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क्या आप जानते हैं कि जब समुद्र मंथन के दौरान निकले भयानक हलाहल विष को पीकर महादेव का कंठ नीले अंगारे की तरह जलने लगा था, तब तीनों लोकों में ऐसा कोई देव या औषधि नहीं थी जो उस विषैले ताप को शांत कर सके?

कैलाश पर हाहाकार मच गया था। देवताओं ने गंगाजल चढ़ाया, शीतल बेलपत्र अर्पित किए और चंद्रमा ने अपना अमृत उंडेला, मगर विष की अग्नि शांत नहीं हुई। तब महादेव के दारुण कष्ट को देखकर मां पार्वती ने हजारों वर्षों तक घोर तप किया, जिसके बाद प्राकट्य हुआ मां के आठवें स्वरूप—मां महागौरी का!
मां महागौरी ने जब अपने परम शीतल और अमृतमयी कर-कमलों को महादेव के जलते हुए नीलकंठ पर रखा, तो वो भयानक ताप क्षण भर में शीतल अमृत में बदल गया। शास्त्रों के अनुसार, मां महागौरी के दर्शन मात्र से जीवन के हर कष्ट, आंतरिक जलन और असाध्य रोगों का नाश होता है।

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