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सऊदी अरब का पवित्र शहर मक्का दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां स्थित काबा की ओर रुख करके मुसलमान दिन में पांच बार नमाज अदा करते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु हज और उमराह के लिए मक्का पहुंचते हैं। लेकिन इसी पवित्र शहर से जुड़ी दो बांग्लादेशी नागरिकों को मृत्युदंड दिए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों को एक मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य के आरोप में सजा सुनाई गई। इस मामले में बांग्लादेशी दूतावास को पूर्व सूचना नहीं मिलने के दावों ने कूटनीतिक संबंधों और प्रवासी नागरिकों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर इस मामले में क्या हुआ, कानूनी प्रक्रिया कैसे चली और किन सवालों के जवाब अब भी सामने नहीं आए हैं? जानिए इस विस्तृत रिपोर्ट में।

Saudi Arabia’s holy city of Mecca is one of the most important centres of faith for millions of Muslims worldwide. The Kaaba, located here, is the direction Muslims face while offering prayers five times a day. Every year, millions of pilgrims visit Mecca to perform Hajj and Umrah. However, reports about the execution of two Bangladeshi nationals in connection with an alleged immoral act at a mosque in the holy city have sparked an international controversy. According to reports, both individuals were sentenced to death over the alleged incident. Claims that the Bangladeshi embassy was not informed in advance have raised serious questions about diplomatic communication, legal transparency, and the rights of migrant workers abroad. What exactly happened in this case?

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~PR.516~HT.408~GR.508~VG.HM~

