00:03दोहजरशब्वेस का मेडिसिन नॉबल तीन विज्ञानिकों को दिया गया है।
00:06इनमें जर्मनी के पीटर हैंगमेन, जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कारल डाइसोरोथ शामिल है।
00:12इनहें लाइट गेटेड आयन चैनलो और अप्टो जेनेटिक्स से जुड़ी उनकी खोजों के लिए ये सम्मान दिया गया।
00:21पीटर हैंगमेन और जॉर्ज नागेल ने एक कोशिकी ये शैवाल में चैनलोर और डॉपसिन नाम का एक अधभुत प्रोटीन खोजा।
00:29जबकि कार्ल डाइसोरोथ ने इस प्रोटीन को नर्व सेल के लिए प्रकाश से नियंत्रित होने वाले स्विच में बदल दिया।
00:37इनकी खोज से ये पता लगाना संभाव हो गया कि जीवित मश्तिश्क में नर्व सेल, यादो, भावनाओ और व्याभार को
00:45कैसे आकार देती है।
00:47ओप्टो जेनेटिक्स की मदद से मश्तिश्क की मापिंग संभाव हो पाई।
00:52कारलिट आइसोरोट स्टैनफोर्ड युनिवरसिटी में प्रोफेसर है।
00:55चैनलोर अडॉपसिन प्रोटीन पर रोशनी से नर्व सेल को कंट्रोल करने में मदद मिली।
01:01उन्होंने दिखाया कि नीली रोशनी मोटिफाइड नर्व सेल में नर्व सिगनल शुरू कर सकती है।
01:082005 में इनकी ये खोच पबलिश हुई।
01:112007 में उन्होंने इसका प्रयोग जीवित चूहों के दिमाग पर किया जिससे ओटोजेनेटिक्स के विक्सित होने की नीव पड़ी।
01:19पीटर हैंगमन जर्मनी की हैंबोल्ड उनिवरसिटी ओफ बर्लिन में नियूरो साइंस के हर्टी सीनिय प्रोफेसर है।
01:27इनको इस बात में दिल्चस्पी थी कि कैसे एक कोशिका वाले शैवाल रोशनी पर प्रतिक्रिया करते हैं।
01:34इसी खोज ने ओटोजेनेटिक्स को संभव बनाया।
01:38जोर्ज नेगेल जर्मनी की वुर्जबर्ग उनिवरसिटी में मॉलिक्यूलर प्लांट फिजियोलोजी की प्रोफेसर है।
01:44उनकी रिसर्च रोशनी के प्रति सम्वेदनशील प्रोटीन और सेलुलोय प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका पर केंद्रित थी।
01:52प्यूरो रिपोर्ट, ETV भारत