00:03दुर्गा पूजा के दौरान जब आप मादुर्गा की प्रतिमा देखते हैं तो क्या कभी आपकी नजर उनके घने लंबे और
00:11लहराते काले बालों पर पड़ी है जादा तर लोग सोचते हैं कि ये बाल प्लास्टिक या किसी रेडिमेट धागे से
00:19बनते हैं
00:20लेकिन कि आप जानते हैं कि मादुर्गा की इन खुबसूरत केशों को बनाने के पीछे एक अनोखी भायचारे से भरी
00:28कहानी छिपी है
00:29चलिए बताते हैं इस वीडियो में मादुर्गा के घने लंबे और काले बाल कहां से बनते हैं कौन बनाता है
00:37कौलकाता के करीब 50 किलोमेटर दूर हावडा जिले के बरबतपुर गाओं में मादुर्गा के बाल बनाने के परंपरा कई पीडियों
00:46से चलिया रही है
00:47और सबसे खास बात ये है कि इस गाओं में इन खुबसूरत बालों को तराशने वाले कारिकर मुस्लिम समुदाय से
00:55है
00:55गाओं के 37 साल के शेक नवाब यहां विग बनाने का सबसे बड़ा काम समहलते हैं
01:02वो बताते हैं कि उन्होंने ये हुनर अपने दादाजी से सीखा था
01:06चलिए बताते हैं अखिर ये बाल बंदे कैसे हैं तो सबसे पहले कच्चा पटसर यानि कि जूट खरीदा जाता है
01:13बड़े बड़े बर्तनों में कोईले की आजपर काला रंग उबाला जाता है और उसमें पटसन को रंगा जाता है यानि
01:22कि जूट खोर रंगा जाता है फिर इसे कई दिनों तक सुखाने के लिए छोड़ दिया जाता है
01:28इसके बाद गाउं की महिलाएं, सिलाई, मशीन से इन रंगे हुए धागों को जोड़ कर विख तैयार करती है
01:36ये विख सिर्फ कॉलकाता के मशूर कुमार टोली ही नहीं बलकि बिहार, उत्रप्रदेश, नैपाल और बांगला देश तक भेजी जाती
01:45है
01:45लेकिन भाईचारे और कला की ये मिसाल पेश करने वाले कारिगर आज भारी आरतिक तंगे और चुनोल्टियों से जूच रहे
01:52हैं
01:53दो-तिन साल पहले जो पट्सन 90 रुपे में मिलता था, अब उसकी कीमत बढ़कर 140 रुपे से 1500 रुपे
02:00हो चुकी है
02:00बे मौसम वारिश और खराम मौनसून के कारण पट्सन को सुखाना बहुत मुश्किल हो जाता है
02:06लेकिन ये मुस्लिम कारिगर दुरगा पूचा के लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर देता
02:12और ये एक भाईचारे की जीती जाती मिसाल है जो सदियो से चली आ रही है
02:18पैसे इस पर आपका क्या कहना है हमें कमेंट बॉक्स में जबरू बताएं
02:22फिलाल हमारे इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करने ना भूले
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