00:00बोस का अचाना काया कैन्वी टॉप मैसेज जन्जी कर्मचारियों को कई बार परिशान कर देता है
00:05इसकी वज़े सिर्फ गलती का डर नहीं बलकि मैसेज में संदर्व की कमी और काम का पहले से मौझूद दबाव
00:11भी है
00:11जब बोस यह नहीं बताते कि किस काम या मुद्दे पर बात करनी है तो कर्मचारियों खुद संभावित कारोलों के
00:18बारे में सोचनी लगता है
00:19टेक्स में आवाज और चेहरे के भाव नहीं होते इसलिए सामान्य बाचीत भी कई बात गंभीर लग सकती है
00:272026 की एक रिपोर्ट के मताबिक 42 फीसदी जैंजी ने काम से जुड़ी बातचीत के लिए इमेल को पसंदीदा तरीका
00:35बताया
00:35जबकि सिर्फ 7 फीसदी ने फोन कॉल को पहली पसंद माना
00:39लिखित बातचीत में मैसेज को पढ़ने और जवाब देने का समय मिलता है
00:44लेकिन Can We Talk जैसा असपस्ट संदेश या असपस्टता खत्म कर देता है
00:49एक सर्वे के अनुसार भारत में 24 फीसदी जैंजी ने हर वक्त या जादा तर समय दबाव महसूस करने की
00:56बात कही
00:56ऐसे में बास का अचानक आया असपस्ट मैसेज ओवर थिंकिंग बढ़ा सकता है
01:01हलाकि Can We Talk का मतलब जरूरी नहीं कि कोई बड़ी समस्या हो
01:05अगर बास मैसेज में बातचीत का विशेब भी बता दी तो अनावश्यक चिंता कम हो सकती है