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  • 14 minutes ago
रजिया सुल्तान का इतिहास केवल एक शासक की कहानी नहीं, बल्कि महिला सशक्तीकरण, साहस और दूरदर्शिता की एक मिसाल हैं. संवाददाता शशिकला सिंह की रिपोर्ट

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Transcript
00:07पुरानी दिल्ली की तंगलियों और बासारों के बीच मौजूद है एक ऐसी एतिहासिक जगहा जो कभी दिल्ली सल्तनत की सत्ता
00:16और सियासत की गवाह रही।
00:30उनकी कहानी साहस और सत्ता संग हर्ष की है लेकिन उनके मगबरे की मौजूदा हालत स्थानिय लोगों के लिए चिंदा
00:37का विशय बनी हुई है।
01:14पुरानी दिल्ली की भीरभार, दुकानों और बलखाती गलियों के बीच छिपा है रजिया सुल्तान का मगबरा।
01:21बाहर लगे भारतिय पुरा तत्व सर्वेक्षन एसाई के अभिलेख के मुताबिक रजिया अपने पिता सुल्तान इल्तुतमिश की उत्तरा धिकारी बनी।
01:32उनका जन्म 1205 इसवी में बदायू में हुआ था।
01:361236 से 1240 तक के छोटे शासनकाल में उन्हें दरबारी अमीरों के विरोध और राजनेतिक बगावतों का सामना करना पड़ा।
02:1114 अक्टूबर 1240 को कैथल के पास हुए संघर्ष में रजिया और
02:17उनके पिता अल्तूनिया की मौत हुई।
02:20कुछ एतिहासिक मानिताओं के अनुसार उनके अवशेश दिली लाकर बुलबुली खाना में दफनाए गए।
02:27उस समय ये इलाका जंगल और पहाडियों से घिरा था।
02:31आज चारो और पुरानी दिली की घनिया बादी है।
02:35लेकिन मगबरे का परिसर सदियों पुराने अतीत की याद दिलाता है।
02:40अंदर दो साधी कबरे हैं।
02:42स्थानिया जानकारी के मुताबिक इन में एक रजिया सुल्तान और दूसरी उनकी बड़ी बहन शाजिया बेगम की है।
02:49परिसर A.S.I. के संद्रक्षर में है और यहाँ इबादत भी की जाती है।
03:25इस साल 14 अक्टूबर को रजिया सुल्तान की पुन्यत्तिती के 786 वर्ष पूरे होने का उलेख किया जा रहा है।
03:34हाला कि इसलाम में 786 को विशेश धार्मिक महत्व देनी की परंपरा को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं।
03:41स्थानिय लोगों के मताबिक देश-विदेश से इतिहास में रुची रखने वाले लोग इस समारक को देखने आते हैं।
04:05स्थानिय नागरिकों का कहना है कि वो अपनी और से साफ सफाई और देखरेख में मदद करते हैं।
04:11लेकिन उनके मताबिक समारक के महत्व के अनुरूप, सुविधाएं और जानकारी यहां प्राप्त नहीं है।
04:18वो बहतर रख रखाव, साफ सफाई और आसपास के सौंदर्य करण की मांग करते हैं।
04:25रजिया सुल्तान का इतिहास सिर्फ एक शासक की कहानी नहीं, बलकि साहस और नित्रित्व की मिसाल है।
04:32तेईसवी सदी में उन्होंने सत्ता समहाली, सेना का नित्रित्व किया और राजनितिक विरोध के बीच शासन किया।
04:41आज उनका मगबरा हमें उस विरासत की याद दिलाता है और ये भी कि एतिहासिक इमारतें केवल पत्थर और दिवारी
04:49नहीं, बलकि हमारी साजह पहचान का हिस्सा है।
04:53सवाल यही है कि क्या इस पहचान को संजोनी के लिए जरूरी ध्यान और संसाधन मिल रहे हैं।
05:00ETV भारत के लिए संबादाता शशीकला नहीं दिल्ली।

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