00:10बिहार के गया जी स्थित टिकारी प्रखंड का रानी गंश मोहला
00:14साल 1994 में जहां सिर्फ नकसलवात का खौफ था
00:18आज वहां हर शाम शिक्षा की ये खुबसूरत महफल सचती है
00:23नबे के दशक में दो भाईयों सिथार्थ और सुशील कुमार ने एक फैसला लिया
00:28कि गरीब बच्चों का भविष्य अंधेरे में ना रहे
00:32अज्यानता के अंधेरे को दूर करने के दोनों भाईयों के जुनूर ने इस बहतरीन पहल की शुरुआत की
00:39लेकिन एक आर्शक्रम हम लोगों को इसलिए प्रेरना दिया था
00:49और यहां काफी गरीबी थी तो हम लोग लगता था कि जब तक कि यहां सिच्छा नहीं होगा तब तक
00:57कि लोग आगे नहीं बढ़ेंगा
00:58और उसमें वही लोग यहां सर बढ़े हुए थे दुशार पांच गिन नोकिनी थे जो पढ़े थे सर तो हम
01:05भी सर यहां चले आए तो इस्टूडेंट भी थे और बच्चे को भी पढ़ाना अबना शुरू था
01:11दोनों भाईों ने कमान सभाली साल दर साल वे मैदान में बैट कर बच्चों को पढ़ाते रहे आज दोनों भाई
01:20सरकारी स्कूल में हेड मास्टर हैं बड़े भाई हाथ तूटने के बावजूद हर रात दो घंटे मुफ्त में बच्चों का
01:28फविश्य सवारते हैं
01:29बीते 32 सालों से चले आ रहे सफर ने अंकिनत परिवारों की जिंदगी बदली है
02:10सब्सक्राइब बच्चों को सब्सक्राइब बच्चों को सुधारा जा सकता है
02:25जो गरीब बच्चे यहां बहुत सार है तो उनको सोचे हम लोगी सब्सक्राइब इसे तिवसन नहीं करा पा रहे हैं
02:32सोचे कि उन लोग को हम लोग दो घंटा लंसम टाइम दें तो सुधारा जा सकता है और यहां का
02:38सबसे पर इच्ची से सर कि यहां
02:41मतलब कि पहले टिवसन चलता था तो कुछ दिन कारण बस बंद हो गया तो देखा है कि गलत लास्ता
02:47पर लड़का लोग चल रहा है
02:48तो उनको सुधार के लिए सर हम सोचे कंसे कंसे कंसे सुधार किया जा सकता है
03:07इस खुले मैदान वाली क्लास की सबसे खुबसूरत तस्वीर ये है कि शाम साड़े छे बजे माईक पर प्रार्थना शुरू
03:15होते ही
03:16बच्चे तो आते ही हैं साथ में माई भी कुरसियां लगा कर बैठ जाती हैं ताकि बच्चों की हर हरकत
03:23पर नजर रहे
03:24उन्हें उमीद है कि सधार्थ और सुशील सर और उनकी टीम उनके बच्चों का भविश्य बहतर बना ही देगी
03:46ने था देंगे उनको मेरे तो खाली बैटियां ने छहेए बच्चों की बिया कर दिये हैं और ये छोट बैटी
03:53के मुझे सवक के इन पका रहे हैं कि हम दीम बनेंगे ता सिधारात बावों ने काएं कि हम दीम
03:58बना देंगे हम इसको पढ़ाएंगे नहीं सब लोग तस्वीम
04:04I am a husband, I go to school, and my wife is very rich.
04:11We also work with children.
04:14We come to school.
04:18I am Siddhar Sar.
04:20My wife also comes to school in Delhi,
04:23and we learn something.
04:42Listen to that, sir, they will help their dreams to be full of their dreams.
04:56Here we have Siddhar Sir and Cecil Sir.
05:00What are you saying?
05:01Hindi, math and English.
05:04What are you saying, Siddhar Sir?
05:06They say that whatever you want to become,
05:09you will be able to become all the money.
05:11We will be able to become a dream,
05:12and we will be able to become a dream.
05:15You will be able to become a dream.
05:17What are you doing?
05:19They help a lot.
05:21They help a lot.
05:22They help a lot.
05:25They help a lot of different ways.
05:27People are studying Siddhar Sir and Bholabhai.
05:30They are also studying.
05:34What are you doing?
05:36Until 7 to 9.
05:38What are you doing?
05:40My father is a priest.
05:44Which class?
05:47Six.
05:48What will you become?
05:49A doctor.
05:50How can you learn?
05:52Yes, how do you learn.
05:54How do you learn?
05:56How do you learn?
05:56How do you learn?
05:59I learn what a challenge.
06:00I tell you.
06:02Just to find it ahead.
06:03What you don't.
06:05With whom do this non-forment?
06:09ुशाला से अब तक 40 से ज्यादा बच्चे सेना, पुलिस, शिक्षा और स्वास्ति विभाग में सरकारी नौकरी पाचुके हैं।
06:18रानी गंश का ये मैदान और उस मैदान में संचालत ये स्कूल साबित करता है कि अगर नियत सच्ची हो
06:24तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती।
06:28ETV भारत के लिए गया से सर्ताज एहमत की रिपोर्ट