00:08विजया दश्मी यानि दशेहरा का त्योहार पूरे भारत में बहुत ही हर्शोल लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
00:15साल दो हजार चबबीस में इस पर्व की तिथी को लेकर लोगों के बीच थोड़ा भ्रम बना हुआ है।
00:21क्योंकि कहीं इसे 20 अक्टूबर को तो कहीं 21 अक्टूबर को मनाने की बात कहीं जा रही है।
00:27इसका मुख्य कारण अलग-अलग क्षेत्रों की पंचांग परंबराएं और पूजा पध्धतियां है।
00:32नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में दशहरा 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जाएगा।
00:41वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगार, ओडिशा और पूर्वी भारत के राज्यों में दुर्गा पूजा की स्थानिय मान्यताओं के अनुसार विजया
00:50दश्मी का उत्सव 21 अक्टूबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा।
00:54पूजा और दहन के शुभ मुहूर्थ दश्मी तिथी की शुरुवात 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से होगी
01:01और इसका समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा।
01:07श्रवण नक्षत्र 19 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की शाम 6 बजकर 2
01:15मिनट तक रहेगा।
01:37क्टूबर की शाम को रावन दहन के लिए प्रदोशकाल शाम 5 बजकर 47 मिनट बजे से रात 8 बजकर 17
01:45मिनट बजे तक रहेगा।
01:47जिसमें रावन दहन का सबसे श्रेष्ठ समय शाम पाँच बचकर 47 मिनट बजे से 6 बचकर 12 मिनट बजे तक
01:55का तै किया गया है।
01:57तिथियों के इस अंतर को पंचांग के नियमों से समझा जा सकता है।
02:01हिंदू कैलेंडर में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दश्मी तिथी को विजया दश्मी मनाई जाती है।
02:0720 अक्टूबर को दोपहर 12 बचकर 50 मिनट बजे तक नवमी तिथी रहेगी।
02:12इसलिए इस दिन सूर्योदय नवमी तिथी में होगा। 21 अक्टूबर के दिन सूर्योदय के समय दश्मी तिथी मौजूद रहेगी।
02:20पूर्वी भारत और बंगाल में सूर्योदय व्यापिनी तिथी को प्राथमिकता दी जाती है।
02:25इसलिए वहाँ 21 अक्टूबर को विजया दश्मी का पर्व मनाया जाएगा
02:29इसके विपरीत उत्तर और मध्य भारत में विजया दश्मी के निर्धारण के लिए
02:34दोपहर के समय यानि अपराहन काल में दश्मी तिथी की उपस्थिती को देखा जाता है
02:39चुँकि 20 अक्टूबर की दोपहर में दश्मी तिथी मौजूद रहेगी
02:44इसलिए इन क्षेत्रों में 20 अक्टूबर को ही मुख्य दशहरा मनाया जाएगा
02:48हालांकि उत्तर भारत में मंगलवार के दिन माता की मूर्ती का विसर्जन या विदाई करना शुभ नहीं माना जाता
02:55इसलिए मूर्ती विसर्जन का कारिय 21 अक्टूबर बुधवार के दिन ही किया जाएगा
03:00विजया दश्मी का ये पा�वन पर्व असत्य पर सत्य, अज्ञान पर ज्यान और अधर्म पर धर्म की विजय का महान
03:08प्रतीख है
03:09पौरानिक माननेताओं के अनुसार इसी पावन तिथी पर भगवान श्री राम ने लंकापती रावन का वध करके अधर्म का अंत
03:16किया था
03:17इसके साथ ही महिशा सुर नामक तैत्य पर देवी दुर्गा की महा विजय को भी इसी दिन से जोड़ा जाता
03:23है। इस अफसर पर विशेश रूप से शस्त्र पूजा, औजारों, उस्तकों, वाहनों और कार्य से जुड़ी वस्तूओं के पूजन का
03:31विधान है।
03:32कई क्षेत्रों में लोग शमी या आपटा के व्रिक्ष के पत्तों को एक दूसरे को देकर सुख, समृध्धि और शुभ
03:38कामनाओं का आदान प्रदान करते हैं। इस दिन बच्चों को पहली बार अक्षर ज्यान कराने, संगीत सिखाने या किसी नए
03:46व्यापार्वकारी की श�
03:59परंपराओं को मानता है, तो आप 20 अक्टूबर को पूजा और रावन दहन की तैयारी कर सकते हैं। यदि आप
04:05बंगाली या पूर्वी भारतिये दुर्गा पूजा परंपरा का पालन करते हैं, तो आपके लिए 21 अक्टूबर का दिन उपयुक्त रहेगा।
04:12पूजा से ज�
04:34झालोने को