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ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पाँच हफ्ते पहले 25 पन्नों का एक खुला पत्र जारी किया है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। इस पत्र में आम अमेरिकी जनता और ट्रंप प्रशासन के बीच एक स्पष्ट अंतर खींचते हुए अमेरिकी नागरिकों से भ्रष्ट राजनीतिक नेताओं के खिलाफ खड़े होने और इस युद्ध को खारिज करने की अपील की गई है। तेहरान का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका और इज़राइल का गठबंधन पूरी तरह नाकाम रहा है और इन महंगे सैन्य हस्तक्षेपों की सबसे बड़ी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ रही है। वहीं, ‘डेथ टू अमेरिका’ यानी ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ जैसे पुराने नारे की नई व्याख्या करते हुए IRGC ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि उसका गुस्सा अमेरिकी जनता से नहीं, बल्कि व्हाइट हाउस के राजनीतिक नेतृत्व और वहां की सत्ता में बैठे कथित शासक अभिजात वर्ग से है। एक तरफ ईरान खुद गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है और उसकी मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तरों तक गिर चुकी है, तो दूसरी तरफ यह राजनीतिक रणनीति वॉशिंगटन के भीतर दबाव और प्रभाव पैदा करने की एक कोशिश के तौर पर देखी जा सकती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 25 पन्नों का यह दस्तावेज़ वास्तव में आम अमेरिकी मतदाताओं की सोच को प्रभावित कर पाएगा, या फिर यह तेहरान की ओर से दबाव बनाने की एक और भू-राजनीतिक रणनीति बनकर रह जाएगा? ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते इस गहरे राजनीतिक तनाव और इसके महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने के लिए वीडियो को अंत तक ज़रूर देखिए।

In a stunning geopolitical move just five weeks before the US midterm elections, Iran's Islamic Revolutionary Guard Corps has published a 25-page open letter directly appealing to American voters to reject President Trump’s policies. The military force argues that ordinary Iranians and Americans share common grievances and blames corrupt political leaders for pushing costly and failed military interventions. Attempting to redefine the infamous 'Death to America' slogan, the IRGC claims their target is the White House ruling elite rather than the American public, mirroring Cold War-era propaganda tactics. While Iran faces severe domestic economic pressures with its currency hitting record lows, this strategic letter aims to drive a wedge between Washington's leadership and its citizens. General Hossein Mohebbi hopes to pressure the administration by highlighting the strategic and economic failures of the ongoing conflict in the Middle East. Whether this direct-to-voter appeal can truly shift American political dynamics or if it serves as a desperate diversion remains one of the biggest questions of this election cycle. Watch this comprehensive breakdown to understand the hidden layers of this high-stakes diplomatic standoff.

#Iran #IRGC #TrumpAdministration #USMidterms #MiddleEastConflict #StraitOfHormuz #Tehran #Geopolitics

