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देश की राजनीति के लिए कैसे खास हुआ यूपी? देखिए 'सरकार' में
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00:10वो जो देश का संदेश है सत्ता का द्वार प्रवेश है राजमीत के प्रारब्ध की ये भूमी उत्तर प्रदेश है
00:34गंगोज मन्सर सतिया है मोक्ष अंदिम गतिया उल्लास उत्सव प्रतिया काशी में वाब महेश है
00:43ये भूमी उत्तर प्रदेश है
01:10ये भूमी उत्तर प्रदेश है
01:30ये भूमी खुद है ये प्रदेश है परमानो पूरा देश है यहां की सियासक जैसे भारत की जहांकी है आने
01:36वाले दिनों में जाने क्या-क्या अभी बाकी है
01:39नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक
01:42उन्नीसवी विधान सभा के लिए लगभग चार महीने बाद उत्तर प्रदेश में चुनाओ होने वाले हैं
02:24यह यूपी है भाईया राम जी की भूमी पे राम जी का नाम लेके सब काम काच हो जाएं
02:37यहीं आयोध्या जी से तो राम राज जी का सक्ता सूत्र निकला था
02:42यहीं तो थे बाके बेहाले अपनी उंगली पे गोवर्धन परवत उठाने वाले
02:49बड़े बड़े यूधाओं को रण की नीटी सिखाने वाले भाया यह यूपी है यहां त्रेता और द्वापर से राजधर्म और
03:04राजनीति का रिष्टा रहा है
03:07तो आपर हो त्रेता हो यह जब भी कोई तंत्र होगा तो उसको चलाने का कोई नीती होगी तो उसे
03:16हम राजनीति कहेंगे
03:19तो भाई आज हम इसी यूपी की कहानी सुनाते हैं यहां के सामाजिक प्रयोगों की कहानी सोचल इंजिनियरिंग की कहानी
03:27सामाजिक समानता के आंदोलन सोपजे राजनीति के नए विमर्ष की कहानी
03:36गान गयर कांगरसवाद की राजनीती जब उत्त्रपदेश में शरू हुई उसके बात की प्रयोग है
03:42और राजनीत में सत्ता कैसे प्रापत किया जाये उसके बाद उस दोर के सोचल इंजिरिंग के प्रयोग है
03:49जिसमें लोगों को बांट करके लोगों को राजनीत के लिए जोडने का क्रम होगा था
04:02देश की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीती ने जो बीज बोए देश की राजनीती ने वही फसल काटी
04:19उत्तर प्रदेश में कॉंग्रेस की भी ओरीजिन्स की सारी जड़ें हैं और उसके बाद 50 से 60 के दशक में
04:28गयर कॉंग्रेस वात का जो एमर्जेंस होगा उसकी जड़े में उत्तर प्रदेश में ही है
04:33ये यूपी है भाईया, सयोग तो ऐसे ऐसे बनते हैं कि पूछिये नहीं
04:39देश के पहले प्रधान मंत्री उत्तर प्रदेश से थे
04:42वर्तमान भी है
04:44अरे पंदरा में से नौ तो यहीं से है
04:53कहा जाता है कि स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स में जितना एक्टिव उत्तर प्रदेश का चात्र रहा है
04:59उतना शाहिद किसी और प्रदेश का ना रहा हो
05:01तो कुछ तो ऐसे माहौल में यहां के युवा नेता उभरते थे
05:06और दूसरा ये कि दिल्ली से निकटता की वज़े से
05:11और उस समय की कॉंग्रेस के मुचे नेताओं के महत्वपूर्ण बनने की वज़े से
05:15यहां के लोगों में एक महत्वपूर्ण जल्दी पैदा होती थी
05:19कि अगर वो थोड़ी भी मेहनत करें
05:21तो उनके लिए राजनीते का रास्ता उन्हें दिल्ली तक पहुंचायागा
05:28तो कुल जमा ये समझ लीजिए कि संपूर्ण देश का बुद्दा भी यहीं से बनता है
05:33और सत्ता भी यहीं से निकलती
05:45यहां नेहरू की कर्म भूमी रही है
05:48अटल विहारी बाचपई की कर्म भूद रही है
05:50तो जो राश्ती छितिश पर जिन्होंने राजनीती का एक बड़ी रेखा खीची
05:59वो ज्यादा लोग यूपी से जुड़े रहे हैं
