00:00देखिए जाटोली थुन की जो कहानी सुरू होती है वो होती है 1707 के बाद जाटोली थुन से पहले जाटों
00:06का जो मुख्य केंद था वो सिंसनी गाओ था जाओं की मुख्य गड़ी थी लेकिन 1707 में जब सिंसनी का
00:12पतन हो गया तो ठाकुल चूरामन को यह लगा कि अब सिंसनी
00:17मुख्यों से उतनी ज्यादा सुरक्षित नहीं है इसलिए उन्होंने सिंसनी के स्थान पर एक नए स्थान पर जाटों की सुद्रण
00:25गड़ी बराने का निश्य किया और सिंसनी से आठ मिल पश्चिम में एक स्थान की तलास की यह स्थान बरतपुर
00:33से आज 26 मिल उत्तर पश्
00:47सुद्रण गड़ी की नीव रखी इसको की थून के नाम से बर्तमान में जाना जाता है और यहां पर आज
00:53एक गाउं है जिसे थून जाटोली के नाम से जाना जाता है तो थून का जो इतियास है वो 1707
01:01के बाद सुरू होता है और उसके बाद हम देखते हैं कि 1722 में थून का �
01:17स्थापित हो जाते हैं कि कई समकाली इतियासकारों ने लिखा है इनमें से इक इतियासकार हुए हैं सिवदास वो लिखते
01:25हैं कि चूरामन ने जो थून को अपनी राजदांजी बनाए थी तो उसकी चारों का जो परकोटा था वो बड़ा
01:33सुद्रण था उची-उची मिट्
01:38ठाकोट चूरामन के पास एक बहुत विशाल खजाना था जो उन्होंने उस समय के व्यापारिक कारवाओं और मुगल सासन से
01:45आसिल किया था तो उनको लगा कि अपने इस खजाने की सुरक्षा के लिए और भावी समय में जाटों की
01:55राजधानी के रूप में जो थून है को �
01:57बड़ा उप्युप्त रहेगा जब प्रिठम आख्रमण हुआ सितंबर 1716 में तो जैसे ने बहुत विशाल सैना के साथ डली से
02:05प्रस्थान किया मार्ग में छोटी बड़ी गड़ियों को जीते हुआ आगे बड़े लेकिन अपने तमाम प्रयासों के बावजूद भी वह
02:13थ
02:27प्रवार में सैयद बंदू थे जो बजीर और मुख्य शैनापति के पजबर म्यूट थे उनसे अपना समझोता कर लिया और
02:34लगबग डेड़ वर्स तक यह गेरा चलता रहा लेकिन इस डेड़ वर्स के दरम्यान मुगल फोजें अपनी तमाम चोटी बड़े
02:42तोपों के आक
02:56मान का प्रतिसोद लेने के लिए एक विशाल सैना के साथ उन्हें आक्रमण किया लेकिन इस बार चीजे थोड़ी बदल
03:05गई थी और उसका कारण यह था कि इस समय जाट जो राजवन्स था या चूरामन को जो परवार था
03:12उसमें आपसी कलह प्रारम हो गई थी और चूरामन
03:24से नाराज होकर जैसीं की सरण में चले गए और इन सब बातों से आत होकर कुछ समय बाद अब
03:31देखते हैं कि जो चूरामन थे उन्होंने जहर खाकर आत्मत्या कर लिए तो जब यह गेरा दूसरा जो थून का
03:37प्रारम हुआ उस समय तक चूरामन की जीवन लीला समाब तो च
03:50चूरामन के जो बड़े वेटे थे मौकम सिंग उनके पास आई लेकिन चोकी मौकम सिंग और बदन सिंग के आपसी
03:58संबंद अच्छे नहीं थे तो जाट दो खेमों में बट गए एक खेमा बदन सिंग का था जो की जैसिंग
04:06के साथ मिला हुआ था और दूसरा खेमा मौकम सि
04:10कि बुरूत में थूरामन जो थूनकी गड़ी थी उसकी सुरच्छा कर दा लेकिन इन तमाम बातों के बावजूद भी मौकम
04:19सिंग लगबग दू मैने तक जैसिंग का साबना करता रहा लेकिन अंत मैं जैसिंग ने बदन सिंग को अपने पक्ष
04:28में करकर उनसे थूनकी गड
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05:49After that, we can see that Mr. Jais Shing has made a decision to make a decision for his wife
05:55and his wife in the form of his wife.
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