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Supreme Court on CJP Protest i CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी | Kapil Sibal ने क्या कहा ?

दिल्ली में CJP प्रोटेस्ट को लेकर हुए विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने पूरे शहर में लगाए गए बैरिकेड्स हटाने और इंटरनेट सेवा सामान्य रूप से बहाल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य समय सारणी के मुताबिक चलनी चाहिए और शहर में लोगों की आवाजाही पूरी तरह बहाल की जानी चाहिए...सुनवाई के साथ वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने हिरासत और धारा 163 (निषेधाज्ञा) लगाए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि पुलिस लोगों को ट्रेनों से उतारकर हिरासत में ले रही है। उन्होंने इंटरनेट सेवाओं के निलंबन पर भी सवाल उठाए और 'अनुराधा भसीन मामले' के पुराने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया..

The Supreme Court has taken a stern stance regarding the controversy surrounding the CJP protest in Delhi. The Court has directed the removal of barricades installed across the city and the restoration of normal internet services. It further ordered that metro services operate according to the regular schedule and that the movement of people within the city be fully restored. During the hearing, Senior Advocate Kapil Sibal challenged the detention orders and the imposition of Section 163 (prohibitory orders), stating that the police were detaining people after removing them from trains. He also questioned the suspension of internet services and cited the Supreme Court's earlier judgment in the 'Anuradha Bhasin case'.