06:02आजादी से पहले उत्तर प्रदेश राज्य नहीं था
06:06वो छोटी-छोटी रियासतों में बटा हुआ था
06:09जब 1857 की क्रांती हुई थी
06:12तब इन रियासतों ने अंग्रेजों के नाकोचने चपवा दिये थे
06:16वैसे तो अंग्रेज विश्वास करते थे
06:18डिवाइड आंड रूल यानि की बाटो और राज करो पर
06:21लेकिन यहां पर एक अलग तरह का बटवारा किया
06:25रियासतों को एक साथ राज्य बना दिया
06:28ताकि वो एक जुट होकर अंग्रेजों पर हमला न कर सके
06:321902 में इसे युनाइटेड प्रोविंस ओफ आग्रा और अवध कहा गया
06:371937 में नाम बदल कर केवल युनाइटेड प्रोविंस हो गया
06:42और आजादी के तीन साल बाद ये कहलाया उत्तर प्रदेश
06:50ग्रान्ती की अलग जगाने में भी यूपी बहुत आगे रहा
06:54अब बताईए ना 14 साल की उमर में भी बेंत खाक के
06:57चंदर शेखर आजाद भारत माता की जय बोलते रहें भारत माता की जय बोलते रहें
07:13भाया यूपी की मिट्टी से बड़े बड़े ख्रांतिकारी निकले इसमें बराबर के अस्तर पर हिंदू और मुस्लिम
07:23लीडर्शिप उत्तरक्रियस में दिए बक्त खान अस्फा कुल्ला खान आसा फली हसत मुहानी मौलाना सौकत अली मुक्तार अहमद अंसारी उसी
07:34तरह गड़े
07:57इसके समानांतर मुख्यधारा की राजनीती को भी यही जमीन निर्धारित कर रही थी दिशा दे रही थी
08:04एक और इलहाबाद के मूती लाल नहरू थे उनके लड़के जवाहर लाल थे लाल बहादुर शास्त्री थे डॉक्टर संपूर्णा नंद
08:15थे गोविंद वल्लब बंद थे
08:17तो उस्तर प्रदेश के चप्पे चप्पे पर सोतंता का संघर्स हो रहा था और अस्थानी एस्तर पनेता राष्टी एस्तर पनेता
08:29पंडित जवाहर लाल नहरू तेजी से महत्मा गांधी की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी के तौर पर पहचाने जाने लगे थे
08:381935 में अंग्रेजों ने Government Act of India के जरिये चुनाओ के बाद भार्कियों को शासन में और अधिक भूमिका
08:45देने का फैसला लिया
08:46फरवरी 1937 में चुनाओ हुए और कॉंग्रेस को देश की कुल 1585 असेम्बली सीटों में से 711 पर जीत मिली
08:5511 में से 5 प्रांथ मद्रास, बिहार, उडिसा, मद्धि प्रांथ और युनाइटेड प्रोविंस यानी यूपी में पूर्ण बहुमत मिला
09:09यूपी में भी पहली बार सरकार बननी थी सवाल था मुख्यमंत्री कौन दरसल उत्तर प्रदेश की राजनीती में ये वो
09:16दोड़ था जब कॉंग्रेस वारण असी में बहुत अधिक मजबूत थी और प्रयाग राज के नेताओं का वर्चस्वी भी खोब
09:23जलकता था
09:24मदन मोहन मालविये, रगुनाद सिंग, संपूर्णा नंद, कमला पतित्रिपाठी, पुर्शुत्तम दास्टंडन जैसे बड़े नाम थे जो बहुत चर्चित थे लेकिन
09:40जो नाम सामने आया वो था गोविंद बल्लभ पंत का और ये नाम नहरू की तरफ से आया
09:55पुर्शुत्तम दास्टंडन जी को चाहती थी, जवाला नहरू जी को ऐसा लगता था कि पंत जी बहुत सरल हैं सीधे
10:01हैं, इसलिए उन्होंने सर्दाल पटेल जी से बात की, तो सर्दाल पटेल उस समय संसे तालिस में यहां लखनव आया
10:10थी, लखनव भेजे गए थे नहर
10:33पंत यूपी के नेताओं में नहरू को सरवाधिक प्रियत है, कॉंग्रिस में एक समय जब नहरू और बोस के बीच
10:40विवाद हुआ, तब पंत नहीं मध्यस्ता की थी,
10:43इसके अलावा, दोनों कई बार जेल में लंबे समय तक एक साथ रह चुके थे, और सबसे बड़ी बात थी,
10:50पंत गांधिवादी विचार धारा के पक्के समर्थर थे
