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  • 13 minutes ago
एमपी में चीतों के पुनर्वास और संरक्षण अभियान को कैसे मिली नई दिशा? CM मोहन यादव ने बताया

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00:00हम इस समय मध्य प्रदेश के एक ऐसे वन में मौजूद है जो तीसरा वो स्थल हो गया है जहां
00:07पर अब आप चीतों से मुलाकात करने के लिए उन्हें देखने के लिए आ सकते हैं
00:12तो एक वो राज जो पहली जगे है पहली भूमी बना जहां पर चीतों की घर वापसी भारत में हुई
00:18और आज बहुत तेजी से चीतों के उस खेतर का विस्तार होता जा रहा है अपने हातों से अभी मध्य
00:25प्रदेश के मुख्य मंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने यहां पर द
00:40सही है कि जिस इस टाइगर अभिहरण्य में हम उनको छोड़ा है यहां के नजदी के इलाके में आखरी बार
00:48चीते उनीस सुबारा में पाए गए एक सो दस साल पहले और ये सागर जहां जिस जिले में हम बैठें
00:55या लगवाए एक सो शाट साल पहले चीते का आखरी बार आस
01:11वहां से लाकर के ये चीता प्रजाती को पुनर बसाहट का ये बड़ा काम हाथ में लिया था और ऐसे
01:18में बीस चीतों से जो सफर सुरू हुआ हमारी सरकार बनने तक ये बारा रहे गए थे लेकिन आज की
01:25स्थिती में तीसरी पिडी इन किया गई आज साथ चीते हमारे अपने �
01:30जम्य है और जैसे आपने कहा सही कहा कि आज हमारे पास इंशरा घर उनका बन रहे है यहां के
01:38पेले कुनो शोबज के पास चंबल के लाके में दूसरा घांधिसागर मालवा में तीसरा लेकिन इसका महत वह इसनाते से
01:48को नुम पालंदपुर में हमारे पास चीते को जे बसाय
01:55गया है तो उसमें हमने उनको टाइगर के साथ रहने के आदा तबी नहीं जा लिए दूसरा गांजिसागर में भी
02:03उनको ठोड़ी सुरक्षा और बाकी ववस्था से लेकिन यहां करके हम टाइगर अबया रहने के साथ उनको लेकिन प्रबंदन यही
02:10किये गए कि धिरे दिरे य
02:15टाइगर अपना परिवार बढ़ा है क्योंकि जब चीते रहा करते थे उस समय यहां पर टाइगर की मौजूदगी मतलब भारत
02:22में थी अब कुनों गांधी सागर और अब यह जब चीतों की वे इंट्रोडक्शन के लिए हम जगों को चैनित
02:32कर रहे थे तब भी इस जगे को
02:33चैनित किया गया था लेकिन कुनों को फाइनली चुना गया और मेरा ख्याल है करीब 2018-19 में यहां पर
02:40टाइगर अगया उनकी भी संख्या बहुत बढ़ गई है अच्छी संख्या हो गई पहले जीरो हो गई थी हमारे राज्जी
02:46में आज पूरे देश में सबसे आदा अगर �
02:47तो टाइगर की मद्यपदेश से है और यह वो सोभा किसाली जगा है जहां टाइगर भी दिखाई देगा और चीता
02:55भी अपना परिवर बढ़ आएगा तो यह जो आप कह रहे हैं कि टाइगर वाली जगे पर चीता यहां पर
03:01लाया कितना चालेंजिंग या फिर हम कहें कि आ�
03:17बनाया हुआ है लेकिन जैसे सिकार के कारण से बीमारी के कारण से कई और प्रकार की कारणों से धीरे
03:26-धीरे करके इनके आबादी आखरी में 36 गड़ के पास एक जिले में मद्यपदेश में खतम हुई थी जो पुरा
03:32ना संयुक्त मद्यपदेश था उसके बाद से चीते हमा
03:44हमारे पास आज किस्तिय में 60 चीते हो गए हमारे पास और धीरे-धी बढ़ रही है और यह अब
