00:00सामान ने इसी गाड़ी में भी आ सकते हैं लेकिन कोई लड़का लिमोजिन चुनता है
00:04लेकिन ऐसी डिजायर क्यूं होती है किसी के मन में कि वह आक्रिस्ट होता चला जाता है
00:11क्या डिजायर का विभाजन सही और गलत या सचा और जूटा इसके आईने में हो सकता है क्या
00:30पूरा होने की कामना तो होगी ना, क्योंकि अधूरापन का चोटता है, विशेश का जब अधूरेपन का दावा ये हो,
00:37कि मैं ही असली हूँ, मैं ही पूर्ण हूँ, अब दावा तो ये है, कि मैं ये हूँ, और अनुभाव
00:42लगातार हो रहा है अधूरेपन का, दावा तो ये
00:59पन तो भीतर है और पूरा पन पाने के लिए निकलता बाहर की ओर है तो बाहर जितने भी विशय
01:05होते हैं वो सब को खाना शुरू कर देता है ये भोग हैं कामना होगी तो भोग होगा और वो
01:13कितने भी विशयों को खा ले लेकिन उसकी जो भीतरी अपूर्णता है वो नहीं मि
01:28तो सारी कामनाई विफल ही जाती है इसी से तैय हो जाता है कि डिजायर का कौन सा स्रोत है
01:36जो गलत है और गलत नैतिक आधार पर नहीं बहुत व्यवारिक आधार पर बही ऐसी कामना करके क्या होगा जो
01:45कामना कार को अधूरा ही रखेगी बस इसलिए वो डिजायर गलत है