00:00लवी तो था, लाइफटाइम थोड़ी होता है
00:03वो थी एक त्रिपाठियों की बहू
00:06उसका पहले का था कोई प्रेम प्रसंग
00:08और इसका बया किसी और से करा दिया गया था
00:11वो जो क्रिमिनल था उससे त्रिपाठी से
00:15ये भी खूब रोई थी कि हाँ, मेरे साथ गलत हो गया, प्यार तो मेरा तुम ही से है
00:19मेरी जबरदस्ती वो धर भाहुबलियों के घर में शादी कर दी गई है
00:24अंत में वो आजाता इसको लेने के लिए
00:27कि मैं अपनी परी को वाबस लेने आया हूँ
00:31तो अपनरो घुष करके जो इनके पती है अभी उनको पीट पाट डालता अच्छे से
00:36वो बोलती गायतार यही रही है
00:38कि मैं तो विरहनी हूँ, मैं तो प्रेम की प्यासी हूँ, मुझे किसी तरह आँ से छुटकारा मिल जाए
00:45मैं बड़े बंधनों में हूँ, मुझे मुक्ति कब मिलेगी, मेरी यहां जबर्दस्तीब कुझे फसा दिया है
00:50चूडिया नहीं हतकडिया है, मैं यह क्यों फसी हुई हूई हूँ, लेकिन अंदर ही अंदर हो
00:54खूँ, मुझे ले रही है, उदर हो घुसाता है पुरान आशिक, और अंदर तोडफोड मचा देता है, तो पीछे से
01:01आती है, उस बोली मार देती है
01:05इसको पुराने आशिक को गोली मार देती है, और वो उसको ऐसे देखता है
01:11पर लगभग वियंग के तौर पर वो पीछे से गाना सुरू कर देते हैं सांसों की माला पर सिम्रू में
01:17पी का नाम
01:21जो बंधनों के मजे ले रही होगी वो मुक्ति देने वाले को भी गोली ही मारेगी
01:27वो उपर उपर से ये दिखाएगी कि मुझे तो चाहिए मुक्ति और आकाश और आजादी
01:34पर तुम चले गए उसके घर में कि अब आ गया हूँ खटा रहा हूँ इनको चल मेरे साथ
01:39वो सीधे उसके छाती में गोली मारती है वो मर रहा है और उसको ऐसे देख रहा है कि ये
01:43तुने क्या किया तो बोलती है लवी तो था
01:46लाइफटाइम थोड़ी होता है ये हालत हम सब की है मुझ में भी बड़ा जोश और बड़ी बेवकूफी रही है
01:57नजाने कितनी हवेलियों में घुसा हूँ कितने पक्षियों को आजाब कराने लोगे है अब बहुत गोलिया खा गए आपके सामने
02:06बैठा हुआ हूँ
02:07पर अब जिन्दगी भी और शरीर भी संकेत देने लगे हैं कि मुर्खता कम करो मुझे थोड़ी गोली खानी है