00:00राची के जैप वन में मादुर्गा की अराधना का अंदाज सबसे अलग है यहां मा की भवपरतिमा नहीं बलकि कलस
00:07में देवी का सरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और जैसे ही कलस स्थापना होती है गोलखा जवानों की
00:14फैरिंग से पूरा परिसर बूज उपता है यह �
00:18मासक्ती के चर्णों में सैन सलामी देनी की परंपरा का हिस्सा है राची के ड्रोंडा इस्तित छार्खन सशस्त पुलिस बल
00:25यानि जैप वन में यह परंपरा आज की नहीं है बलकि करीब 146 साल पुरानी है वर्स 1880 से चली
00:33आरे परंपरा में गोर्खा जवान पूरे सैन, अन
00:48मादूरगा को सलामी देते हैं यह परंपरा उनके लिए सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं बलकि आस्ता सौरे और कर्तवे के प्रती
00:55समर्पन का प्रतीक है जैप वन के कमांडेंट सहराची के सैस्पी राकिये संजन ने बिदी विधान के साथ कलस स्थापना
01:02की और इसके
01:22दिनों में अलग लग तरह के प्रोग्राम होंगे और इसके लिए परंपरा है गुर्खा पटेलेंट के लोग हमेशा सबसे जो
01:31दुर्गम और सब्सक्रेटिक कर्डिटी है उसको निवाते वे आए हैं और इनकी माववानी पर काफी ज्यादा आस्ता है इनका जो
01:37वार्क रह
01:37है वो भी माववानी मावजर्काली से ही रिलेटेट है और इसलिए लोग काफी वक्तिवाओ के साथ उसको बनाते हैं और
01:42हम लोग सबीसमें शरी को नौरात्री के दौरान जैपवन परिसर में कई खास प्रस्में निभाई जाती हैं महा साथमी पर
01:51पारंपरिक फूल पाती क
01:53सोभायात्रा निकलती है जबकि महा नौमी पर नौ कन्याओं का पूजन और सस्त्र की पूजा की जाती है इन अनुस्ठानों
02:00के जरिये गोर्खा जवान अपनी संस्क्रितिक जिरासत को पीड़ी दर पीड़ी आगे बढ़ा रहे हैं
02:08आम लोग शुरुवात पुजा आज हुआ इस शुरुवात में पुजा हो गया अंदर में यहां पर धन्डवुत्त लुन किया यह
02:161880 से चल रहा है और
02:18सथिपिजा रोपन होगा सथिजा रोपन होगया अड्यों का सब नocyटे मह पूजावी में होगा पुजा करके आ povo कि आ
02:38यहां सब क्यों करके निधे कर लेके जा आतेयां से
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02:55We have made our own bodies, which we are making our own bodies.
03:03We have made our bodies in our bodies, so we are making our bodies.
03:12We are prepared for years and we are prepared for this day.
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04:02Thank you so much for joining us.