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  • 8 hours ago
यूपी की राजनीति में 1980 के दशक के बदलाव और मुलायम सिंह का सीएम बनना, देखें पूरी कहानी

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00:00वीपी सिंग ने इससे पहले दो बार और इस्तीफे की चित्थी लिखी थी
00:03पहली बार जब सितंबर 1980 में मुराधाबाद और अलीगर में संत्रदाइक हिंसा हुई थी
00:09पर तब इंदिरा गांधी ने इस्तीफा अस्वीकार कर दिया था
00:12और दूसरी बार जब नवंबर 1981 में राधे संतोशा ग्यांग ने महिनपुरी में
00:1924 लोगों की मृशन सत्या कर दी तब पुलिस ने समय रहते राधे और संतोशा को गिरफ्तार कर लिया
00:25और एक महिने में 50 जकैतों को मौत के घाट उतार दिया
00:28पर इस बार वो इस्तीफे पर डटे रहे और आखिरकार वो स्वीकार भी हो गया
00:38वीपी सिंग के इस्तीफे के बाद श्रीपती मिश्र को मुख्यमंत्री बनाया गया
00:42वीपी सिंग केंद्र की राजनीती में लोट गए और एक बार फिर केंद्र में मंत्री बना दिया गए
00:53श्रीपती मिश्र जनाधार वाले ब्रमभण नेता थे जो जज से गाउप्रधान और फिर सक्रिय राजनीती में आये थे
01:03श्रीपती ने भी डाकु मुक्त अभियान को आगे बढ़ाया पर उनकी राजीव गान्ती से बंती नहीं थी और तब तक
01:12राजीव केंद्रिय राजनीती में सक्रिय हो चुके थे
01:16लेकिन श्रीपती मिश्रा का अनुभाव कारे करने की शैली कांग्रेस की नेताओं को पसंद नहीं थी और उनके खिलाब बहुत
01:25ऐसंतूस विदिन कांग्रेस भी था और अब धीर गेरे 1984 का चुनाव भी निकट दीकर रहता जिसमें लोकसभा और दिलानसभा
01:33के नतीजे प्
01:38श्रीपती मिश्रा को हटा जिए श्रीपती मिश्र की विदाई के बाद बचे कारेकाल के लिए नारायन तत्तिवारी को दूसरी बार
01:47मुख्यमंत्री की कुरसी सौपती गए
01:50उनकी एक बहुत व्यापक दृष्टी थी वो बहुत अच्छे प्रशासक थे समर्पित प्रशासक थे
01:57एंडी तिवारी को फिर से मुख्यमंत्री की कुरसी समालने के तीन महीने बाद तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदरा गांधी की हत्या
02:05हो गई
02:07आए राजीव गांधी पार्टी संगठन सब राजीव गांधी के पास आ गए इस बीच नई विधान सभा का चुनाव भी
02:16हो गया और कॉंग्रेस पूर्ण बहुमत से फिर सत्ता में लोटाई
02:23नाराण दत्तिवारी ने फिर से मुख्यमंत्री पद की शपत ली एंडी तिवारी को पद सम्हाले मुश्किल से एक साल हुआ
02:29था
02:30जब एक दिन राजीव गांधी यूपी के दोरे पर गए कहते हैं वहाँ गोरकपुर के एकनेता से उनकी लंबी बात
02:37हुई थी
02:37और अगले ही दिन यूपी के इतिहाज ने एक और करवट ले ली
02:43राजीव गांधी से वीर बहादूर सिंग की मुलाकात के बाद नाराण दत्तिवारी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तिफा दे दिया
02:50और वीर बहादूर सिंग को मुख्य मंत्री पद की शपत दिला दी गई
02:57खेर वीर बहादूर बन तो गए मुख्य मंत्री लेकिन उनका कारिकाल मुश्किलों से घिरा रहा
03:03मुख्य मंत्री के साथ जो कमांडो और शाडो चलने का चलनाम दिखता है
03:07कहा जाता है वो वी बहादूर सिंगे समय ही शुरू हुआ उन्हें शौक था टशन दिखाने का।
