00:00त्योहारों के बीच ये समय वो भी आता है जब हर वर्ष हम रावण को रावन दहन करते हैं, पुतला
00:05फूपते हैं और हर बार चरचा इस बात को लेकर होती है कि भीतर के रावन को मारो
00:10ये हर वर्ष बार-बार उस रावण को जलाते हुए आपको लग रहा है समाज को अपने अंदर का रावण
00:17याद रहा है
00:18एक बार आदमी निर्वान पद पाले कि मर गया है चलो वही शब्दी उस करे
00:27तो फुरी उसका अगनी संस्कार मानस में भी है
00:31हम प्रतिवर्ष रावण का अगनी संसकार करके पुना-पुना रावण को प्रगट कर रहे है
00:38राम ने उसको पुरा कर दिया था
00:40रावणी सब्यता समाप्त कर दी थी
00:42आसूरी वृत्ती को खत्म कर दी थी
00:45कि सिन किसी कारण वाश मृत्ती के कारण
00:48राम का जैजैकार हू, रामराजय का आगमन के कारण ये बाधा था
00:52इन सब की बात, महनशिक दोर से
00:55हम उसको पर्व के रूप में मनाते रहें हैं
01:02लेकिन ये सब के अपनी बाकि
01:05राम किसी को जलाते दे
01:10तो हमें इस पर्व के समय क्या याद रखना चाहिए?
01:13मतलब.
01:14भाव जय कि हमारे अंतरे़न नट्रे रहो कि हमारे बीतर का मुख मिटे हैं नम्हा ही नट्र का रावनत्व का
01:20नाशुज।
01:20यह थीक है परवय सब मनाते है जैजे कार गरते है dubh
01:24जो सब को बहा है लेकिन तुलसिदात जी ने तो कहा ७ाई कि मुख ही रावन है
01:43दशानन का मतलब है दस प्रकार की बुद्धी, दस प्रकार की वानि, कभी ये बोलेगा, कभी ये बोलेगा, कभी ये
01:54सोचेगा, कभी, ये जो दस प्रकार की वृत्तियों से सनलग नरावन है, वो हुमर भीतर बैठा है,
02:03तो यह परव को इस रूप में भी हम देखना चाहिए कि वू मरे, वू मरे, पकि राम किसी को
02:11मारता नहीं, राम किसी को जलाता नहीं, राम तरन तारन है, विश्व को तारने के लिए आया
02:20आपको समवाद की बात आपने की, समवाद की एहमियत की बात की आपने, पर अगर उसी समवाद में कुछ अपशब्द
02:29निकले और नई पीड़ी के हुटों से निकले तो मन दुखता है, आपको लगता है ये कैसे परिवर्टेत होगा?
02:36इसलिए मैंने शब्द का कि जब समवाद आदमे को जो चाहता है वो नहीं करने देगा तो विवाद करेंगे, विवाद
02:43नहीं तुर्ण दुरुवाद पर आजाएंगे, फिर अपवाद, फिर कुछ भी बोल सकते हैं, ये भारत की भाषा नहीं, बरत भारती
02:53है, तुलसिदा
03:04गोल दिया, तो ये तो कहीं भी हो, किसी भी रूप में, मुझे इसमें जाना नहीं, लेकिन गाली गलोज करना,
03:12चिला चिला करके बोलना, इस सहस्ता में है, पर पूरी पीडी तो ऐसी नहीं, हम देख रहे हैं कि हमारी
03:22नहीं पीडी जो है, बड़ी संक्या में, आपकी कथा�
03:34सब निकलते हैं वहाँ पर, तो क्या जो शोर करके या तेज बोलता है, वो ज्यादा दिखता है, लगता है
03:42कि सब कहीं ऐसे हूँ, नहीं, ऐसा जो बोले, किसी कारणवाशी ये बोलने के लिए बाद्य हुए हो खबर नहीं,
03:51लेकिन जिसके लिए बोला जाए, हम सामने से जा
04:04कि तीन-तीन पीडियों का वैर होता है, लेकिन दीपावली के बाद नूतन वर्ष में तीन-तीन पीडियों के, एक
04:11दूसरे के हत्या, दो-दो वत्या की हो, लेकिन नूतन वर्ष में जाकर राम-राम करेंगे, ये राम-राम के
04:19थ्रू जो समवाद का सेतु बनता है, तो फिर आ
04:34लेकिन मुझे आपके बोलने में आपके आखों की उस चमक में जब राम का नाम आता है कोई परिवर्तन नहीं
04:40दिखता है
04:41भागवत में लिखा है कि गिरान और वाईरग्य बूटे हो सकते हैं भक्ति कभी बूटी नहीं हो सकते हैं
04:49निरंतर युवान रहती है निरंतर जो युद्ध चल रहे हैं संपूर्ण दुनिया में वो आपकी ओर से जो लोग प्रभावित
05:01होते हैं
05:01क्योंकि नागरिक तो हर तरफ के मारे जाते हैं उसको लेकर सहायता हम देखते हैं
05:08पर मन आपका कितना व्यथित हो रहा है कि कहीं पर शांती आने रही है हमारे देश की तरफ से
05:13भी प्रधान मंत्री की तरफ से भी कहा गया है
05:15और हर बार वो इस बात की बात करते हैं कि ये शांती का समय है युद्ध का समय नहीं
05:20है
05:22आपको लगता है यह सब समाप्त होगा होगा ही होगा ही युद्ध नाशवन्त होता है समय समय पर होता है
05:33आधिकाल से हम देख रहे हैं लेकिन युद्ध कभी शास्वत नहीं होता नाशवन्त है दो साल पांच साल चलो जो
05:43भी हो और बुद्ध शास्वत होते है वो सनातन होते
05:49तो दुनिया को कैसे भी शांती के और जाना पड़ेगा, विश्राम के और जाना पड़ेगा, ठक जाएंगे सब, श्रमीत हो
05:58जाएंगे, कब तक करेंगे?