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Transcript
00:00सुप्रीम कोट का बड़ा दखल
00:03दिल्ली से बैरिकेडिंग हटाने की निर्देश
00:07इंटरनेट और आम आवाचाही पर कोट सख्त
00:10दिल्ली में कौकरोज जनता पाटी के प्रदर्शन के दोरान
00:14मेट्रो ट्रेन सेवाएं बंद करने, इंटरनेट बाधित करने
00:17और लोगों को हिरासत में लेने से जुड़ी याचिकाओं पर
00:20रविवार को सुप्रीम कोट की स्पेशल बेंच ने सुनवाई की
00:24कोट ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामानी रूप से चलनी चाहिए
00:27इंटरनेट बाधित नहीं होना चाहिए
00:29और लोगों की आवाजाही नहीं रोकी जानी चाहिए
00:32याचिका करताओं ने आरोप लगाया कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोट ने केंदर को निर्देश दिया था
00:38कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक ना लगाई जाए
00:44इसके बावजूद शनिवार को कोट के आदेश का उलंगन हुआ
00:48इस पर कोट ने दिल्ली के अधिकारियों को नोटिस जारी कर मंगलवार तक जवाब मांगा
00:52कोट ने पूछा कि उसके आदेश की अवहेलना के लिए अधिकारियों के खिलाव अवमानना की कारवाई क्यों न की जाए
00:5910 अक्टूबर को राजधानी में प्रदर्शन रोकने के लिए सुरक्षा विवस्था कड़ी की गई
01:04कई मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किये गए
01:07कुछ रेल सेवाओं पर असर पड़ा और चुनिंदा इलाकों में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी लगाई गई
01:12प्रदर्शन कारियों और नेताओं को हिरासत में लिये जाने के मामले भी सामने आए
01:17अब 11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटना क्रम से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए
01:23आम लोगों की आवाजाही और जरूरी सेवाओं को सामान्य रखने पर जोर दिया है
01:27अधालत ने अनावश्चक बैरिकेडिंग हटाने और इंटरनेट सेवाओं को बंद नहीं रखने से जुड़े निर्देश दिये है
01:35मेट्रो और ट्रेने सामान्य रूप से चलें
01:37कानून विवस्था बिगड़ने पर ही जरूरी पाबंदियां लगाई जाए
01:42शहर में लोगों का आना जाना कानून और ट्राफिक नियमों के मुताबिक जारी रहे
01:48बैरिकेड लगाने के फैसले की कानून विवस्था और ट्राफिक की स्थिती को देखते हुए तुरंत समीक्षा की जाए
01:55इंटरनेट सेवाए बंद ना की जाए
01:57हालांकि आईटी एक्ट के तहट सरकार के अधिकार बने रहेंगे
02:02धारा 163 के प्रतिबंध वाले इलाके से बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्वे लोगों को हिरासत में ना लिया जाए
02:10तो सुप्रीम कोट एडवेकेट और रेकॉर्ड असोसीएशन स्कोरा ने हमने एक रिट पेडिशन फाइल करी थी आज
02:16जिस तरह से वकीलों के साथ दुर वेवार हुआ
02:20कल यहाँ कोट के आसपास जिस तरह से बैरिकेड लगाए गए
02:24धारा 163 और BNSS लगाया गया जिसकी सूचना हमें नहीं दी गई
02:29लोगों को काड़ियों से रोड से चेंबरों से उठा लिया गया
02:33यहाँ पे इंटरनेट जिस तरह से शटडाउन किया गया हमें बोला गया था कि यहाँ पे
02:38वर्चुल हीरिंग होगी लेकिन वर्चुल हीरिंग के जगह इन्होंने क्या किया कि विंटरनेट ही शटडाउन कर दिया तो ना वर्चुल
02:44हुई और जब वकील लोग कोट जा रहे थे उनको रास्तित उठा लिया गया
02:48और बोला कि यहाँ 163 है 163 की सुचना जैसे मैंने बताया ना बार को दी गई ना बेंचनिक बताया
02:54गया
02:54तो यह सब इस तरह का क्लैम डाउन सुप्रीम कोट के या और आसपा दिली आए कोट है और पतियाला
03:01आउस है राउसेवनू कोट है यह बहुत गलत था इसके बाबत हमने वकीलों के सुरक्षा के लिए परिशन डाली थी
03:07कोट में और उसमें हमें बहुत अच्छा ओर्डर मि
03:23ताकि धारा 163 लागू होने की जानकारी देने वाला बोर्ड भी हटाने का निर्देश दिया इस धारा के तहट पांच
03:30या उससे अधिक लोगों के कत्र होने पर प्रतिबंद लगाया जा सकता है बेंच ने कहा कि बोर्ड हटाया जाए
03:36ताकि नागरिकों और वकीलों को न्य
03:52निशे धाग्या लागू थी हलांकि सॉलिसिटर जनरल तुशार महता ने इन आरोपों का विरोध किया उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो
03:59सामाने रूप से चल रही थी लेकिन 303 में से 45 स्टेशनों के कुछ प्रवेश और एंट्री और एक्जिट पर
04:06पाबंदी लगाई ग�
04:08कि शनिवार राद 10 बजे तक सभी मेट्रो स्टेशनों के गेट खोल दिये गए थे और इंटरनेट सेवा भी बहाल
04:14कर दी गए थी
04:15सुनवाई के दौरान वरिष्ट वकील कपिल सिब्बल ने हिरासत और धारा 163 निशेधाग्या लगाय जाने के आदेश को चुनाती देते
04:22हुए कहा कि पुलिस लोगों को ट्रेनों से उतार कर हिरासत में ले रही है
04:26उन्होंने इंटरनेट सेवाओं के निलंबन पर भी सवाल उठाए और अनुराधा भसीन मामले के पुराने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का
04:33हवाला दिया
04:42कुछ भी करेंगे रही है
05:04इतना ही कहेंगे जो सुप्रीम कोट ने आज ओर्डर दिया है उससे उससे हम आश्वस्त हैं हम सुप्रीम को धन्यवाद
05:12करते हैं कि लोगों की जो समस्यां हैं कोट में उनका चैन किया और लोगों को विश्वास हो गया है
05:25से सुप्रीम कोट ही ऐसी कोट है जहां लोगों को र
05:34दर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अब दिल्ली में आवा जाही और सेवाओं की स्थिती
05:39पर नजर रहेगी, अदालत में आगे होने वाली सुनवाई और प्रशासन की कारवाई इस मामले में एहम होगी। फिलहाल के
05:46लिए बस इतना ही
05:47बाकी अपडेट के लिए बने रहिए One India Hindi के साथ।

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