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  • 25 minutes ago
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम याचिका दायर की गई है. याचिका में सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि क्या बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग में CEC अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले ले सकते हैं? याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए दावा किया है कि आयोग की शक्तियां व्यक्तिगत रूप से किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि पूरे आयोग में निहित हैं.याचिका में खासकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों पर अन्य आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र किया गया है. इस अहम मामले पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा. वहीं, चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.

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00:28।
00:33उनका तर्क है कि बहुस अदस्य चुनावायोग में फैसले सर्वसेमती या बहुमत के आधार पर होने चाहिए।
01:00उनका सूचियों से जुड़ी शक्तियां व्यक्तिगत रूप से CEC में नहीं बलकि चुनावायोग में निहित है।
01:07याचिका में SIR यानि Special Intensive Revision से जुड़े फैसलों पर भी सवाल उठाए गए है।
01:13इनमें दावा किया गया कि दोनों चुनावायोगतों ने कुछ फैसलों पर आपतियां दर्च कराई थी।
01:19याचिका करता ने अदालत से ये सपष्ट करने की मांग की है कि अगर आयोग के भीतर सहमती थी तो
01:27सम्मंधित फैसले किस कानूनी अधिकार के तहत लिये गए।
01:31बता दें कि चुनावायोग ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि पिछले एक साल में
01:38लिये गए सभी फैसले ऐसा यार समेत पूरे आयोग के सर्व सम्मत निर्ने थे।

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