10:54गोविंद वल्लब पंत दो साल युनाइटेड प्रोविंस के प्रीमियर रहे, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत से उनके रिष्टे इस दौरान तलख ही
11:01रहे, इसी समय त्वित्य विश्व युद्ध भी शुरू हो गया, बिटन ने बिना कॉंग्रिस को विश्वास में लि�
11:10कॉंग्रिस के सभी मंत्रियों ने इससे नाराज होकर पदूं से इस्तीफा दे दिया, पंत ने भी गद्धी छोड़ दी
11:211942 का साल आजादी के लिए निर्णायक माना जा रहा था, अंग्रेजु भारत छोड़ों का नारा बुलंद बोल से गूंज
11:29रहा था,
11:33आंदूलन दबाने के लिए अंग्रेजु ने नेताओं को जेल भेजना शुरू कर दिया,
11:41गोविन्द बल्लब पंत को भी एहमाद नगर किले की जेल में डाल दिया गया, इसी किले में पंत और नहरू
11:47साथ रहे,
11:52जब 1937 में कांग्रेज की सरकार बननी थी यहाँ, तो पंडित नहरू ने ही गोविन्द बल्लब पंत का नाम सुझाया
12:01था,
12:02तो इससे भी इस बांडिंग को समझाय जा सकता है,
12:07अंग्रेजों ने 1946 में फिर चुनाव करवाए, कॉंग्रेज को फिर बहुमत मिला और पंत ही दोबारा कॉंग्रेज की तरफ से
12:15यूपी के प्रीमियर बने,
12:17लेकिन अब पंत के लिए मुश्किल दौर शुरू होने वाला था,
12:20क्योंकि समाज में अंग्रेजों ने सांप्रदाइक्ता की फूप डाल दी थी, और वो रंग दिखाने लगी थी।
12:50करना करना पड़ा, लेकिन ये पंत जी जैसे लोगों का ही योगदान है कि यूपी में उस तरह दंगे नहीं
13:02हो पाए, उस तरह हिंसा नहीं हुई, जिस तरह बंगाल में हुई।
13:08सेंट्रल प्रोविंस में पढ़ाई का सेंटर रही अलिगर यूनिवरसिटी से आवाज उठने लगी थी।
13:14मुस्लिम लीग की ओर से तक्रीरें करने वाले जिन्ना समेथ, तमाम नेता ये कह रहे थे कि हमारी तो पहचान
13:20अलग है, संस्कृती अलग है, तो देश भी अलग होंगे।
13:23अलगाव की आग भड़कने से पहले यूपी में साम्प्रदाइक्ता का धुआ सुलगने लगा था, तब यूपी यानि यूनाइटेड प्रोविंस में
13:3316 सेंट्रल असेंबली सीट हुआ करती थी।
13:36इनमें 6 मुसल्मानों के लिए आरक्षित थी। जिन्ना के नित्रित्व वाली मुसलिम लीग ने सभी 6 सीटे जीत लिए। यहां
13:44तक की स्टेट असेंबली की 66 मुसलिम आरक्षित सीटों में से 54 सीटे मुसलिम लीग नहीं जीती।
13:55उसाग में देश जला, लोग कटे, एक देश दो हिस्सों में बढ़ गया
14:01समुदायों के जातियों के टकराव तो पहले से रहे, लेकिन संप्रदायों के टकराव के आगे भाईचारा नहीं टिक पाथ
14:08बहुतों ने कहा, यह हमारी धर्ती नहीं, तो कुछ ने कहा, यहीं जिये हैं, यहीं मरेंगे
14:17लेकिन उत्तर प्रदेश में शायद ऐसा कहने वाले कम थे, क्योंकि भारत में सबसे अधिक मुसल्मान उत्तर प्रदेश से ही
14:24पाकिस्तान गरे
14:24उस दौर में टक्राओं की सबसे बड़ी लकीर बंगाल में खिची, पर सबसे गाड़ी लकीर उत्तर प्रदेश में
14:34निस लोड़ूमी उसाद में जो लक्नौ ग्रस के अडिवेशन वा था जिसमें मुसलिम लीग और कॉंडरस के बीच
14:48उसी अडिवेशन के बाद लंगनाव की वा जिसका नाम जिसको कांड़स αναलते लग-नव कर के शुरू किया था कि
14:58इसमें कांग्रस में मुस्लिम लीग के बीच में संभ्योता हुआ था और लोगों को लबता था कि हिंदु मुस्लिम राजनी
15:04तीक से चलेगी चुकि मुसल्मानों की संक्या उत्तरप्रदेश में अधिक है सबसे आदा है और पाकिस्तान की मांग भी सबसे
15:14पहले यहीं उठी थ
15:27हुआ है यह भी समझे कि यूपी भगवा राजनीती की प्रयोगशाला कोई आज नहीं बनी है
15:331948 में फैजाबाज सीट पर उपचुनाओ होना था एक कॉंग्रेसी नेता थे बड़े कद और काईदे के समाजवादी कहलाते थे
