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NRI Tax Case: कुवैत में काम करने वाले एक भारतीय के भारत भेजे करीब ₹3.63 करोड़ पर टैक्स विभाग ने सवाल उठाए। विभाग ने रकम को अनएक्सप्लेन्ड मनी माना, लेकिन मामला ITAT अहमदाबाद पहुंचने के बाद एनआरआई को ₹5.52 लाख की टैक्स राहत मिली। जानिए विदेश से भारत भेजी गई रकम पर टैक्स के नियम क्या हैं और NRI को किन दस्तावेजों को संभालकर रखना चाहिए।
NRI Tax Case: The Income Tax Department raised questions over nearly ₹3.63 crore sent to India by an Indian working in Kuwait. The department treated the amount as unexplained money, but after the case reached ITAT Ahmedabad, the NRI received tax relief of ₹5.52 lakh. Know the tax rules for money sent to India from abroad and which documents NRIs should keep safely.

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00:00विदेश में नौकरी करने वाले भारतियों के लिए विदेश से भारत भेजी जाने वाली रकम पर टैक्स से जोड़े नियमों
00:06को समझना बेहर चरूरी है
00:08खास कर तब जब रकम करोडो रुपए में हो और भारत के बैंक खातों में लगतार ट्रांसफर हो रही हो
00:14आम तोर पर विदेश में कमाई गए सेल्डी को बैंकिंग चैनल के जरिये भारत भेजने भर से वह रकम भारत
00:20में दोबारा टैक्स योग आये नहीं बन जाती
00:22लेकिन अगर बैंक रिकॉर्ड टैक्स विभाग के पास मौजूद जानकारी और दाखिल किये गए आयकर रिटर्ण में अंतर दिखाई दे
00:29तो विभाग इस रकम के स्रोत को लेकर सवाल चरूर पुछ सकता है
00:33ऐसा ही एक मामला कुबैत में काम करने वाले एक भारतिये के साथ सामने आया जिसमें करीब 3.63 करोड
00:40की रकम को टैक्स विभाग ने अइस पश्ट धन यानि की अन एक्स्प्लेंड मनी मान लिया था
00:46मामला आयकर अपिलिये न्याय धिकरन यानि की IT-AT अहमदाबाद तक पहुचा जहां NRI को आशिक राहत मिली है क्या
00:54है पूरा मामला चलिए आपको इस वीडियो में समझाते हैं
00:57दरसल यह मामला अहमदाबाद के रहने वाले राहुल कुमार नर्सिम भाई पटेल से जुड़ा है जो कुबैट के मीना अल
01:03अहमदी के ओयल फिल्ड में काम करते थे
01:05उनकी सैलरी कुबैट के नेशनल बैंक आफ कुबैट में खाते में जमा होती थी
01:10इसके बाद वह अपनी विदेश में कमाई गई रकम को भारत में मौजूद अपने बैंक खातों में भेशते थे
01:15टैक्स विभाग के पास उपलब्द बीतिये जानकारी के मुताविक 31 दिसंबर 2018 तक
01:21उनके नाम से HDFC बैंक में करीब 2.49 करोर और ICICI बैंक में करीब 1.09 करोर रुपए
01:29और ICIC Prudential Life Insurance में करीब 3.77 लाग की पॉलिसी की जानकारी थी
01:35बड़ी रकम की मौजूद की और उस समय ओरिजनल आयकर रिटरन दाखिल नहीं किये जाने के कारण
01:40या मामला टैक्स बिभाग की नजर में आया इसके बाद टैक्स बिभाग की तरब से उन्हें
01:44नोटिस चारी किया गया और उनसे भारत में मौजूद NRI और NRO खातों की जानकारी मांगी गया
01:49फिक्स डिपॉजित का ब्योरा और विभाग के पास उपलब्ध वितिये जानकारी का मिलान यानि की रिकंसिलियेशन देने को कहा गया
