और गोड, जल से भरा कलश,
01:49तामबेया, पीतलगा
01:50अब पारण के दिन आपको भीगा वचना और मटर की जरुवत होगी, वरत खोलने के लिए ताजय जल की जरुवत
01:56होगी
01:57पारण के भोजन में आपको नोनी का साग, महुआ की रोटी और तोरई की सबजी खानी होगी
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