00:00मैं जब छोटा ही था, दस साल का, तो मेरी माता जी का देहावसान हो गया था
00:05उस समय मैं बहुत दुख में था, छे मैने, आट मैने
00:08उसके बाद मैं अपनी परसानियों में, अपने मौज में, मस्ती में खो गया
00:13मैं जैसे देखता हूँ कि लोग अपने प्रिये जनों को बिछड़ा देखकर बहुत ग्रीफ करते हैं
00:20और उनको याद करते हैं, तो कभी-कभार ऐसा गाने अगरे सुनके मुझे भी ऐसा लगता है
00:25बट मुझे गिल्ट होता है अंदर से, कि क्या मैंने ऐसे उनको पूरी तरह से भुला दिया, जिनने मुझे जनम
00:32दिया था
00:32और एमोशनलेस सा फील होता है
00:35निया आपके उपर लगभग करतव्य जैसा रखती है कि जो गए हैं उनको याद करते ही रहो
00:43आसू भाते ही रहो और अगर तुम ऐसा नहीं कर रहे तो तुम रिदेहीन हो, भावहीन हो, अकृतग्य हो
00:51मा गई है तुम अगर अच्छी आउलात बनकर जी रहे हो, तो यही प्रेम है
00:55मा को तुम सक्रिय रूप से याद करो, यह थोड़ी ही आवश्यक है प्रेम के लिए
01:02मा बेटे का रिष्टा है ना, बेटा अगर बढ़िया निकल गया, तो यही प्रेम है मा के लिए
01:07बेटा बैठ करके मा की यादों में खोया रहे, यह कोई आवश्यक थोड़ी है
01:13ना याद करना जरूरी है, ना भुलाना जरूरी है, आ गई याद तो आ गई
01:18नहीं आ रही तो कोई गुनाह नहीं हो गया, कि गलानी में घूम रहे हो कि
01:22मैं कैसा ऐसान फरामोश बेटा हूँ, कि मा को याद नहीं कर रहा, यह कोई बात है
01:28मा भी नहीं चाहेंगी कि बेटा उन्हें ही याद करता रहे अगर असली मा होगी
01:34भलाई चाहोगे या यह चाहोगे कि उबैट के तुम्हें सोच रहा है
01:37तुम्हें उसकी भलाई चाहिए या उसकी यादों में अपनी माननेता चाहिए
01:42तुम ये चाह रहे हो कि उसकी चेतना का स्थान उठे या ये चाह रहे हो कि उसकी चेतना में
01:47तुम्हें स्थान मिला रहे
01:48बोलो
01:49तो ये कुई बात नहीं होती है कि तुम हमें याद करो तुम हमें सोचो
01:54हम तुम्हारे दिल और दिमाग जहन में चाहे रहें
01:57तब तो प्यार है ये कुछ नहीं है