00:00जhansi में मिनी बंगाल का एहसास 1861 से चली आ रही दुर्गापूजा की अनूठी परंपरा
00:05उत्तरप्रदेश के जhansi में बांधव समिती वर्ष 1861 से चली आ रही परंपरा के तहत
00:11166 पारंपरिक बंगाली दुर्गापूजा का आयोजन कर रही है
00:15शष्ठी से दश्मी तक चलने वाले इस उत्सम में चंडी पाठ, आगमनी गान और धुची नृत्य के जरिये माध दुर्गा
00:21की आराधना की जा रही है।
00:23इसे देखने के लिए दूर दराज से श्रधालू पहुँच रहे हैं।
00:26समिती से जुड़े अरिंदम घोश के मुताबिक, पूजा की शुरुवात शष्ठी को सुभ़ 5 बजे चंडी पाठ और आगमनी गान
00:32से होती है।
00:32सब्तमी, अश्टमी और नव्मी को विधी विधान से पूजन किया जाता है।
00:36जबकि दश्मी को सिंदूर दान के बाद प्रतिमा विसर्जन होता है।
00:39आरती के दौरान धाक की थाप पर धुची नृत्य आकर्शन का केंद्र रहता है।
00:43इस बार रायपूर से आई कुचिपूरी टीम ने भी प्रस्तुतियां दी।
00:45समिती ने करीब 12 वर्ष पहले प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूशन से बचाने के लिए
00:49परिसर के कुंड में क्रेन की मदद से प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था शुरू की थी।
00:54विसर्जन के बाद मिट्टी और पानी के दोबारा उपयोग का प्रयास किया जाता है।
00:57इस वर्ष जल ही जीवन है।
00:59वाटर कंजर्वेशन और गो ग्रीन जैसी थीम के जरिये जल एवं प्रकृति संरक्षन का संदेश दिया जा रहा है।