03:50खुले में भी इनकी तीसरी पीडी ने अपने परिवार को बढ़ाया अब साले हमने रखते थे जीरे-धीरे करके अब
03:57खुले जंगल में और चीता इतना मस्त उता प्रकरती प
04:14रहा है वो समय भी जब यह सवाल पूछे जाने लगे थे कि अरे यह तो देखिया मरते जा रहे
04:19हैं यह तो जो प्रोजेक्ट ही है यह फेल बोने वाला है आज आपको कितना इस बात को देखकर सुखद
04:26असास होता है कि जो भारत में जन्में चीते हैं उनकी संख्या जो ला�
04:43वारत में संधेज भी है और यह तीसरी पीडिया हमारी अब हवा को भी अपना रही है उनके साथ जो
04:49महा का परयावरन महा का जो एको सिस्टम वेख चैलेंच था कि यह एक तरस से महादीब भी बदल रहा
04:56है ऐशेया महादीब है ऐसे महादीब की अपनी चुनोतियां भी होत
05:13उसमें बड़ी संख्यावे में लड़कियों को भी देख रही हूं तो यहां पर उस टाइगर प्रोजेक्ट के साथ भी आपकी
05:21लड़कियां जुड रही है बिलकुछ सही बात है क्योंकि यहां आपने कई आसपास के बफर जोन में गाउं भी है
05:28और एसे लोगों को हमने इसे �
05:30जोड़ा भी है क्योंकि विस्थापित होने के बाद उनको रोजगार भी चाहिए और जित्ते अच्छे से सहज अस्तित्तों के साथ
05:37वो आपस में इस अभो हवा को जंगल के जानवरों के साथ जो इस्थानी रहवासी रह पाते हैं स्वाभई गुरुप
05:44से हमारा भी फर्ज
05:45बनता है कि सरकार के माध्यम से जब टूरिस्ट आएंगे तो हम उनको अपने समीतियों को वन फोर्थ उसके आयका
05:51भी हिस्सा देते हैं अच्छा अगे उनके लिए आयका साधन भी बनता है होमिस्टे से भी लाब मिलता है और
05:58वन्य जीवन को साथ ग्रामिंट इन शेट्रों
06:15तो इसमें जो इस क्षेत्र को लेकर पलायन की बात या और चुनोतियां होती थी आपको लगता है उन सब
06:22का तरीका यहां से निकल सकता है यह यह तरीका है गाओं के अंदर जब बन्य जीव होता है जहां
06:29टाइगा रवियरन या इस प्रकार के बनते तो हमारे एक सरल सिद्�
06:35इपार्टमेंट कहता है कि उसको खाली कराना चाहिए बन जीव जहां रहते हैं वहां दूसरे प्रकार की गतिविदी पर प्रतिवन
06:42लगता है लेकिन एक चुनोती यह होती कि जो वर्सों से गाओं में रहे हैं जिनकी अपनी जमीने थी उनको
06:48विस्ठापित करने के बाद उ
07:02आगे बढ़ा रहा हैं जो अनुभव रहा कुनों में जिस तरह से चीतों को एक तरीके से सब अपनी भावुक
07:12तौर पर भी जो आम लोग रहे वो सब जुड़कर की चीतों की आबादी बढ़े वहां के कौन से ऐसे
07:18अनुभव हैं चीजे हैं जिन से सीखे आप लोग जो इन
07:22सब एरियाज में जो रिंट्रड्यूस किया जा रहा है चीतों को वहां काम आ रहे हैं देखे सुरू में तो
07:27हमारे साथ सब के लिए चलेंज था कि किसी को आदत ही नहीं थी ऐसे में हमने अपने जो वेटनेरी
07:33डक्टर उनकी जूटी टीम लगई थी एक एक चीते के साथ में
07:38आठाट लोगों की टीम थी जो 24 घंटे उनको अबजर्व करती थी वो कहां जा रहा है क्या खा रहा
07:45है किस से किदर जा रहा है किस तरह से कहीं उसकी लोकेशन थोड़ी गरबड हुई तो प्रान सूख जाते
07:51थे कि वो किस हालत में है ऐसे करते करते धिरी दरी एक बच्चे क
08:07से जाधा की टीमों के अभ्यास हो गए इसी अधर पर हमने अपने बाकी लोगों की ट्रेनिंग करते करते यह
08:13अपने नए नए अब टाइगर अभेर इन्ने के साथ छोड़ने के या अलग से चीतों का घर बनाने का नेड़े
