00:00दिन भर कभी इधर कोई है, कभी उधर कोई है, किसी के आगे पीछे कर रहे थे, पुरुश हैं तो
00:05कभी इस इस्तरी की और डोल रहे थे, कभी उसकी और देख रहे थे, यही सब चलता रहा पूरे दिन,
00:11किसे ने घास भी नहीं डाली, अब जाएंगे बिस्तर पर और अब सव�
00:29जितनी बीते वर्षों में हुई होंगी, जितनी आने वाले वर्षों में होने वाली होंगी
00:35मत से कन्या और हिम कन्या, जौला मुखी से कोई कन्या फूट के निकल रही है
00:40सब यूपिटर से कोई कन्या उतर रही है, सब हो जाएगा
00:44जो कोई
00:45समझ में न यह कहानी है कैसी
00:48विकल्प ही विकल्प
00:49कोई कल्पना
00:51पर तो कोई रोक नहीं है
00:53यह आम आजमी है
00:55और बाहर जाएगा अगले दिन
01:02बता भी न पाएगी
01:03बंदा कैसा है
01:06बाहर से कैसा
01:07सुशील, योगि सुशील नहीं होगा
01:09तो लती आया जाएगा
01:11जादातर जितने ये सुशील होते हैं
01:14ये जूते ही वाले सुशील होते हैं
01:17एक तो भारत वो भी सब
01:19उत्तर भारत की पैदाईश
01:21सब सुशील ही होते हैं हमारे हैं
01:23ये अलग बात है कि अपराधों में हमीं नम्बर एक हैं
01:26जितने तरह के अपराद हो सकते हैं
01:28सब सुशील ही होते हैं दिन में
01:31बाहर से सुशील और फीतर से अशलील
01:34उसको देखोगे तो कहोगे इजददार आदमी है
01:36इस सब इजददार लोग ऐसे ही होते हैं