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00:03वर्स पुरानी परंपरा है जो यह शहर निभा रहा है बंगाल से रेल की पड़्रियों के सहरी परंपरा उस समय
00:10पहुंची जब इस्ट इंडिया कंपनी डेली टु हावडा ट्रेक बिचा रही थी और जब बंगाल से यहां रेलवे कर भी
00:16यहां पहुंचे तो उन्होंने बं�
00:30पुरानी परंपरा को सहर भर में सजाया जाने लगा श्री हनुमान मंदित दुर्गा पूजा महुतसव कमेटी द्वारा 28 वर्स पूर्ख
00:39टूंडला चोहराय पर हनुमान जी के मंदिर के पास छोटी सी दुर्गा पूजा सजाई जाती थी हमारी कमेटी के संसापक
00:45सदस्य �
00:45खड़े हुए हैं इनके सानेति में ये दुर्गा पूजा सजाईगी और उसके बाद 28 में वर्स में मां का दिप्प्य
00:53और भप्य रूप
00:54आप देख सकते हैं कि कितना बड़ा पांडाल है और करीब देड़ से दो लाग स्रिद्धालू तीन दिन के अंदर
01:00दर्शन करते हैं तूंडला में पिछले सालों में जब हम जाते हैं तो 40-45 जुर्गा पूजा हुआ करती थी
01:09लेकिन इस समय करीब 12-15 पांडाल हैं जिसमें
01:12नाच घर अनर इंटर कॉलेज विद्या समवर्दनी और वीरी सिंग यह में पांडाल है पीरी सिंग का पांडाल जो है
01:20ठागुर वीरी सिंग प्रांगर यह सबसे भब्य पांडाल होता है और सबसे बड़ी दुर्गा पूजा होती है शेहर की
01:41यह दुर्गा पूजा पूजा पूर्व यहां पर दुर्गा पूजा महस्व का आयोजन किया गया जो की निरंतर चलता चला आ
01:47रहा है और उन्होंने एक आयोजन किया था आज कैई
01:50की गुना मतरब दर्जनों कारीकरम इस प्रूंडा में अउजद होते हैं यह हमारा कारीकरम भैसे तो 60-65 साल से
01:58और कमेडियाँ चेंज होती रहती है हम खुद 12 साल से यसे कारीकरम को यहां उजद कर रहे है अभी
02:04सहर में 15 जागे यह कारीकरम आई उजद हो रहा है
02:07अब जोदी और कम लोग आथे हैं हम लोग 15 साल से आ रहे हैं सदस्य हैं और लगा टार
02:13आ रहे हैं और बड़ी भव्य इसका का आपी देखी रहें घर्व तामारों के टाइप का यह हो रहा है
02:20बहुती भव्य तरीके से सभी मूर्तिय यहीं बनती हैं बहार से टैंट्वेंट स�
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