15:40आचारी नरेंद्र देव उसूलों पर कॉंग्रेस छोड़ दी थी और सोशलिस्ट पार्टी बना ली थी फैजाबाज सीट से चुनाओ में
15:47उ
16:02जोधा होने के नाते लोकप्री तो थे लेकिन उनकी सोच जैसा हम कह सकते हैं कि जो एक कन्वेंशनल या
16:10ट्रेडिशनल पॉलिटिक्स की होती है जिसमें धर्म का भी एक मेल जोल रहता है वैसी नहीं थी और उनका जोर
16:18हमेशा शिक्षा पर और समाज के हर वर्क को आगे बहा
16:31होगा कि अगर वो और मजबूत होते हैं तो कॉंग्रेस के कई नेताओं के सामने एक संकट खड़ा हो सकता
16:38है इसलिए उनको इस आधार पर उनका विरोध किया गया कि वे उतने धार्मिक प्रवरिती के नहीं है यह वो
16:46दौर था जब राजनीतिक पार्टी का मतलब सिर्फ क�
16:51कुछ पार्टियां थी जो चीटी होकर भी हाथी से भिरने का ताओ रखती थी। यूपी चुनाओं में ऐसी ही पार्टियों
16:58ने तेवर से ताल ठोकी। 14 पार्टियों ने यूपी विधान सभा का पहला चुनाओं लड़ा।
17:26इन में से कुछ पार्टियों ने आगे चलकर नाम बदले, नाम कमाए लेकिन कुछ क्रांती ही नहीं कर पाई।
17:33439 सीटों पर चुनाओं लड़ा गया, एक सीट नॉमिनेटेड सदस्य के लिए थी।
17:38कॉंग्रेस ने 388 सीटों पर जीठासे गी। दूसरे नंबर पर सोशलिस्ट पार्टि जिसके 20 सदस्य जीते।
17:47गोविंद बल्लब पन्त एक बाद फिर यूपी के सीअम बन गये।
17:51सोचिये, ऐसा राज्य जिसके जितनी आबादी दुनिया के बड़े-बड़े देशों की नहीं रही।
17:56इतनी व्रिहद संस्कृती, इतनी बड़ी विरासन।
17:59इतने बड़े राज्य का तीन बार मुख्यमंत्री बनना।
18:03जी भी पन्त का कद बहुत बढ़ा, और साथ-साथ यूपी कॉंग्रेस में अब पद की लालसा भी उतनी ही
18:09बड़ी।
18:09नहिरू जी ने और कांग्रेस के अधिक्तर नेताओं का ये मानना था कि गोविंद पन्त से उप्यूक्त मुख्यमंत्री इसमें कोई
18:20इसलिए नहीं हो सकता।
18:21क्योंकि वरिष्टम है और उनको पहले भी मुख्यमंत्री रहने का अवसर मिल चुका है उसका अनगो है।
18:32तो सबसे बड़ा कारण ये था उनकी साथगी, उनकी इमानदारी, उनकी विज्वता और उनका अनगो।
18:39नहरू जी से उनकी निकटका। इसलिए उनको उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया।
18:58खैर तबकी राजनीती में थोड़ी बहुत लाज नीती भी थी।
19:01नहरू की लाज, पंत की लाज रखने के लिए भीतरी कलह दबाकर सरकारी काम का चलता रहा।
19:07पर अपने विगार के डर से इमान की बात न बोलें, ऐसा पंत जी से नहीं होता था, बलकि उनके
19:13उसूल तो ऐसे थे जो अब तक याद किये जाते हैं।
19:17अगर इस उत्तर प्रदेश को बनाना है तो पहले हमें अपने आपको बनाना होगा, अपने आपको में वह अच्रान कर
19:27के दिखाना होगा, जिससे उत्तर प्रदेश के लोगों के बीचे संदेज जाए,
19:31कि जब हमारा मुख मंत्री इतना सरल साध्गी भरा, इतना इमानदार और उत्तर प्रदेश को विक्षित बनाने और सुंदर बनाने
19:42के प्रति ग्रण प्रतेग्य है, तो हमें भी वह इसा करना चाहिए.
19:45फिजूल खर्ची के सब नफरत करते थे, दूसरे वो ये मानते थे कि सरकारी ओहदों पर बैठे लोगों को सरकारी
19:57संसाधनों का उप्योग अपने निजी हित में नहीं करना चाहिए.
20:04यूपी की पहली सरकार में थोड़ी बहुत कलेह थी, जो समहाल ली गए. लेकिन एक मुद्दा था श्री राम जन्व
20:10भूमी का, जो समहालना कॉंग्रिस के लिए आसान नहीं था.
20:14उनीज सो उनचास की बात, योगी आदित्यनात के गुरू के गुरू ने पंथ सरकार को पसोपेश में डाल दिया था.
