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  • 13 minutes ago
महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर आज जानिए उनके 'पांचवें बेटे' जमनालाल बजाज और उनके खून से गहरे वैचारिक रिश्ते की कहानी. पढ़ें पूरी खबर.

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Transcript
00:06इतिहास का एक ऐसा पन्ना जहां खून का कोई रिष्टा नहीं था फिर भी एक उद्योग पती महात्मा गांधी का
00:13पाजवा बेटा बन गया
00:14जी हां हम बात कर रहे हैं स्वतंत्रता सेनानी जमना लाल बजाज की आज जब पूरा देश बापू की 197
00:22जयनती मना रहा है तब वार्धा और सेवा ग्राम के इतिहास से निकला यह अनोखा और पवित्र रिष्टा हर किसी
00:30को हैरान करता है
00:32साल 1920 के नागपूर अधिवेशन में बजाज जी ने बापू से बेटा बनने का हक मांगा और बापू ने उसे
00:39स्विकार किया बापू के आदर्शों के लिए उन्होंने अपनी धन, दौलत, देश की सेवा में जोख दी और जेल भी
00:46गए
00:47उन्ही के आगरह पर गांधी जी वार्धा आएं, जहां बजाज जी ने स्रीवा ग्राम आश्रम के लिए अपनी जमीन दी,
00:54उन्होंने छुआ छूट के खिलाफ लड़ते हुए अपने पारिवारिक मंदर के दर्वाजे दलितों के लिए खोल दिये
01:0011 फरवरी 1942 को जब उनका निधन हुआ तो बापु ने अपना सबसे मजबूत स्तंब खो दिया
01:07व्याचारिक त्याग का यह एतिहासिक रिष्टा आज भी अमर है
01:12ETV भारत के लिए नागपोर से धननजेट टीपले की रिपोर्ट

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