00:05ुत्तरप्रदेश की कनोच की संकरी गलियों से गुजरिये तो कहीं गुलाब की महक मिलेगी, कहीं चमेली और बेला की, तो
00:12कहीं मिट्टी से तयार होने वाले अत्तर की सोंधी खुश्बू.
00:16यहां इत्र बनाना महस कारुबार नहीं, पीडियों से चली आ रही एक कला है, तांबे की देग में फूलों का
00:25आसवर, बास की नली से भाब का गुजरना, भबके में उतरती खुश्बू, और फिर लंबे समय तक इत्र को परिपक्व
00:34होने देना.
00:35असी नीटर पहले पानी डालेंगे, इसके बाद 40 किलो फूल सौल के बज़न करके इसको डाल के और बंद करके
00:43यह बाकाइदा पूरा जाम कर देंगे, ताकि यह लीक ना होके, अगर यह लीक कर गया, तो फिर इसमे खुश्बू
00:52नहीं जा पाई गया, खुश्बू तो यही
01:09खुश्बू आएगे, खुश्बू आएगे
01:34अब तक क्यों अधूरा है, इत्र नगरी को परेटन के नक्षे पर चमकाने के लिए साल 2016 में इत्र संग्राले
01:44की नीव रखी गई थी, उमीद जागी कि अब परेटक सिर्फ इत्र खरीद कर नहीं लोटेंगे, बल्कि इसके बनने की
01:53पूरी प्रक्रिया और सदियों पुरान
01:55इतिहास को भी करीब से जानेंगे, शुरुआत में करीब 25 करोड रुपे की लागत का प्रस्ताफ था, लेकिन जमीन और
02:05परियोजना से जुड़े बदलावों ने योजना की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया, रिपोर्ट की मताबिक आगे चल कर बजट और
02:13निर्मान से जु
02:25इत्र की दुकानों, उत्पादन इकाईयों और प्रसिक्षण केंद्र जैसी सुविधाओं की योजना है, लेकिन कारोबारियों के मताबिक योजनाओं को हकीकत
02:37बनाने के लिए बजट और निर्मान पर ठोस कारवाई जरूरी है, कन्नौज में इत्र का कारोबार सैक्डों �
02:45इकाईयों और हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ा है, फूलों से खुश्बू निकालने से लेकर इत्र तयार करने, पैकिंग और
02:55बाजार तक पहुचाने में कई हाथों का हुनर शामिल है, लेकिन इस पारंपरिक उद्ध्योक के सामने आधुनिक सुविधाओं की
03:03कमी और उत्पादन से जुड़ी चुनोतियां भी है, कुछ कारोबारी इंधन की उपलब्धता और बहतर बुनियादी धाचे की जरूरत पर
03:12जोर देते हैं, कन्नौज की पहचान को परेटन से जोड़ने की कोशिशे हो रही है, लेकिन इस दिशा में कारोबारियों
03:20प्रशा
03:33और व्यक्ती सिर्फ इत्र की शीशी ही नहीं, बलकि इस विरासत की कहानी भी अपने साथ लेकर जाए।
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