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  • 29 minutes ago
ओडिशा के केंद्रापाड़ा जिले की रहने वाली 46 वर्षीय इप्सिता स्वाईं ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो घर की चारदीवारी से निकलकर महिलाएं हर क्षेत्र में मुकाम हासिल कर सकती हैं. शादी के बाद अपना ज्यादातर समय घर-गृहस्थी में बिताने वाली इप्सिता ने साल 2010 में मशरूम की खेती की शुरुआत की थी. आज वह करीब 10 हजार वर्गफीट जमीन पर मशरूम और उसके स्पॉन (बीज) का बड़ा कारोबार चला रही हैं.उनका यह कारोबार अब केंद्रापाड़ा से लेकर कटक, जाजपुर और खुर्दा तक फैल चुका है. इप्सिता ने न केवल अपने परिवार को आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि 500 से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर भी बनाया है.

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Transcript
00:12ुडिशा केंद्रपाडा की इपसिता स्वाई आज सिर्फ ग्रहनी नहीं बल्कि एक सफल एग्रिप्रेमियोर है
00:20इपसिता की कहानी साल 2010 में शुरू हुई
00:24शादी के बाद उनका ज्यादतर वक्त घर ग्रहस्ती में गुजरता था
00:28फिर मशुरूम की खेती ने उनका ध्यान खीचा
00:32कम निवेश, कम जगह और बहतर कमाई की संभावना देखकर
00:37इपसिता ने मशुरूम उत्पादन की शुरूआती जानकारी लेकर ट्रेनिंग हासिल की
00:42और धीरे धीरे एक छोटा प्रयोग काम्याब कारोबार में बदल गया
00:49एक बेड से आमतोर पर 800 ग्राम से एक किलो तक मशुरूम निकलता है
00:54और कभी कभी उत्पादन सवा किलो तक पहुँच जाता है
00:57एक बेड तयार करने में करीब 60 रुपे खर्च होते हैं
01:01और लगबग 40 रुपे तक मुनाफ़ा हो सकता है
01:04धान की पराली से बेड तयार होते हैं
01:06पराली को मशीन से काटा जाता है
01:09करीब 12 घंटे पानी में भिगोया जाता है
01:12फिर चूने से ट्रीट किया जाता है
01:15इसके बाद पराली मश्रूम स्पॉन, ब्रान और थोड़े बेसन की मदद से बेड तयार किये जाते हैं
01:22और करीब 10 दिन बाद शुरू हो जाती है मश्रूम की फसर।
01:26लेकिन इपसिता के सफर में मुश्किले भी आई।
01:29बाहर से खरीदे गए खराब कॉलिटी के स्पॉन की वजह से कई बार मश्रूम बेड खराब हो गए।
01:36तब ही केवीके की विज्ञानिक ने उन्हें खुद स्पॉन तयार करने की सलहा दी।
01:41जिसके बाद साल 2020 में इपसिता ने मशीन खरी दी और शुरू कर दिया अपना स्पॉन प्रोडक्शन।
01:49अब यही स्पॉन दूसरे किसानों और महिलाओं को भी दिया जाता है।
01:54हमारा कारोबार केंदरा पाड़ा से निकल कर कटक, जाजपूर, जगत सिंगपूर और खुरदा तक पहुँच चुका है।
02:01मैंने 500 से जादा महिलाओं को ट्रेनिंग दिये, करीब 200 किसान और मश्रूम उत्पादक नियमे तोर पर हमसे मश्रूम और
02:09स्पॉन खरीदते हैं।
02:11इपसिता के कारोबार से सिर्फ उनका परिवार नहीं चलता, उनके फार्म में 6 लोग काम करते हैं।
02:17वहां काम करने वाली महिलाओं को करीब 9,000 रुपे महिने की सालरी मिलती है।
02:22पती और तीन बच्चे भी इस काम में उनका साथ देते हैं।
02:26अपने काम के लिए उन्हें Best Agripreneur Award भी मिल चुका है।
02:31इपसिता स्वाई की कहानी सिर्फ मश्रून की खेती की कहानी नहीं।
02:35ये उस सोच की कहानी है जहां रसोई से निकले हाथ कारोबार समहलते हैं।
02:41ETV भारत के लिए उडिशा के केंदर पाड़ा से राधाकांत मोहंती की रिपोर्ट।

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