01:57शुरुवाती इसतर पर टैक्सपेयर की तरब से पूरी जानकारी और सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके
02:03विभाग के मुताविक पैंक और वितिये संस्थानों से मिली जानकारी और टैक्सपेयर की तरब से उपलब्ध कराएं गए रिकॉर्ड की
02:10बीच पूरा मिलान नहीं हो पा रहा था
02:12इसी अधार पर आकलन कर अधिकारी ने करीब 3.63 करोर की रकम को आयकर कानून की धारा 69 एक
02:20इतहद और इस पश्ट धन मालिया
02:21इस रकम को टैक्स के दायरे में लानी की वज़ा हिया थी कि टैक्सपेयर उस समय इन रकमों के स्रोतों
02:27और बैंक रिकॉर्ड का पूरा दस्तावेजी मिलान नहीं कर पाये थे
02:30यहां से मामला अपील तक पहुचा अपीलिये करवाही के दोरान टैक्सपेयर ने अतरिक दस्तावेज पेश की इन में कुबैत के
02:38बैंक के स्टेटमेंट वहां मिलने वाली सैलरी से जुड़े दस्तावेज भारत के बैंक खातों के स्टेटमेंट और कुबैत से भारत
02:44भेज
02:58ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
03:25यानि विदेश में कमाई गई रकम से लेकर भारत के बैंक खाते थी एक बैंकिंग ट्रेल मौचोट थी
03:31॰ाइशी आइसी बैंक से जुड़ी करिब 1.09 करोर की रकम में से करिब 1.04 करोर को बिदेशी रेमिटेंस
03:39और फिक्स डिकोजिट के रोल ओवर के चरिये समझाया जा सका
03:42इसका मतलब यह हुआ कि इस रकम का सुरोत कुबैत में कमाई गई विदेशी सेल्डी और उसी रकम से जुड़े
03:49बैंक लेन देन से जोड़ा जा सकता था
03:51हाला कि करीब 5.52 लाग की रकम ऐसी थी जिसका पूरा मिलान उपलब्ध रिकॉर्ड से नहीं हो पाया
03:57टैक्स विभाग ने इस अंतर को भी अश्पष्ट रकम के तौर पर देखा लेकिन मामला जब ITAT एहमदावाद पहुचा तो
04:04ट्रिब्यूनल ने इस अंतर को अलग नचरिये से देखा
04:07ट्रिब्यूनल ने माना कि टैक्स फेयर का एनराई स्टेटास कुबैत में रोजगार और एनराई खातों का होना विभादित नहीं था
04:14साथ ही रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि बड़ी रकम विदेश में मिली सैल्डी से भारत बेजी गई
04:19थी
04:20ऐसे में सिर्फ बैंक के रिपोर्ट किये गए आकडों और उपलब्ध दस्तावेजों के बीच अंतर होने के अधार पर 5
04:26.52 लाग को अगोसीत या इसपष्ट आये नहीं माना जा सकता
04:30आईटी एटी ने यह भी देखा कि बिभाग की तरब से ऐसा कोई स्वतंतर सबूत पेश नहीं किया गया था
04:35जिससे या साबित हो सके कि 5.52 लाग किसी छिपी हुई या अगोसीत आये से आये थे
04:41ट्रिब्यूनल के मुताबिक केवल इस वज़ा से कि बैंक की तरब से रिपोर्ट की गई कूल रकम और उपलब्द बैंक
04:47रिकॉर्ड का पूरा मिलान नहीं हो पाया उस अंतर को अपने आप और इसपष्ट आये नहीं माना जा सकता
04:53इसी अधार पर IT-80 ने करीब 5.52 लाग की टैक्स बढ़ोतरी को हटा दिया यह NRI के लिए
04:59एहम रहत थी लेकिन इस मामले में NRI को पूरी तरह रहत नहीं मिली
05:03HDFC बैंक से जुड़ी करीब 2.49 करोर की रकम का पूरा ट्रांजक्सन वाइच मिलान अभी भी नहीं हो पाया
05:10था
05:10इस रकम के सुरोत को लेकर पर्याप दस्तावेज और बैंक से जरूरी जानकारी उपलब्द नहीं थी
05:15इसलिए ITAT ने इस हिस्ते को सीधे खत्म करने की वज़ाए दुबारा जाच के लिए आकलन अधिकारी के पास भेज
05:21दिया