20:23तब गोरक्षनाथ पीट गोरकपुर के मांध हुआ करते थे दिगविजयनाथ, योगी जी के गुरू महंत अवैध्यनाथ के भी गुरू थे
20:31दिगविजयनाथ, यूपी के मठ मंदिरों से आवाज उच रही थी, राम जन्म भूमी को मुक्त करू, दिसंबर का महीना था,
20:40ता
20:53कामले को समभालने में पंत सरकार के हाथ पाउं फूल गए थे, यहां तक कि फैजाबाद के जिलाधिकारी केके नायर
21:00से भी आदेश की तामील नहीं करा पाए थे, तब से सरकार की नीती थी कि मंदिर मुद्दे पर संतों
21:06के साथ दिखने से देश में माहौल भिगड सकता है
21:11कॉंग्रेस सेक्लूरिजम के नाम पर आगे बढ़ रही है, उसे अंदाजा था कि अगर राम मंदिर के मुद्दे पर वो
21:16हिंदू पक्ष के साथ आती है, तो बुरा राजनीतिक असर उस पर पढ़ सकता है, इसलिए पंत सरकार ने यूपी
21:22के सबसे एहम मुद्दे पर कृप
21:39और इसलिए मामला ने आलाय में था, तो वो सरकार को भी सुर्दा रहती है, ये कहने में कि मामला
21:45ने आलाय में है, इसमें क्या ने लिया जाए, तो वो उसका रास्ता अपना आया था पंत सरकार चार साल
21:55तक चलाई, पता नहीं राजनीतिक मजबूरी थी या ये जरूरी था
21:59पर दिसंबर 1955 में एक दिन उन्हें नहरू जी का दिल्ली से बुलावा आ गया
22:05और वो ग्री मंत्री बनकर केंद्रिय राजमी तो जाए
22:12तो गोविंद वल्लब पंत के बाद इतने बड़े राज्य का मुख्य मंत्री कौन?
22:17कहने को तो कई नेता थे जो राश्य स्तर के थे लेकिन बात विश्वास की थी विश्वास की सुई कहां
22:25आकर टिकी दिखाएंगे
22:34उत्तर प्रदेश विधान सबर चुनावूं से पहले आप देख रहे हैं सरकार और ये है उसका पहला अध्याए
22:41गोविंद वल्लब पंत का विकल्प कौन होता? ये कहा जाता है इस सवाल का जवाब खुद पंत हल करके गए
22:48दरसल गोविंद वल्लब पंत काशी के डॉक्टर संपूर्णानंद को काफी माना करते थे
22:54पंत सरकार में संपूर्णानंद वित और शिक्षा जैसे एहम मंत्राले सभाल चुके थे
23:00गुटबाजी तो थी और खुब थे लेकिन एक विश्वास नेत्रित्व का भी था
23:07संपूर्णानंद को संदेश दे दिया गया और पंत के दिल्ली जाने से ठीक अगले दिन
23:12संपूर्णानंद को मुख्य मंत्री की शपत दिला दी गए
23:37मन से साहित्तिकार सोच से गांधिवादी वारणसी के डॉक्टर संपूर्णानंद को उत्तर प्रदेश का मुख्य मंत्री बना दिया गया गया
23:48यू तो बड़े बड़े नेता थे कमलापती त्रिपाठी चौधरी चरण सेंग त्रिभुवन नरायन सेंग चंद्रभानु गुप्ता धेमवतिनंदन बहु गुणा लेकिन
23:58नहरू जी की नजर में संपूर्णानंद की साधगी सब पर भारी पड़े
24:02डाक्टर संपूर्णानन की चवी निर्विबाद चवी थी डाक्टर संपूर्णानन किसी गुढ़वाजी में नहीं पड़ते थे डाक्टर संपूर्णानन विद्वान थे
24:14साहीत्यकार थे डाक्टर संपुनना नद्व पत्रकार भी थे हिंदियों और अंग्रेजी की दोनों उन्हों ने संपादन भी किया था और
24:24उनकी इमानदारी उनकी वरिष्टता वो भी संयूग सरकार में जो है वो अंग्रेजों के समय मिटिस पीडियर जब था तब
24:34भी वो न
24:53संपूर्णानंद हिंदी संस्कृत के विद्वान थे खगोल विज्ञान और जोतिश में उनका बड़ा मन रमता था पर डॉक्टर संपूर्णानंद के
25:00लिए ये कांटों ब्राताज था
25:04चौधरी साब हमेशा संपूर्णानंजी की जो सरकार चलाने की नीत थी या सिध्धान थे उनके वो विरोधी रहे हैं और
25:14वो हमेशा किसानों करशी उसको महतुदेने और चूंकि उस समय देश आजाद हुआ ही हुआ था कुछ ही वर्ष हुए
25:24थे तो कहीं संपूर्णानंजी
25:26ये कोशिश करते थे के सम्मिक विकास की तरफ ध्यान रखके चला जाए लेकिन चौधरी साब का ये मानना था
25:34कि इस देश की आर्थिक रीड इस देश की सामाजिक या कह लिजिए के और अगर विकास की नीत पर
25:45देखा जाए तो वो किसान और क्रश आधारिक नीत बननी चा
