00:11आपने लोहे से बने रेल इंजन तो बहुत देखे होंगे, लेकिन हम आपको ले चलते हैं पशिमंगाल के चंदनगर, जहां
00:20गणेश भटाचारे ने बास से रेल का इंजन बना कर कमाल कर दिया है, लेकिन ये कोई असली रेल इंजन
00:27नहीं है,
00:28इस कलाकार ने अपने वर्कशॉप में औजार से दिन रात एक कर इस खुबसूरत कलाकृती को तयार किया है, गडेश
00:36का हुनर सिर्फ रेल वे इंजन तक सीमित नहीं है, उन्होंने हावडा ब्रिज और विक्टोरिया मेमोरियल जैसे मशूर समारकों के
00:45मॉडल भी बास से तया
00:58मोटेव मॉडल जो महज 22 इंच लंबा, 4.5 इंच चोड़ा और 9 इंच उचा है, इसने उन्हें एक नई
01:06पहचान दिलाई
01:11इसे इंडिया बुक अफ रेकॉर्ड्स में सतसे चोटे हैंड क्राफटेड WDP-4 मॉडल के तौर पर पहचान मिली
01:18मैंने 10 अगस्त को इसके लिए आवेदन किया था और महज 18 दिन बाद 12 संदेश मिला
01:25इसके बाद मेडल और सर्टिफिकेट मिला
01:53अगला पड़ाव है नेपाल
01:57उनका एक बास का इंजिन 11 अक्टूबर को नेपाल के नाशल रेलवे म्यूजियम में प्रदर्शित किया जाएका
02:05लेकिन गडेश की उड़ान सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है
02:15मैंने 27 देशों के संग्रहालेयों को प्रस्ताव भेजे हैं
02:20तीन देशों से सकारात्मक प्रतिक्या मिली है
02:23नेपाल के बाद केन्या और नावीविया में भी मॉडल पहुचाने की योजना है
02:29नावीविया के रेलवे म्यूजियम के लिए 2027 में मॉडल भेजना है
02:42बास की कुछ पतली पतली पत्तियां
02:45एक चाकू और कुछ औजार और महीने का धैरे
02:50इनसे गडेश ने सिर्फ मॉडल नहीं बनाए
02:53उन्होंने अपने हुनर को पहचान दिलाई
02:55अब गडेश विदेशों में भी अपने हुनर का पर्चम लहराने को तैयार है
03:00ETV भारत के लिए पशे मंगाल के चंदन नगर से पलाश मुखोपाध्याई की रिपोर्ट
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