03:37और बाकी जो आज के मुखमंत्री हैं उस मठका शाही के साथ चुड़ाओ रहता था कहीं न कहीं बीरवादूर सिंग
03:45का भी सौफ्ट कारनर रहता था तो और उस समय वहां कई मर्डर्स हुए थे तो उस लिहाज से और
03:52ये मुखमंत्री थे तो उस लिहाज से उन्होंने शायद
03:57लिए आप इच्छा की होगी उनके कारेकाल में 37 दंगे हुए अकेले मेरट दंगों में 181 लोग मारे गए 29
04:09अंस्थानों ने लंबी हड़ ताले की किसान हितों के लिए महिंदर सिंग तिकैत के अंदोलन हुए और सबसे बड़ा अयोध्या
04:17विवाज सुलगने लगा
04:19यह मामला अदालत में था लेकिन अरूम नहरू ने दबाब डाल करके वीर बात दूर पर उस समय ताला खुरवा
04:28तो उसको लेकर के बहुत विवाद हुआ और यह उस समय पहा गया कि यह भी सुन्दी पविश्द को खुश
04:36करने के लिए काम किया गया है और कांग्रेस के पत
04:43कठा उस दिन लिखी गई जिस दिन यह काम है जो अलप संकत सम्दा है जो इसके साथ जोड़ा वातर
04:50कॉमिलेस को उनको यह नागवार गुजरा और उन्होंने धीरे-धीरे कॉमिलेस से दूरी बनाने शुरू कर दी जिसका फायदा युपी
05:00सिंग के नेत्र तुआले जंता �
05:07वीर बहादूर सेंग की कुरसी गई तो एक बार फिर से नारायन दत्तिवारी को ही सत्ता सौपने गए नारायन दत्तिवारी
05:13इसके बाद करीब डेड़ साल मुख्यमंत्री रहे
05:16पुरा प्रांतव्यापी पुरा प्रदेश व्यापी इंफ्रा इस्ट्रक्चर डेवलप करने का जो अच्छा काम हुआ शुगर मिल्स, यूनिवर्स्टीज, मेडिकल कॉलेजेस, वगरा
05:29वगरा, सडकें, नहरें, पुल, तो वो तिवारी जी के समय में बहुत अच्छा काम ह�
05:36इस बीच केंद्रिय राजनीती की उथल पुथल का असर भी यूपी पर पढ़ने वाला था
05:40वीपी सिंग ने पार्टी के भीतर विवाद के कारण कॉंग्रिस छोड़ दी और राजीव गांधी के खिलाफ बोफोर्स का मुद्दा
05:47लेकर उतर गए
05:48विपक्षी दलों को जन्ता दल के बैनर तले लाकर वो इसका नित्रत्व कर रहे थे
05:551989 में यूपी के चुनाव हुए और यहाँ से कॉंग्रिस के लिए फिर यूपी में कभी न खत्म होने वाला
06:01वनवास शुरू हो गया
06:07जन्ता दल ने रिकॉर्ड 208 सीट ने जिती
06:12कॉंग्रिस सिर्फ 94 सीटों पर सिमट ने बीजेपी को 57 सीटे मिली
06:24जन्ता दल को मुख्य मंतरी चुनना था मामला भसा था चौधरी चरण सिंग के पुत्र अजीज सिंग और मुलायम सिंग
06:30यादव के बीच
06:31वीपी सिंग देश के प्रधान मंतरी बन चुके थे
06:33तै हुआ विधायकों के बीच मद्दान से फैसला किया जाए और बाजी मार ले गए मुलायम सिंग यादव
06:43लोहिया की सोशलिस्ट पॉलिटिक्स चरण सिंग की किसान राजनी थी और वीपी सिंग की बैकवर्ड सियासत के साथ मुलायम सिंग
06:50की सियासी ट्रेनिंग तगड़ी थी
06:54वो भारतिय जनता पार्टी जो आज यूपी में समाजबादी पार्टी की सबसे बड़ी प्रतिद्वन्दी है
06:59मुलायम सिंग यादव की पहली सरकार उसी के बाहरी समर्थन से बनी थी
07:06केंद्र में वीपी, यूपी में मुलायम सिंग, दोनों में पुरानी अदावत
07:10लेकिन राजनीतिक रास्ते पर नजरें बचाते हुए दोनों साथ साथ चल रहे थे
07:15दोनों ही सरकारों को बीजेपी का समर्थन था
07:18मुलायम सिंग तो वीपी सिंग की वज़े से जनता दल का हिस्सा तक बनने को ही तयार नहीं थे