26:00सच यही था कि संपूर्णानंद सरकार बस चल ही रही थी एक साल में काम जो किया सुकिया लेकिन सरकार
26:07और संगठन के कील काटे दुरुस्त करने में संपूर्णानंद अपनी धाग नहीं जमा पाए पार्टी के बड़े नेता अपनी डफली
26:16अपना राग वाली धुन बजा
26:26ठेए वो यह चाहते थे किसी भी प्रकार सट्टा और संगठन में या सट्टा और सट्टा के बीच किसी प्रकार
26:35का टकराओ नहो आपसी बाचित विमर्स से इन चीज़ों को टाला जा सकए टकराओ को तो वो टालते रहे लेकिन
26:43चौदरीशाब अगर आज के समय की बात कर ल
26:50लोगों में थे उस पे उन्होंने समझोता नहीं किया किसानों और क्रश को लेके सहकारी सहकारिता को लेके ये उनकी
26:59विचारधारा का मूल था जिसको लेके वो टकराओ करते रहे और अंततहा फिर चौधी चलन सिंग को आके कांग्रेस को
27:07छोड़ना ही पड़ा
27:10पहली विधानसभा का कारिकाल पूरा हुआ कॉंग्रेस को इसी चुनाओ में संगठन की एहमियत की पहली जलत मिल गई
27:16नेताओं में आपसी बैर था संगठन वालों को लग रहा था कि हमारे आगे कौन टिकेगा
27:22दूसरे विधानसभा चुनाओ में भी कॉंग्रेस के आगे कोई टिक नहीं पाया लेकिन सीटों की संख्या कम हो गए
27:27102 सीटों का नुकसान हुआ था उसे 430 में से कॉंग्रेस को 286 मिले
27:33दूसरे नंबर पर नहीं नहीं प्रजाज सोशलिस्ट पार्टी जिसके मुख्या थे राम मनोहर लोहिया जिसे 44 सीटे मिली
27:40जन संको 17 संपूना नंद खुद अपनी काशी शेहर दक्षण की सीट बहुत मुश्किल से जीते
27:51कॉंग्रेस दोबारा सट्ता में लौट तो आई लेकिन तब तक पार्टी के अंदर इतने धड़े बन चुके थे
27:57कि संपूना नंद के लिए काम करना मुश्किल हो रहा था
28:00चौदरी चरण सिंग खुले मंच पर दिल खोल कर अपने सीम का शब्दों से ऐसा भी शेप कर देते थे
28:05कि पूछिये मा
28:07तब 1969 में कॉंग्रेस अध्यक्ष बनने पर इधिरा गादी ने चौदरी चरण सिंग को चिट्थी लिखी
28:12इशारा किया कि चौदरी साहब आपकी मिजी पसंद नापसंद अलग हो सकती है लेकिन पार्टी का हित देखिये
28:19सीम के खिलाफ खुली बयान बाजी से बचिये
28:26कॉंग्रेस सरकार कमला पती त्रिपार्थी संपूर्णा नंद गुट
28:31चंद्रभानू गुट्णा गुट और चरण सिंग गुट में पती थी
28:34चौदरी चरण सिंग संपूर्णा नंद की शिकायद नहरू से करते रहते थे
28:38लेकिन नहरू भी जान रहते कि अपने आदमी के साथ खड़े रह गा
28:41तो चुगली का रिवर्स इफेक्ट ये हुआ कि चौदरी चरण सिंग को मंत्री मंदल से बाहर होना पड़ा
28:47लेकिन गुट एक हो तो चैन मिले गुट तो कई थे
28:50चौदरी साहब का गुट कमजोर पड़ा तो चंद्रभान गुट ने भी संपूर्ण आनंद को चैन से बैठने नहीं दिया
28:58कारकरताओं और जनता दोनों के साथ चंद्रभान गुट जी का बड़ा निकट का नाता था रहा है
29:05बड़ा मजबूत नाता रहा है कारकरता भी चंद्रभान गुट के प्रती भरोसा रखते थे और चंद्रभान गुट भी अपने कारकरताओं
29:14का पूरा ध्यान लगते थे
29:15तो इसलिए जहां बाकी लोग नहरू जी को प्रणाम करते थे
29:21तो इसमें कोई दोराई नहीं के उत्तर प्रदेश की राजनीत में चंद्रभान गुट को लोग डंडवत प्रणाम करते
29:31कहा जाता है कि तब चंद्रभानु का दबदबा प्रदेश में इतुना था कि कारिकर्ता पंडित नहरू से भी पहले उनकी
29:37बात माना करते।
29:38मतलब जिसके पीछ है काडर उसका चलेगा ओडर वाला माना। यह तब सावित हो गया जब भूपी कॉंग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
29:45के चुना हुए।
29:49डॉक्टर संपूर्णा नंद चाहते थे प्रदेश अध्यक्ष बने मुनीश्वर्दत उपार्धिया।
29:53लेकिन भाईया काडर में तो चंद्रभानु का ओडर चल रहा था।
29:56630 मतों के अंतर से चंद्रभानु बुक्ता से हार गए मुनीश्वर्दत।
