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घर की महिला अगर सीमित रहेगी, कैद रहेगी, अज्ञान और बँधन में रहेगी, तो वह परिवार को भी कितना दे पाएगी? दूसरों के लिए जीना अच्छी बात है, लेकिन अगर हम ही कुछ नहीं हैं, तो हम दूसरों को क्या दे सकते हैं? औरत को पहले कुछ बनने तो दो, दुनिया को जानने दो। बच्चों की परवरिश हो या परिवार की ज़िम्मेदारी, सबसे पहले अपना निर्माण करना आवश्यक है। अपना निर्माण करिए, वह आपका प्रथम दायित्व है

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Transcript
00:00एक महिला का नंगे पैर दोड़ते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल हो रहा है
00:04जिसने वो परिवार की जिम्मेदारियों और बच्चों के भविश्य को बहतर बनाने के लिए
00:08होमगाड से पहले हुए ट्रायल रन में दोड़ती नजर आ रही है
00:30जो कलख, कलेश, संताप रहता है उसका बहुत बड़ा कारण ये है
00:35कि घर के केंद्र पर जो महिला बैठी है उसको घर में कैद कर दिया गया है
00:40घर उसी से है जब वो घर से कभी बाहर निकलेगी नहीं तो उसे दुनिया का कुछ पता नहीं
00:46वो क्या बच्चे की परवरिष करेगा, वो क्या पती के काम को समझेगा
00:52दूसरों के लिए तो तब जीयोगे ना, जब पहले तुम खुद हो कुछ
00:57बहुत अच्छी बात है दूसरों के लिए जीना, मैं पूरा समर्थन करता हूँ दूसरों के लिए जीने का
01:02लेकिन अगर हम ही कुछ नहीं है तो हम दूसरों को क्या दे सकते हैं भाई
01:06और तो कुछ बन तो जाने दो फिर वो दूसरों की सेवा करेगी न तुम उसे बनने ही नहीं दे
01:11रहे कुछ
01:12बच्चों को भी आप जादा कुछ नहीं दे पाएंगे
01:14अगर सबसे पहले आपने अपना निर्माण नहीं किया है
01:19अपना तो निर्माण करिए न वो आपका प्रथम दाइत है

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