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  • 38 minutes ago
साल 2026 में चिकित्सा क्षेत्र के लिए नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों कार्ल डिशेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को दिया गया है. नोबेल प्रेस वक्तव्य के अनुसार इन्हें यह सम्मान प्रकाश-नियंत्रित आयन चैनलों और 'ऑप्टोजेनेटिक्स' पर उनकी खोजों के लिए दिया गया है. मेडिसिन कमिटी ( चिकित्सा समिति) के सचिव थॉमस पर्लमैन ने 5 अक्टूबर (सोमवार) को इस अवॉर्ड की घोषणा की. नोबेल असेंबली ने स्वीडन के स्टॉकहोम में कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट में इस पुरस्कार की घोषणा की. मेडिसिन (चिकित्सा) में नोबेल पुरस्कार लाइफ साइंस या मेडिसिन में बड़ी खोजों को सम्मान देता है. यह सिर्फ लंबे करियर या वैज्ञानिक नेतृत्व को पहचान देने के बजाय ऐसे काम के लिए है जिसने वैज्ञानिक समझ को बदला हो या लोगों को बड़े फ़ायदे पहुंचाए हों. नोबेल पुरस्कार सीजन आज 5 अक्टूबर को फिजियोलॉजी या चिकित्सा में घोषणा के साथ शुरू हो रहा है. यह आठ दिनों में घोषित होने वाले छह नोबेल पुरस्कारों में से पहला है, जो उन खोजों, विचारों और योगदानों पर दुनिया का ध्यान खींचता है जिन्होंने इंसानियत के लिए बड़ा बदलाव किया है. इस पुरस्कार में एक मेडल, डिप्लोमा और नकद अवॉर्ड शामिल है. 2026 के पूरे नोबेल पुरस्कार के लिए इनाम की रकम 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर तय किया गया है. ये पुरस्कार आधिकारिक तौर पर दिसंबर में दिए जाएंगे.

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00:03दोहजरशब्वेस का मेडिसिन नॉबल तीन विज्ञानिकों को दिया गया है।
00:06इनमें जर्मनी के पीटर हैंगमेन, जॉर्ज नागेल और अमेरिका के कारल डाइसोरोथ शामिल है।
00:12इनहें लाइट गेटेड आयन चैनलो और अप्टो जेनेटिक्स से जुड़ी उनकी खोजों के लिए ये सम्मान दिया गया।
00:21पीटर हैंगमेन और जॉर्ज नागेल ने एक कोशिकी ये शैवाल में चैनलोर और डॉपसिन नाम का एक अधभुत प्रोटीन खोजा।
00:29जबकि कार्ल डाइसोरोथ ने इस प्रोटीन को नर्व सेल के लिए प्रकाश से नियंत्रित होने वाले स्विच में बदल दिया।
00:37इनकी खोज से ये पता लगाना संभाव हो गया कि जीवित मश्तिश्क में नर्व सेल, यादो, भावनाओ और व्याभार को
00:45कैसे आकार देती है।
00:47ओप्टो जेनेटिक्स की मदद से मश्तिश्क की मापिंग संभाव हो पाई।
00:52कारलिट आइसोरोट स्टैनफोर्ड युनिवरसिटी में प्रोफेसर है।
00:55चैनलोर अडॉपसिन प्रोटीन पर रोशनी से नर्व सेल को कंट्रोल करने में मदद मिली।
01:01उन्होंने दिखाया कि नीली रोशनी मोटिफाइड नर्व सेल में नर्व सिगनल शुरू कर सकती है।
01:082005 में इनकी ये खोच पबलिश हुई।
01:112007 में उन्होंने इसका प्रयोग जीवित चूहों के दिमाग पर किया जिससे ओटोजेनेटिक्स के विक्सित होने की नीव पड़ी।
01:19पीटर हैंगमन जर्मनी की हैंबोल्ड उनिवरसिटी ओफ बर्लिन में नियूरो साइंस के हर्टी सीनिय प्रोफेसर है।
01:27इनको इस बात में दिल्चस्पी थी कि कैसे एक कोशिका वाले शैवाल रोशनी पर प्रतिक्रिया करते हैं।
01:34इसी खोज ने ओटोजेनेटिक्स को संभव बनाया।
01:38जोर्ज नेगेल जर्मनी की वुर्जबर्ग उनिवरसिटी में मॉलिक्यूलर प्लांट फिजियोलोजी की प्रोफेसर है।
01:44उनकी रिसर्च रोशनी के प्रति सम्वेदनशील प्रोटीन और सेलुलोय प्रक्रियाओं में उनकी भूमिका पर केंद्रित थी।
01:52प्यूरो रिपोर्ट, ETV भारत

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