30:00संपूर्णा नंद ने इसे अपनी हार माना, मुख्यमंत्री पद से स्तीफा दे दिया।
30:05नेरू के समर्थन और संपूर्णा नंद के मुख्यमंत्री रहते लाल-बहादुर शास्त्री तक प्रदेश उपाध्यक्ष का चुनाओ हार गए।
30:12पोशा धक्ष के पन के लिए कमलापती त्रिपाथी जैसे दिगज हार गए।
30:42पहले कहा कि संगठन में कॉंग्रेस के नेताओं में कारकरताओं में चंदभान गुप्द जी की मजबूत पकड़ थी और वही
30:51हुआ के संपूरा नंजी का प्रत्याशी उपाध्याय चुनाओ 630 मतों से हार गए थोड़े बहुत मतों से नहीं हारे और
31:01चंदभान गुप्द �
31:02जी ने बड़ी शिकस दे दी और उस शिकस से आहत होकर या नैतिकता के आधार पर संपूरा नंजी ने
31:10मुखमंति पस्ट से इस्तिफ़ा दे दिया
31:14एक बात जो कही जाती थी वो ये कि संपूरा नंद मुखमंतिरी रहते किसी गुमनामी बाबा से मिलने जाते थे
31:20वो बाबा परतेगे पीछे से बात किया करते थे कई इतिहास कारूं और जानकारूं का दावा है कि वो सुभाश्चंदर
31:28बोस थे
31:28लोगों का मानना है कि सुभाश्चंदर बोस की अंतिम और सही जानकारी सिर्फ संपूर्णा नंद के पास थी
31:37संपूर्णा नंद इस्तीफा दे चुके थे और उन्हें राजस्थान का गवर्णर बना दिया गया
31:42संपूर्णा नंद के जाने के बाद यूपी में कॉंग्रस का वो आखरी सूत्र तूट गया
31:48जो सबको नहरू गांधी नाम की छत्रचाया में रखता था
31:52यहीं से यूपी में कॉंग्रस की राह हमेशा के लिए मुश्किल होती चली गई
32:03साथ दिसंबर 1960 को चंद्रभानु गुप्ता उत्तर प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री बन गई
32:08भले वो नहरू के धूर विरोधी थे और नहरू को भी विल्कुल पसंद नहीं थे
32:12लेकिन बात जन्मत की थी
32:14बहराल उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना एक बात थी और बने रहना दूसरी बात
32:22पार्टी के लिए वो फंड रेजर थे तो उन पर यह आरोप भी लगते थे कि वो पैसों की हेरा
32:27फेरी करते हैं
32:28लेकिन चंदरभानू ने इस आरोप को अपने उपर मजाग का एक जर्या बना लिया
32:33और अक्सर खुद ही अपने खिलाफ नारे बाजी करके लोगों को चौंका देते
32:39वो कांग्रस को कोशा दक्स थे उनके पास एक एक आदमी का हिसाब रखा रहता था
32:44आता है। उन्ह और मुझे थ्यूर बिखाया था जिसम्री इन धीया था किस-किस पार्ट किसकिस लुआ कितना कितना चन्दा
32:50दिया था उन्होंने
32:52टीन हजार उपे उनने पंज मलाम को 11 को इलाभात कि चुनाव में दिया था वह रजिटर देखा था मैंने
32:58तो उन पर ये उनके विरोधी ये आरूप लगाते थे कि गली-गली में शोर है
33:05चीवी उपता चुई लखनो विश्विद्यले का नारा था
33:08लखनो विश्विद्यले तो उसको उसको मजाक उड़ाते थे
33:13और ये कहते थे आपने नारा नहीं सुना
33:16कोई इस पर बात तो कोई यकीन नहीं करता था उनके विरोधी नारा लगाते थे
33:23पर चंद्रभाली गुपता कॉंग्रिस के अंदर उनी कले शांत नहीं करा पारे
33:27कमलापती त्रिपाठी गुट और चौधरी चरण सिंग गुट लगातार उनकी नात में दम कर रहा
33:31उपर से तब तक सामने आ गया कामराज फॉमिला
33:36बड़ा चर्चित फार्मूला है
33:381963 में बतावर अध्यच कामराज ने एक फार्मूला सुझाया
33:47महरुचका की संगठन कमजोर पड़ रहा है
33:52और कांग्रेश को अगर मजबूत करना है
33:56तो उन्होंने फार्मूला दिया कि सत्ता में बैठे जो भी लोग हैं
34:01उनको संगठन में आना चाहिए
34:03और काम करना चाहिए अपने पदों से इस्तिफा दे
34:06तो अब चंद्रभानू बुक्ता से भी त्याग पत्र देने को कहा गया
34:10पर वो ठेरे खांटी आदी उन्हें समझाने के लिए कॉंग्रस को कई मोर्चों पर काम करना पड़ा
34:16दो अक्तूबर 1963 को आखिरकार चंद्रभानू बुक्ता को इस्तिफात देना पड़ा