08:20गांधिसागर में किया है वो भी प्राकरतिक र�
08:37इसका नाम नीरा है जो नर है उसका नाम वियोम है और अच्छी बात यह रही का आपने देखी है
08:44कि वो इतने मस तो इतने हल्दी थे कि छोड़ते ही दोड़ पड़े एकदम से जो चीते के सवाव है
08:50इनको हम बाहरोड लाते तो ज्यादा टाइम लगता है तो थवा थकान हो
08:59चीतों को भी पता है कि इंडिया में हम वी आई पी है मध्यप्रिदेश की जो महमान नवाजी है उसका
09:06स्वाद वो भी चेकर है लेकिन बहुत वल्नेरिबल प्राणी होते हैं बहुत सेंसिटिव प्राणी होते हैं चीता और एक तो
09:12आप एक जगे से दूसरी जगे पर ला र
09:25अपने जो कहा बिल्कुल उसी तरह से है जैसे आज हमने जब इनको छोड़ा है तो आज हमने अनर्मादा को
09:30भी एक साथ नहीं छोड़ा है पहले वो इस छेतर से परचित कराएंगे तो एक छोटा बोमा है जिसके अंदर
09:35उनकी सिकार की प्रबंदन तो है लेकिन यहां तुर
09:53आज़त पढ़ती जाएगे और उनको खुले जंगल में लेकिन उनके साथ रहेगी पूरे समय जो चिंता करेगी उनके स्वास्त की
10:00भी खानपान की और बाकी प्रकार से भी उनको किस प्रकार का दूसरा खत्रा नहों इसकी चिंता करेंगे क्योंकि जो
10:07लोग देख रहे हैं क
10:09सबने अगर फॉलू किया हो तो सबको ध्यान होगा कि पहले चोटे बाड़े में उसके बाद आगे उसके उपर भी
10:16ऐसे आपने देखा कि जहां नेट लगी है नेट के पर यह बार्बेट वायर है बाद में करेंट है ताकि
10:23कोई उसको चलांग लगा के भी न जाए लेकिन ध
10:29करके वो भी यूजटू होते जाएंगे और सबसे अच्छी बात है कि वह भारत की आभवा से बिलकुल यूजटू है
10:35मतलब डॉक्टर यादव यहां से आगे भी अप बद्यप्रदेश के और एलाकों को भी आप लोग चिन्नित करके वहां भी
10:41विस्वाइब आपकी जयनकर
10:57करजी के नाम भॉपाल के पास में है इसकी विसे से अर्बन टाइगर वही पर है सहर से लगावा लगबग
11:0415 किलोमेटर के अंदर में टाइगर और कई बार तो कि जिस सड़क पे आप दिन में घूमरों रात में
11:09टाइगर गूंते है दुनिया में इकलौता रिजर्व है सो प
11:27घडियाल भी हमने उनका भी घडियाल की बहुत तरह सभी लुप तो प्राइग हो गए थे चंबल में तो घडियाल
11:33प्रोजेक्ट बहुत अच्छे चल रहा है मगर भी हमारी मान अर्वदा और कई बड़ी नदियों में गायव हो गए थे
11:38हमने मगर भी मान छोड़े हैं गि�
11:51कि पाकेस्तान प्रकान किसी जगे उतरा था तो कुछ श्रिकार युकारी के पकड़ गया था उख जब की युक्ति जुटि
11:58इससे मास चुड़वा है तो कजाकर minimizing क्केटान से कि आते क्यों आते आम ताल पर कजाकृस्तान से लंभी दूり
12:06के साथ तो सुद्य इनकिन अपने �
12:09आवास के सुतर रहने के संबन्द एक एकर के हर एक शत्र में हम उनका क्यूं आपने अपना
12:14मिशन बना रखा है देखिए मेरा मिशन तो हमारी सरकार के सब विभावों के साथ इसी प्रेकार से चलाने क्या
12:21उश्रकता है
12:22मुझे इस बात का प्रसंदता है कि जब हम अपने नागरिकों की चिंता करते हैं
12:26वनों की भी करना चाहिए वनी जीवों की भी करना चाहिए और वनी जीवों में जो विविदता है
12:46कि हर एक प्राणी अपनी अपनी जिन्दगी के आनंद ले रहा है
12:50और कहीं किसी को कोई इससे फरक नहीं पढ़ रहा है
12:53कि उसको कोई खत्रा नहीं है
