00:08खर में रोश्नी के लिए मिट्टी की डिब्या तक नहीं जलती थी।
00:30साल 2018 में संध्या ने सिर्फ दो किलो मश्रूम के बीज से अपना सफर शुरू किया था।
00:36समाज के ताने और परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
00:50शुरूआत में घर के लोगी सवाल उठाते थे। कोई से बेकार समझता था, पैसे भी नहीं थे।
00:56फिर मेले से मिले 2000 रुपियों को उन्होंने बिसनेस में लगाया।
01:00वैग्यानिक अनीता कुमारी ने मदद की जब पैसे आने लगे तो पती और बेटों का भी साथ मिल गया।
01:39आज संध्या सिर्फ खुद आत्मनिर भर नहीं है, बलकि हर महीने 10 क्विंटल ओइस्टर मश्रूम का बंपर उत्पादन कर रही
01:46है।
01:47इतना ही नहीं, वो अब तक 5000 से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग दे कर उनके पैरों पर खड़ा कर चुकी
01:54है।
01:54संध्या की प्रसेक्शनार्थी पूजा कुमारी कहती हैं कि दीदी से सीख कर हमने घर पर मश्रूम उगाना शुरू किया।
02:01अब खाने के साथ साथ इसे बेच कर आमदनी भी हो रही है, इसे अचार पापड बनाकर रोजगार के नए
02:08रास्ते खुल रहे हैं।
02:09मश्रूम से पापड अचार सभी चीज बनते हैं।
02:17क्रिशी विश्व विद्याले से महिला किसान समान पाने वाली संध्या ने साबित कर दिया कि बड़ी पूझी से नहीं, बलकि
02:24बड़े होसले से तकदीर बदली जाती है।
02:28ETV भारत के लिए भागलपुर से अमरजीत कुमार की रिपोर्ट