34:25सुचेता क्रिपलानी बंगाल में जन्मी थी दिल्ली में पढ़ी थी यूपी से कोई नाता नहीं था
34:30हाँ प्रसिद्ध स्वतंधुता सेनानी थी भारत छोड़ो आंदोलन में महिलाओं का नित्रित्व करती थी
34:35आजादी के बाद पंडित नहरू की स्पीच से पहले उन्हों ने वंदे मातरम गाया था
34:39समविधान सभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर चुकी थी
34:42तो नहरू जी किसी और को चाहते थे मुख्य मंत्री बनना
34:47लेकिन जंदर्भान गुप्तने उस समय सूचेता कर्बलाणी को चीफ मिनिस्टर बनना दिया था
35:03और वो एक भायला सबसे बड़ा प्रयोग था उत्तर प्रदेश का गैर राजिका के मुख्य मंत्री बन जाए
35:11खेर नियती का खेल था और भारत को सबसे पहली महिला मुख्यवंत्री के तौर पर सुचेता क्रिपलानी को चुन्ना था
35:19सहरा भी यूपी के सर बंधना था सुपन्धा
35:25यूपी में कॉंग्रस प्रयोग कर रही थी
35:27लेकिन एक कलह को दबाने की कोशिश दूसरी कलह को बढ़ा देती थी
35:32अब केंदर में नहरू नहीं थे शास्त्री भी नहीं थे इंदिरा थी
35:37इंदिरा के पास पिता के साथ काम करने का अनुभव तो था
35:40लेकिन यूपी तो फिर यूपी है
35:42हर पुराने अनुभव के सामने नया अनुभव खड़ा कर देती है
35:46कॉंग्रिस ने जो सोचा भी नहीं था वो हो गया
35:501967 की चौथी विधान सभा के चुनावों के बाद
35:56कॉंग्रिस दो सो सीटों से नीचे आ गए
35:58कई बड़े बड़े दिगट चुनाव हार गए
36:00कमला पतित्र पाठी अपनी पारंपरिक सीट हार गए
36:03कॉंग्रिस को 425 में 199 सीटे मिली
36:07जनसंग को 98 सीटों के साथ बंपर काम्याबी
36:10तीसरे नंबर पर राम बनोहर लोहिया की नित्रत्व वाली सयुक्त सोशलिस्ट पाठी रही
36:14इसी चुनाव में लोहिया की पार्टी से एटा की जस्वंत नगर सीट से जीत कर पहली बार 28 साल के
36:21मुलायम सिंग यादव विधान सवा पहुंचे थे
36:25सुचेता कृपलानी केंदर की राजनीते में वापस लोट गई
36:28चौदरी चरण सिंग्न बगावत का बिगुल फूप लिया कॉंग्रेस के पास एक ही विकल बचा था और वो ते फिर
36:35चंदरभानू गुपता
36:37लेकिन इस पार वो सिर्फ 19 दिन मुख्य मंत्री रहे क्योंकि यूपी कॉंग्रेस ही तूट गई
36:43चंद्भान गुपता की सरकारत थे उनने सुसर्ट में वो दो लोगों को मंत्री बनाना चाहते थे जैराम गुपता फैजाबाद के
36:52उनके समर्थक थे और उसी तरह से पश्ची मुत्रपदेश के वे दो लोगों को मंत्री के रूप में देखना चाहते
37:02थे चंद्भान गु
37:12था जिसके कारण चौदरी साहब और उनके साथ 17 लोग और उन्होंने कांगर्स पार्टी तोड़ती थी।
37:19चौदरी चरण सिंग ने न सिर्फ नई राजनीतिक पार्टी भारतिय क्रांती दल बना ली बलकि जनसंग, कम्यूनिस्ट पार्टी और समाजवादी
37:27नेताओं के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया।
37:34तीन अप्रेल 1967 को चौदरी चरण सिंग के नित्रित्व में पहली बार उत्तर प्रदेश में गैर कॉंगर्सी सरकार बन तो
37:45गई, लेकिन जब सत्ता मिली तो विचार धाराएं और आपसी एहम का टकराओ होने लगा।
37:50इस बीच गैर कॉंगर्सी राजनीती के जनक राम मनोहर लोहिया का निधन हो गया।
38:20सभी पार्टियों के लोग थे, विपरीद विचारों के लोग भी थे, तो जाहिर सी बात है कि कांग्रेमो भी था,
38:27वो जैन संग भी थी, बैचारिक मद्भेद सरकार बनने के साथ ही सुरू हो गय थे, और बाद में इन
38:43पार्टियों ने बैचारी मद्भेद साथ
38:46अपने समर्थन वापस ले लिए चोजिश साब ने पद त्याग दिया
38:58विधान सभा के लिए चुनाव हुए नतीजे ऐसे आये कि
39:02पांचवी विधान सभा उत्तर प्रदेश के इतिहास की अब तक की
39:06सबसे अनोखी विधान सभा साबित हुई क्या हुआ दिखाएंगे
39:10अगले एपिसोड में तब तक देश और दुनिया की बाकी
39:14खबरों के लिए आप देखते रहिए आज तक