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Durga Puja 2026: देवी भागवत पुराण में कथा है कि रंभ नामक एक असुर था जिसने अग्निदेव की तपस्या से एक पुत्र को प्राप्त किया था जो एक महिषी यानी भैंस से उत्पन्न हुआ था इसलिए वह महिषासुर कहलाया। यह असुर वरदान के कारण जब चाहे मनुष्य और भैंस का रूप ले सकता था। ब्रह्माजी की तपस्या करके इसने वरदान पा लिया था कि कोई स्त्री ही उसका अंत कर सकती है। इसलिए यह देवताओं के लिए अजेय था और शक्ति के मद में आकर इसने देवलोक पर अधिकार कर लिया। महिषासुर के शासन में देवता और मनुष्य भयभीत रहने लगे। ऐसे में सभी देवी देवताओं ने अपने तेज को मिलाकर एक तेजोमय शक्ति को प्रकट किया जो स्त्री रूप में अवतरित हुई। यही देवी मां दुर्गा कहलायीं। सभी देवी देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र से देवी को सुसज्जित किया।Durga Puja 2026: Maa Durga Ke Sath Mahishasur Ki Puja Kyu Hoti Hai,Bhagvad Puran Ki Katha..

The Devi Bhagavata Purana tells the story of a demon named Rambha who, through his penance to Agnidev, was blessed with a son born from a buffalo. He was thus known as Mahishasura. This demon was blessed with the ability to transform into both a human and a buffalo at will. Through his penance to Brahma, he also received the boon that only a woman could destroy him. Therefore, he was invincible to the gods, and intoxicated with power, he conquered the heavens. Under Mahishasura's rule, gods and humans alike lived in fear. In this situation, all the gods and goddesses combined their energies to manifest a radiant power, which incarnated in female form. This goddess became known as Mother Durga. All the gods and goddesses equipped the goddess with their weapons.

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Transcript
00:06नवरात्री के नौदेनों में आपने देखा होगा कि जहां भी मादुर्गा की पूजा होती है वह माता की मूर्ती के
00:12साथ उस परम शक्तिशाली असुर महिशासुर की भी प्रतिमा माता के साथ ही होती है
00:18इस मूर्ती में माता त्रशूल से महिशासुर का वद करती है तस्वीरों में भी माता के साथ महिशासुर को ही
00:25दर्शाय जाता है लेकिन जब मा ने इतने सारे असुरों का वद किया है तो फिर आखिर महिशासुर के साथ
00:33ही उनकी पूजा क्यों की जाती है दरसल इसके पीछे म
00:37आता काक करुणा में हिर्द है जो शत्रों पर भी दया भाव रखता है। देवी भागवत पुराण में कथा है
00:43कि रंभ नामक एक असुर था जिसने अगनी देव की तपस्या से एक पुत्र को प्राप्त किया। जो महीशी यानी
00:50भैस से उत्पन्न हुई इसले वो महीशा सुर
00:53कहलाया। ये असुर वर्दान के कारण जब चाहे मनुष्य और भैस का रूप ले लिता। ब्रह्माजी की तपस्या करके इसने
01:01वर्दान पाया कि कोई भी पुरुष, देवता या फर असुर इसका अंद ना कर सके। ब्रह्माजी के कहने पर कि
01:09तुमने स्त्री का नाम क्यों
01:11में लिया। तो उसने कहा कि इस्त्री इतनी शशक्त है ही नहीं कि वो मेरा अंद कर सके। तो ऐसे
01:17में इनसे भय कैसा। इसके बाद महिशासुर के शासन में देवता और मनुष भैभीत रहने लगे। सभी देवी देवताओं ने
01:25अपने तेज को मिला कर एक तेजो में शक्त
01:27को प्रकट किया, जो स्त्री रूप में अवतरित हुई। यही देवी मा दुर्गा कहलाए। सभी देवी देवताओं ने अपने अश्टर
01:35सच्तर से देवी को सुसज्जचित किया। इस देवी ने महिशासुर को युद्ध के लिए ललकारा। देवी और महिशासुर में �
01:429
01:42दिनों तक महा युद्ध हुआ, महिशा सुर को अपने अंत समय में माता दुर्गा की शक्ति का हैसास हुआ, और
01:49उस असुर ने देवी से प्राठ्णा की, हे माता, आपके हातों मेरा वद हो और मुझे मुझे मुक्ती मिले, मैं
01:56आपके शरणा गत रहू, मेरे उध्धार का आ�
02:09प्राक्त हो जाएगा, और मेरे साथ पुझ्यवान रहोगे, माता की इसी वर्दान के कारण देवी भागवत पुरान में बताया गया,
02:17कि माता के साथ महिशा सुर का वद करते हुए, माता की मूर्ती बना कर, देवी की नौ दिनों तक
02:24अगर आप पूजा करें, तो भक्तों क
02:26भोग और मोक्ष की प्राक्ती जरूर होगे.

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