07:23वो तो जॉर्ज फर्नांडिस ने उन्हें मनाया और कहा वीपी तुम्हारे किसी काम में हस्तकशेप नहीं करेंगे
07:30तब उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी लोक दल का जनता दल में विले कराया
07:36मुलायम के लिए बतोर मुख्यमंत्री पहला ही कारेकाल निरणायक साबित हुआ
07:41कभी कुष्टी के ऐसे ही दाओं के चलते प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नत्थू सिंग ने मुलायम सिंग को अपनी जस्वंत
07:46नगर सीट सौप दी थी
07:52उसके बाद मुलायम ने कुष्टी तो नहीं लड़ी लेकिन दाओं खुब आजमान
07:58कि मुख्यमंत्री बन चुके थे और अब समय उनके सामने ताल ठोग रहा था
08:11कि मुलायम सिंग यादव जी के साथ मेरा 40 साल का रिष्टा रहा है
08:16कि 1974 में वो पुने विधायग बने थे सबसे पहली बार 67 में वो विधायग बने थे कि अब डाक्टर
08:24रामन हो लोईया वहांते चुनावड में गए
08:2769 में वो हार गे वो एक बहुत मेहंती करमट और एग्रेसिव कारे करता था
08:42अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा था
08:55केंद्र में वीपे सिंग हल निकालने के लिए विश्व हिंदू परिशद के नेताओं से बात कर रहे थे
08:59समन्वे कमीटियां बना रहे थे
09:22मुलायम सिंग इसमें खुद को उपेक्षित पा रहे थे
09:25क्योंकि जो मुख्य कमिटी वीपी सिंग ने बनाई उसमें मुलायम को शामिल नहीं किया
09:29दोनों के रिष्टे इसकदर अविश्वास से भरे थे
09:32कि वीपी सिंग ने फ़दवरी 1990 में जिन संतों को अयोध्या जाने के लिए मना किया था
09:38मुलायम ने उन्हें गिरफतार करवा दिया
09:47दूसरी तरफ भारतिय जनता पार्टी मंदिर आंदोलन में बढ़ चड़कर हिस्सा लेने लगी थी
09:52जिसकी वज़े से यूपी में मुलायम सिंग तो केंदर में वीपी सिंग की स्थिती अस सहज हो रही थी
10:09जानकार बताते हैं कि इस से वीपी सिंग के मन में एक उदासी इंता सी आ गई थी
10:17उस दोरान चुकि वीपी सिंग जी ने वहां एक आरक्षन के मामले को लेके
10:23एक मंदल को लेके जो उन्होंने लागू किया उसके बाद जो है भारती जन्ता पार्टी ने राजनेतिक रणनीतिक से ये
10:31महसूस किया
10:32कि अब मंदिर आंदोलन को थोड़ी हवा दी जानी चाहिए और यहां पर एक इसको जो एक पिछलों को उन्होंने
10:41एक उनका ये मानना था बीजे पी का कि ये सब पिछलों अगलों को बाटने की एक प्रक्रिया है
10:47इसलिए उन्होंने चुकि मंदिर का मुद्धा ऐसा है कि इसमें ना अगला है ना पिछला है उसमें इन्होंने कमंडल को
10:53लाके ख़ला कर दिया और आयुद्ध्या के मुद्ध्यों को आगे बढ़ाया शायद यही एक राजनेतिक कारणा प्रमुक्ता से रहा
11:06बुलाहिम सिंग को लगता था कि वीपी सिंग साधू संतों से बात करके उन्हें उनकी सरकार के खिलाफ उकसाते हैं
11:13ताकि किसी तरह ऐसा माहौल बने कि उनकी सरकार गिर जाए
11:20उन्होंने कुछ तो वीपी सिंग और कुछ बीजेपी की राजनीति को जवाब देने के लिहाज से सांप्रदाइक सदभाव रैली के
11:27नाम से पूरे उत्तर प्रदेश में मंदिर आंदूलन के खिलाफ बिगुल फूक दिया

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