~PR.512~ED.348~GR.538~HT.178~VG.HM~

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Transcript
00:00क्या एक 25 पन्नों का खुला खट अमेरिकन वोटर्स का नजरिया बदल सकता है?
00:04क्या वाशिंग्टेन की सरकार वो सत छुपा रही है जो आज इरान के रास्ते दुनिया के सामने आ रहा है?
00:10दर्शकों, आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी जियो पॉलिटिकल हलचल की जिसने पूरी दुनिया की मेडिया में
00:16हलचल मचा दी है
00:17इरान की इसलामिक रेविल्यूशनरी गाड कॉप्स यानि IRGC ने एक ऐसा सीधा संधेश अमेरिकन पब्लिक और वोटर्स के नाम जारी
00:24किया है जो आम तोर पर हिस्ष्री की किताबों में देखा जाता है
00:28यूएस मिट टर्म एलेक्शन से ठीक पांच हफते पहले आखिर क्यों इरान की मिलिटरी लीडर्शिप को आम अमेरिकन आवाम से
00:35बात करने की जरूरत पड़ी
00:37आईए इस पूरी कहानी को गहराई से समझते हैं
00:40कहानी की शुरुआत होती है एक बड़े दावे से आई आर जी सी के स्पोक्समेंट जेनरल हुसेन मुहेबी ने तहरान
00:46में एक प्रेस कौनफरेंश के दौरान इस 25 पन्नों के खुले खट को पबलिक किया
00:51इनका साफ कहना है कि अमेरिका और इसरेयल का गठ बंदल इरान के खिलाफ अपने मकसद में पूरी तरह नाकाम
00:58हो चुका है
00:59जो युद पिछले साथ महीनों से चल रहा है उसके दौरान अमेरिका के लक्ष लगातार बदलते रहे हैं
01:05शुरुवात में रजीम चेंज और इरान के तुकडे करने की बात थी जो अब बदल कर कुछ और ही रूट
01:11ले चुकी है
01:12IRGC का ये मानना है कि हजारों हमलों के बाद भी इरान की ताकत को तोड़ा नहीं जा सका
01:18और उल्टी तरफ अमेरिकन सेना को काफी नुकसार उठाना पड़ा
01:23लेकिन इस खत का सबसे दल्चस पहलू मिलिटरी दावे नहीं बलकि इसका पॉलिटिकल अंगल है
01:28IRGC ने ये कोशिश की है कि अमेरिकन आवाम और वहां के पॉलिटिकल इस्टाबलिश्मेंट
01:34यानि की ट्रंप अड्मिनिस्ट्रेशन के बीच एक सफेद लकीर खीचती जाए
01:39खत के मुताबित आम इरानियन और आम अमेरिकन के दुश्मन एक ही हैं
01:44और वो हैं करप पॉलिटिकल लीडर्स जो महंगे और बेमानी युद्ध लड़ते हैं
01:49जबकि इसका बोज आम टैक्सपेर उठाता है
01:52ये वही रणनीती है जो थोड़ी बहुत कोल्ड वार के दौरान वियतनाम वार के वक्त हनोई हाना के नाम से
02:00भी जाना जाता था
02:01और वहां की ब्रोडकास्टर त्रिन्थी निगो के जरिए ये देखा गया था
02:05जहां दुश्मन देश की आवाम को अपने ही नेता के खिलाफ सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया जाता है
02:12आज रान वही रणनीती डिजिटल और फॉर्मोल लेटर्स के जरीए अपना रहा है
02:16इस पूरे संदेश का एक और बड़ा हिस्सा है
02:21साल दर साल दुनिया भर में ये नारा एक आंटी अमेरिकन सेंटिमेंट के रूप में देखा गया है
02:26लेकिन आयार जी सी का कहना है कि ये नारा किसी भी आम अमेरिकन नागरिक के खिलाफ नहीं है
02:31बलकि ये उस शैतानी रूलिंग एलीट के खिलाफ एक प्रार्थना है
02:49रहा है चीजे मेंगी हो रही है ये नेताओं की जिद है लेकिन इसके दूसरी तरफ जमीन पर सच्चाई कुछ
02:55और ही कहानी बयान करती है इस युद्ध और संकट के चलते इरान की अर्च विवस्ता पर बेहत गहरा असर
03:01पड़ा है हाल ही में तहरान के बजारों में रियाल की ह
03:04जालत खराब हो गई थी और जहां एक यूएस डॉलर के बदले 25 लाग से जादा रियल एक्सचेंज किये जा
03:11रहे थे करंसी लगतार रिकॉर्ड लेवन लो पर गिरगी है और आम जनता के लिए महंगाई और आर्थिक दबाव भी
03:17दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है लेकिन �
03:19नहीं पर इरान के लोगों को सलाम करने का दिल करता है क्योंकि इतनी भारी प्रॉब्लम के बाद भी उन्होंने
03:25अपने देश का साथ नहीं छोड़ा क्योंकि उनके लिए ये इस्तित्व की लड़ाई है ऐसे में जब आयार जीसी अमेरिकन
03:31वोटर्स को वेकप यानी जागने
03:33की बात कहते हैं तो इससे असर जरूर पड़ेगा भईया अमेरिका का आम इंसान अमेरिका का आम वोटर ये समझता
03:41है कि ये जंग क्यों लड़ी जा रही है जंग से अमेरिका को आखिर क्या फायदा है कोई फायदा नहीं
03:47है नुकसान है लेकिन फिर भी किसकी इगो की वज�
04:03और सोचने पर मजबूर हो कि उनके टैक्स का पैसा कहां और क्यों खर्च हो रहा है
04:07स्ट्रेट ओफ होर्मूस जैसी महत्वपूर्ण मारिटीम ट्रेड रूट को लेकर भी
04:11अमेरिका और इरान के दावे अलग-अलग हैं
04:14जहां तेल का व्यापार धीरे धीरे वापस पटरी पर लोट रहा है
04:17लेकिन तनाव अभी बना हुआ है
04:19आखिरकार ये पूरा मामला सिर्फ एक युद्ध का एक ख़त तक तो सीमित है नहीं
04:24ये एक ऐसी साइकॉलजिकल वार है जहां हर पक्ष अपनी जीत का दावा कर रहा है
04:28और दूसरे की पबलिक को अपने पास करने की कोशिश में लगा है
04:32शुरुआत में आप याद कीजिए टरंप ने भी तो यही करने की कोशिश की थी
04:36लेकिन एरान के लोगों ने अपने जजबे से अमेरिका के सूपर पावर होने का गुरूर दोड़ दिया
04:43आने वाले अमेरिकन मिट टर्म इलेक्शन इस बात का फैसला करेंगे
04:46कि आम जनता इस संदेश को किस तरह नेती है
04:49वैसे दर्शको एक बात तो बिलकुल साफ है
04:52कि इस मिट टर्म इलेक्शन के चलते टरंप अब बहुत ज़ादा दबाव में है
04:57टरंप की कुर्शी छिनने का खत्रा है और एरान के पास एक पहतरी मौका है
05:02यह जन्ग बहुत जल्दी पलट सकती है
05:04और शायद बहुत जल्द हमें इस जन्ग का फाइनल वर्डिक्ट भी मिल जाए
05:09जो इरान के पलड़े की तरफ जुकेगा
05:11ऐसे में जो भी आपकी राय है हमें कॉमेंन सेक्शन में जुरूर बताइएगा
05:15अब देख रहे हैं OneIndia
05:16मैं हुआ कुछ कोशेक

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