00:00तुम्हें बता दिया गया है कि जो लोग गीता वगेरा पढ़ते हैं, वो बिलकुल लौकी की सबजी हो जाते हैं
00:07बिना तेल की और बिना नमक की, कुछ बचता नहीं है वहाँ पे, और जो लोग ये धर्म वगेरा से
00:15दूर रहते हैं, ये सब वैसे भी ये तो दखिया नूसी �
00:17पिछड़े पन की निशानी होती है न, जो लोग इन से दूर रहते हैं, वो मज़े मारते हैं, कोई जवान
00:25लड़का है, वो अध्यात्मिक नहीं है, तो उसको कहता दिखाओगे, बिलकुल रंगीला राजा है, उसके पास सब कुछ है, उसके
00:32बुलेट है, बुलेट पर पी�
00:47तो ऐसा लगने लगा है, कि धर्म का मतलब ही है पिछड़ापन, कि धार में खो गए तो जीवन में
00:55न तो पैसा आएगा, न सम्मान आएगा, न किसी तरह की तरक्की आएगी, जबकि हकीकत यह है, कि अगर तुम
01:03दुनिया के उन लोगों को देखो, जो वाकई सफल हैं, तो �
01:09उसमें से दो तिहाँ ही लोग ऐसे पाओगे, जो गहराई से अध्यात में केंगे।