सवाईमाधोपुर. जिले के ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल की फुटकर बिक्री का कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है। टोडरा उपतहसील क्षेत्र में किराना, परचूनी और पंचर की दुकानों पर बोतलों व कैनों में पेट्रोल बेचा जा रहा है। दुकानों के बाहर पेट्रोल से भरी कैनें सजाकर रखी जाती हैं और ग्राहक के आते ही बोतल से लेकर सीधे वाहन की टंकी तक पेट्रोल भर दिया जाता है। ज्वलनशील पदार्थ की इस तरह खुलेआम बिक्री और भंडारण से आगजनी का खतरा बना है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई नजर नहीं आने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
टोडरा, फलोदी गांव, रवांजना डूंगर और खानपुर सहित कई स्थानों पर छोटी दुकानों पर पेट्रोल उपलब्ध है। कहीं बोतलें दुकान के बाहर रखी हैं तो कहीं कैनें ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सामने सजा दी जाती हैं। हालात यह हैं कि रोजमर्रा के सामान की दुकानों पर भी पेट्रोल आसानी से मिल रहा है। सवाल है कि बिना स्पष्ट अनुमति और सुरक्षा इंतजामों के इस तरह पेट्रोल की बिक्री कैसे चल रही है? लोडिंग वाहनों में गांवों तक पहुंच रही सप्लाई सवाईमाधोपुर-कोटा मेगा हाईवे के आसपास स्थित पेट्रोल पंपों से बड़ी कैनों में पेट्रोल लाकर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया जाता है। 50 से 60 लीटर की कैनों को छोटे लोडिंग वाहन में भरकर रवांजना डूंगर थाने के सामने से टोडरा, फलोदी गांव, खानपुर और आसपास के गांवों तक ले जाया जाता है। इसके बाद दुकानदार पेट्रोल को छोटी कैनों और बोतलों में भरकर बेचते हैं। ऐसे में जांच का विषय है कि पेट्रोल कहां से खरीदा जा रहा है, उसे किस अनुमति से परिवहन किया जा रहा है और इसकी बिक्री व भंडारण के लिए आवश्यक नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
114 रुपए का पेट्रोल 130 रुपए लीटर तक बेचने का दावा
फुटकर बिक्री में मुनाफे का खेल भी सामने आया है। दुकानों पर पेट्रोल करीब 130 रुपए प्रति लीटर तक बेचे जाने की जानकारी मिली है। स्थानीय स्तर पर प्रति लीटर 15 से 20 रुपए तक अतिरिक्त वसूली के आरोप हैं। हालांकि, खरीद मूल्य और वास्तविक मुनाफे की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अधिक कीमत वसूलने के साथ पेट्रोल की गुणवत्ता और सही माप की गारंटी भी सवालों के घेरे में है। न कोई स्पष्ट बिल, न गुणवत्ता की जांच और न ही सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था की जानकारी। पेट्रोल पंप नहीं, फिर दुकानों पर कहां से आ रहा पेट्रोल? टोडरा उपतहसील क्षेत्र के कई कस्बों में पेट्रोल पंप नहीं होने के बावजूद दुकानों पर पेट्रोल की उपलब्धता ने आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बड़ी मात्रा में पेट्रोल लाकर गांवों में बेचा जा रहा है, तो उसकी खरीद, परिवहन और भंडारण के नियमों की जांच क्यों नहीं हो रही? क्या संबंधित विभागों को इस कारोबार की जानकारी नहीं है या निगरानी के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही?
छोटी लापरवाही, बड़े हादसे की आशंका
पेट्रोल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ है। इसे सामान्य दुकानों पर खुले में रखना और बोतलों-कैनों में बेचना आगजनी का गंभीर जोखिम पैदा करता है। बिजली की चिंगारी, जलती बीड़ी-सिगरेट या छोटी-सी लापरवाही भी आसपास की दुकानों और घरों को खतरे में डाल सकती है। इसकी चपेट में दुकानदार, ग्राहक, राहगीर और आसपास रहने वाले परिवार आ सकते हैं। इसके बावजूद यदि दुकानों पर पेट्रोल की बिक्री जारी है, तो यह केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। किसी हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते जांच और रोकथाम जरूरी है। ....................
इनका कहना है... ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल का अवैध परिवहन, दुकानों पर अवैध रूप से बेचना गलत है। अवैध रूप से बेच रहे दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।