12:55और ये एक तरह से परमात्मा की बहुत बड़ी मिसाल है
12:59और हम उसको मेंटेन करें ये हम सबसे
13:02इसे को जीव और जीनदों को भी कहते हैं और इसका आनंद भी क्योंकि इससे बड़ा कोई प्रोजेक्ट पूरी दुनिया
13:08में सफल नहीं हुआ है रिलोकेशन का ये समझते हुए इस चुनोती को उठाया गया था
13:15सोग ये पर गया था के सो का चुट लोग है। आज 해주 तरेकर हुआ ये सारे प्रबंधन के कारण
13:24से ही प्रकार से हमारे जिससे में ने बताया घ्री आल घ्रियιο और ग्रिया थे वर कषेशन
13:33कि घड़ियाल एक दिन में बड़े नी होते हैं तो घड़ियाल जहां अंडे देते हैं वहां हमारी टीम जाती है
13:40उनके अंडे आदे मा छोड़ती है आदे उठा के लेकर आती है आदे इसलिए मा रखते हैं कि ताकि वह
13:45हमेशा अदट डाले ने तो आना बंद कर दे जा और आ�
14:02दिन फरवरी में नदी में छोड़ते हैं तो ताकि उनकी आबादी बढ़े तो एक साइकल अलग अलग हर प्रकार से
14:08हरे तरह से गिदो का भी ऐसा ही था गिदो के लिए जो पुश्पालन में दूद में दवाईयां और दूसरे
14:14प्रकार की कटनाई से गिद बहुत सेंसेटि
14:30दुबारा प्रयास किया और आज हमको लगता है कि बहुत अच्छी स्थी महा पाई है तो क्या हम कह सकते
14:36हैं यह मद्यप्रदेश का विकास मॉडल है जिसमें जंगलों यह बात सही है कि देश के अंदर हमारे अपने आप
14:4333% से उपर फारेस्ट है और फारेस्ट भी नेचरल �
14:47है यहां अगर आपको पेड़ दिख रहा तो पेड़ को कोई काटेगा नहीं यह स्वभावी गुरूफ से सूख करके अपने
14:53आप ही गिरेगा इसी से वापस दूसरा पेड़ बनेगा यह जो एकोसिस्टम अंदर का बनावा है इसी को मेंटें करने
15:00में जो हम अरस्पतियों क
15:01दिख रहा दियान रखते हैं तो वन्नि प्राणियों का भी ध्यान रखने का आप शकता है इसलिए सभी प्रकार के
15:05थल जल चर वन्चर सभी की चिंता करें क्योंकि आम तोर पर तो यह कहा जाता है ने कि परियावरण
15:12और विकास साथ में नहीं चल सकते पर क्या एक ऐसे भव
15:29सब के सामने अपने सरवाई कर रही है यही हमारे लिए लेखनी है और यह उपलब दीगी प्रोजेक्ट चीता का
15:35अगला विस्तार अगर मैं आपसे समझना चाहूं आपके हिसाब से अब आगे किस दिशा में आप देख रहे हैं देखी
15:41यह हमारे राज्य का लगभग तीसरा
15:44उसका बसेरा आया है और एक तरह से चंबल चंबल के बाद महाकोशल का यह बेल्ट चालू हो गया एक
15:51मालवा का हो गया यह करीब करीब हमारा लगभग काफी हद तक जैसे दस ताइगर अभियरन्य हमारे हैं उसमें से
15:58हम लगभग तीन में पहुंच गए हैं तो तीन के बा�
16:12साथ मानोबस्तियों में जाने की आदत है पर उससे तो कॉनफ्लिक्ट होगा बिल्कुल नहीं होता चीता गए कभी किसी मनुस्य
16:18से उसने संगर्स ने किया है इसलिए सुरू-सुरू में ज़रू हम लेकर आया थी श्यवपूर के जंगल में तब
16:26ठुड़ा मां के लोग डरे
16:41अगर इसमें हमने दोनों तरह से तैयारी की है जो मवेशी है मवेशी कोई करमन हुआ है तो हमारी टीम
16:50तुरंट उसको मौज़ा देती है तो उसमें कोई कर्ष्ट नहीं है और वैसे तो आम तोर पर हिरन और बाकी
16:56जो इसके सिकार है वही करता है लेकिन कभी-कभी कोई करण
17:11बहुत धन्यवाद आपका बहुत आवार बहुत धन्यवाद आपका बहुत आवार इस बाचे लिए

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