05:21ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि बैंक से पूरी जानकारी ली जाए
05:25SFT के तहाद रिपोर्ट की गई रकम का अधार समझा जाए और फिट टैक्सपेर की तरब से दिये गए बिदेशी
05:31रेमिटेंस के दस्तावेजों का भी मिलान किया जाए
05:34अगर चांच में या साबित होता है कि यह रकम विदेश दे कमाई गई सेलरी से भारत भेजी गई थी
05:39या पहले भेजी गई विदेशी कमाई को बाद में दुबारा जमा या निवेश किया गया था
05:44तो उस रकम को सिर्फ बड़ी बैंक वैलेंस होने के अधार पर इस पश्ट आये नहीं माना जाना चाहिए
05:49इस पूरे मामले में विदेश में काम करने वाले भारतियों के लिए सबसे बड़ा सबक यह है
05:54कि विदेश से भारत पैसा भेशते समय सिर्फ बैंकिंग चैनल का इस्तेमाल करना ही काफी नहीं है
05:59बलकि उसका पूरा रिकॉर्ड समभाल कर रखना भी जरूरी है
06:02विदेशी बैंक के स्टेटमेंट, सैल इसली, प्रोजगार से जुड़े दस्तावेज, भारत के बैंक स्टेटमेंट, रेमिटेंस की रसीद, एनराई या एनरो
06:10खातों की जानकारी
06:12और फिक्स दिपोजित के कागर जैसे दस्तावेज, भाविश्य में टैक्स विभाग के किसी सवाल का जबाब देने में बेहत कामा
06:19सकते हैं
06:20खास कर अगर आप विदेशी बहारत में बड़ी रकम ट्रांसफर कर रहे हैं
06:24या कई सालों से वही रकम अलग-अलग बैंक खातों और फिक्स दिपोजित में घूम रही है तो हर लेन
06:29देन का रिकॉर्ड रखना जरूरी है
06:31यह मामला एक और महत्मून बात सामने लाता है कि विदेश बहारत भेजी गई रकम और भारत में कमाई गई
06:36टैक्स योग आय को एक ही नचर से नहीं देखा जा सकता
06:39किसी एनराई की विदेश में कमाई गई सेल्डी को भारत भेशने मातर से वह रकम दुबारा भारत में टैक्स योग
06:46आये नहीं बन जाती
06:47उनकी टैक्स देंदारी बेक्ती के रजिदेंशियल स्टीटस आये कहां अर्चित हुई और वह रकम कहां प्राप्थ हुई जैसे कई तथ्यों
06:55पर निर्भर करती है
06:56हलाकि इसका मतलब यह भी नहीं कि हर विदेशते आयी रकम अपने आप टैक्स से बाहर हो चाती है
07:01अगर रकम का स्रोत इसपष्ट नहीं है या दस्तावेजी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है तो टैक्स विभाग सवाल पूछ सकता है
07:07और चार्च शुरू हो सकती है
07:09कुल मिलाकर कुबैत में काम करने वाले इस NRI के मामले में ITAT एहमदाबाद ने करीब 5.52 लाग की
07:16अत्रिक्त आय को हटा कर रहत दी है
07:18जबकि करीब 2.49 करोर की रकम को दुबारा जाज के लिए भेजा है
07:22Tribunal का फैसला याइस पष्ट करता है कि विदेश से कमाई गई रकम को बैंकिंग चैनल के माध्यम से भारत
07:28भेजे जाने मातर से उससे अईस पष्ट धन नहीं माना जा सकता
07:31But even this match will also be known as the future of India, but also the case is the future
07:58of India.
07:59इंडिया भेशते हैं और भेशते हैं तो क्या आपने दस्तावेज पूरे संभाल कर रखते हैं क्योंकि कभी भी आपको इसकी
08:05जरूरत पर सकती है अपनी राइक कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं और ऐसे ही तमाम अप्टीट्स और शेयर मार्केट से
08:10जुड़ी तमाम चानक
08:11के लिए आप बने रहें गुड रिटार्न्स डिश्टल के साथ

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