05:59मैंने तो अपनी होर से दो तिन बार बहुत जाहिर किया है, कि मुझे जहां जहां युद्ध चल रहा है,
06:07मुझे यदि इजाज़त दें, तो मैं बॉर्डर पर जाकर कथा करूँ, यह मेरी आज भी मांग है, कि मुझे बेजो
06:16युक्रेन और रस्या के बॉर्डर पर, मुझे ब
06:29कारगल के समय, हमारे पुर्व नाइव प्रधान मंतरी, इसको मैंने विनाई किया था कारगल के समय, कि मुझे युद्ध शिबीर
06:38में पेजो, मैं केवल पंडालों में कथा गाऊं, रामधुन कराऊं, मेरा मिशन इतना नहीं है, मुझे कारगल पेजो, आर्मी की
06:49छाउणी म
06:50में मुझे बैठो, मैं मानस का पार्ट करूँ, मैं शस्त्र तो नहीं ले सकता, शास्त्र तो लेकर जा सकता हूं,
06:58और दुनिया का इधिया से शस्त्रों ने जो काम ने किया, वो शास्त्रों ने काम किया है।
07:20लेकर चपछा करते हैं कि हम बांगलदेश से प्रीणा लेकर वैसी ही तक्ता पलट करें।
07:25ये भारत में इस स्थीज और भारत में कभी ऐसा देखा नहीं गया।
07:29भारत को किसी से भी प्रीणा लेनी की जरूरות मेरेकर जरूरत ने।
07:36रूशियों से प्रिड़ा ले जिन मैंने कथा में भी कहा कि वो ये देश है जहां पहले सादू का मत
07:45लिया जाता था
07:47फिर राजमत लिया जाता था फिर लोक मत लिया जाता था फिर आखिर में वेद मत लिया जाता था
07:52लोक मत का भारत में कभी इंकार नहीं किया
07:55राज नीती को भी कभी आलोचना नहीं किया
07:58राज मत भी अपना एक पक्षा है
08:00जैसे लोक शाही के चार पिलर होते हैं हम जानते हैं
08:04वैसे रामराज्य के लिए भी ये चार मत
08:07सादू मत जनता का मत राज का मत और वेद मत तो यह करना चाहिए ऐसे समय में जब पुरी
08:20दुनिया में एक तरीके से उथल पुथल चल रही है मैं आखिर में आप से जानना चाहती हूं कि आपकी
08:25स्वास्तिक यात्रा जो चल रही है उसका सबसे बड़ा उदेश है और सबसे ब
08:37जब सेतु बना राम की लिला में तो मैं ऐसा मानता हूं कि लिखा नहीं है तो मेरा ऐसी आत्म
08:49प्रतिती है कि सबसे पहला शिला अनुमान जी ने रख लेकिन सबसे पहली शिला
08:59अनुमान जी ने डाले ची श्री गणेश वाता जोडने का
09:05सेतु बंद का
09:08तो आज के समय में
09:11बच्चा हो, यूथ हो, बूड़ा हो, कोई भी हो
09:15क्योंकि मुझे तो मानस ने बता है कि बाल कांड देखो
09:18तो बच्चों के लिए है, अयुद्या कांड लो यूथ के लिए है
09:23उत्तर कांड लो बुजर्गों के लिए है
09:26तो ये तीन रूप में जैसे शंकराचारी भगवान ने प्रस्थान प्रही कही
09:32वैसे बच्पन से जोबन, जोबन से बुड़ा पार
09:37इनको जोडने की प्रक्रिया मानस की है
09:41और इसमें पहली शीला हनुमान में रखती थी
09:44तो आजका बच्चा हो, बजर्ग हो, खासकर करके
09:49यूथ पूरी दुनिया में आज है
09:51ज़्यादा से ज़्याज किसी भी प्रकार से जो हो रहा है
09:54दुनिया में इसमें नजाओं लेकिन मनोजवं मारुत तुलिवेगं जितेंद्रियं बुद्धिमताम वरिष्णम वातात्मजम वानर यूथ मुख्यं
10:07यूथ का मुख्य कौन है हनुमान जी है चारो यूग परताब तुमारा इसका परताब चारो यूग में कि वित्यताब में
10:15नहीं कल यूग में नहीं चारो यूग में जिसका तो आज के यूथ का बच्चों का के उसका नायक हनुमान
10:24और हनुमान की अगवानी में यह हम करेंग
10:28तो तीन बस्तू मिलेगी
10:30बल, बुद्धी और विद्या
10:32राष्ट व्यक्ति को
10:34समाज को, परिवार को बल की जरुरत है
10:36होना ही चाहिए
10:38राष्ट बलबान होना चाहिए
10:39निर्बल नहीं होना चाहिए
10:42लेकिन केबल बल हो और बुद्धी नो हो
10:44तो बल विग्धन करेगा, इंसा करेगा, विभाजीत कर देगे।
10:50बहुत बहुत धन्यवाद वापोस सबाचीत करेगे।
10:53सब के लिए आपके पूरी टीम के लिए दशेरा के बदाई, इपावली के लिए आपके सभी दर्शकों के लिए नई
11:02साल की बहुत बहुत आओ, हम नई साल में नेक और एक बड़े, हमारा विकास विश्राम तक हमें ले चले,
11:12सरवे भवन्त सुखिना, सरवे संत निरामयाह, सरवे भद्रान पस्चंतु, मा क्वस्चित दुख भाग भवे।