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00:00साउदी अरब का पवित्र शहर मक्का ये सिर्फ एक शहर नहीं है बलकि दुनिया भर के करोडों मुसल्मानों की आस्था
00:07का सबसे बड़ा केंडर है यही वो जगा है जहां काबास थे थे जिसकी ओर रुक करके दुनिया का हर
00:13मुसल्मान दिन में पांच बार नमाज अधा करता
00:16है यही वो पवित्र स्थल है जहां हर साल लाखो श्रधालू हज और उम्राह के लिए पहुँशते हैं जामीर हो
00:23या गरी सब एक जैसे सफेद कपडों में सिर्फ एक ईश्वर की भक्ती में लीन होते हैं मक्का शान्ती पवित्रता
00:32और आस्था का प्रतीक माना जाता है रेक
00:45प्लील कृत्य करने की आरोप में दो बांगलादेशी नागरे को नजरुल इसलाम अब्दुल बशीर और सित्ती अक्तर को सजाय मौत
00:53यानि फासी दे दे गई है लेकिन इस पूरे घटना में सबसे हैरान करने वाली बात कि यह है कि
00:59इस फासी की खबर खुद बांगलादेश
01:00के दूतावास तक को भी नहीं थी आखिर मक्का के उस मजद में उस दिन क्या हुआ था कि इस
01:06मामले को तीन साल तक सारवजनिक नहीं किया गया और बिना किसी पूर्व सूचना के यह पास ही क्यों दे
01:12गए आज के इस रिपोर्ट में हम इस पूरी कहानी की एक एक परत खो ल
01:30पहतर भविष्य का सपना लेकर काम के सिलसले में साउधी अरब जाता है उसी दौरान सिती अक्तर नाम की एक
01:37बांगलादेशी महिला भी साउधी में रह रही थी
01:39साउधी अरब पहुचने के ठीक 6 महीने बार यानि साल 2023 के शुरुवाती महीनों में अचानक साउधी अरब की पुलिस
01:47इन दोनों को हिरासत में ले लीती है
01:49उन पर आरोप लगाया जाता है कि उन्होंने पवित्र शहर मक्का की एक मज़ित के अंदर अनैतिक क्रित्य यानि अशलील
01:55हरकत की है
01:56पुलिस दोनों को पकड़ती है और अदालत में पेश करती है लेकिन इसके बाद जो होता है उसकी खबर किसी
02:02को नहीं लगती
02:02मामला अचानक गहरी खामोशी में चला जाता है
02:07तीन साल का सन्नाटा और गुप्ट कानूनी प्रक्रिया
02:10अंदराश्टे नियमों के मताबिक अगर किसी विदेशी नागरे को किसी दूसरे देश में गिरफतार किया जाता है
02:16तो उस देश के दूताबास को तुरंट खबर दी जाती है ताकि आरोपी को कानूनी मदद मिल सकी
02:21लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ
02:25साउदी पुलिस ने दोनों को जेल में रखा
02:27मामला अदालत में गया और निचली अदालत ने दोनों को मका की मज़ित की मर्यादा तोडने के जुर्म में सीधे
02:34मौत की सजा सुना दी
02:35इसके बाद केस साउदी अरब के सबसे बड़े कोड यानि सुप्रीम कोड गया
02:40सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहरा
02:44अंत में साउदी के शाह का अदेश जारी हुआ और 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को फासी पर लटका दिया
02:51गया
02:53यानि पूरे तीन साल तक केस चला, सजा तैह हुई और फासी भी दे दिया
02:58लेकिन ना तो उनकी परिवार को कुछ पता चला और ना ही जद्दा में मौजूद बांगलादेशी दूतवास को इसकी कोई
03:04जानकारी दी गई
03:0616 अक्टूबर का बयान और कूटनीती कुचार
03:0914 अक्टूबर को फासी हो गई लेकिन दुनिया के सामने ये बात दो दिन बाद आई
03:1316 अक्टूबर 2026 को साओधी सरकार के अधिकारिक समाचार एजनसी SPA ने ग्रे मंत्राले का एक बयान जारी की
03:21बयान में बहुत संचिप शब्दों में लिखा था कि मक्का की एक मज़िप में अश्लीलता फैलाने के आरोप में दो
03:28बांगलादेशी नागरिकों को मौत की सजा दे दी गई
03:32जैसे ही ये खबर बाहर आई बांगलादेशी दूलताबास में हरकम्प मच गया
03:36बांगलादेश के अधिकारियों ने साफ कहा कि साओधी अरब ने उन्हें पूरी प्रक्रिया फासे के बारे में पहले से कोई
03:43जानकारी नहीं दी थी
03:46बांगलादेश की विदेश राजमंत्री हुमायु कबीर को मीडिया के सामने आकर कहना पड़ा कि साउधी अरब की तरफ से जवनकारी
03:52साजहा करने में बहुत बड़ी चूक हुई है
03:55इसके बाद बांगलादेश सरकार ने साउधी एरब के विदेश मन्प्राले को एक पूटनी तिक पत्र भीज कर इस पूरे मामले
04:01पर अधिकारिक जवाब और पुष्टी मांगे
04:04बांगलादेश में गुस्सा और कड़े सवाल
04:06इस खबर के सामने आते ही बांगलादेश की लोगों में बहुत निराशा और गुस्सा फेल गे
04:11बांगलादेश की प्रमक्व विपक्षी पार्टी जमाते इसलामी के अध्यक्ष शफिक और रह्मान ने अपनी ही सरकार और दूतावास पर कड़े
04:18सवाल उठा
04:19उनने पूछा कि अगर विदेश में हमारे देश के नागरिकों कोफासी देवी जाती है और हमारे दूतावास को खबर तक
04:26नहीं होती तो फिर ये दूतावास वहां किस काम के लिए?
04:29क्या दूतावास ने अपनी जम्मेदारी निभाई?
04:32ये सवाल आज हर उस परिवार का है जिसका कोई न कोई सबस्य रोजी रोटी कमाने के लिए खाड़ी देशों
04:37में मजदूरी कर रहा है
04:43अब आपके मन में एक सवाल उठ रहा होगा कि क्या शलील हरकत करने पर किसी को सीधे मौत की
04:48सजा देव जा सकती?
04:49साओधी सरकार का कहना है कि ये फासी ताजीर कानून के तहती गई
04:53आएए बहुत असान शब्दों में समझते हैं कि ये ताजीर होता कि
04:56इसलामी नाय प्रणाली में तीन तरह की सजाए होती है
05:00अदूर जिनकी सजा धार्मिक गरंतों में पहले से तह
05:04किसास यानि खून के बतले खून कान्या
05:08ताजीर यानि जज़ का अपना फैसला या वेधिकार
05:11ताजीर कोई लिखी हुई कानून की किताब नहीं
05:14इस ज़ज को ये अधिकार देती है कि अगर कोई ऐसा अपराद हुआ है
05:17जो किसी आम कानून में नहीं आता
05:19तो ज़ज अपनी समझ से कोई भी सजा चुन सकता है
05:23ज़ज चाहे तो आरूपी को सिर्फ चेताबनी देकर छोड़े
05:26या फिर उसे सीधे मौत की सजा दे दे
05:28इस मामले में ज़ज नहीं माना कि
05:30क्यूंकि ए घटना मक्का की एक पवित्र मजज़त में हुई थी
05:33से बहुत गंभी रपरात है
05:35और इसी ताजीर के आधिकार का इस्तिमाल करते हुई
05:38दोनों को सीधे मौत क्यूंड दे दिया गया
05:41वो सवाल जुनके जवाब अभी भी गाया
05:44भले ही साउदी प्रसाशन ने इस मामले में कारवाई पूरी कर दी
05:48लेकिन इस कहानी में ऐसे कई सवाल है जिनके जवाब आज भी किसी के पास नहीं
05:53पहला सवाब
05:54साउदी अरब ने ये कभी उजागर नहीं किया कि ए घटना मक्का के किस मस्ज़त में हुई
06:00दूसरा सवाब
06:01अश्लील कृत्य में वास्तव में क्या हुआ था
06:04क्या वो कोई मामुली बाची थी या कुछ हो इसका कोई व्योरा नहीं दिया गया
06:09तीसरा सवाब
06:10ए घटना असल में किस सारिक को हुई थी और अदालत में ये केस कब तक चल
06:15चौत्था सवाब
06:16साउदी के स्थानी अखबारों ने भी इस पर कोई जाच नहीं गी बसरकार का अधिकारिक बयान चाप दिया
06:24अगर हम अधिकारों को देखे तो ये कोई अकेली घटना नहीं
06:27मानव अधिकार संस्था
06:29एमनेस्टिय इंटरनाशनल के मुताबिक अकेले साल
06:322026 के शिरुवाती 9 महीनों में ही साउदी अरब 175 से जादा लोगों को मौत की सजा दे चुका है
06:38और इन में से आधे से जादा लोग यानि कम से कम 94 लोग विदेशी नागरिक थे
06:43अक्सर गरीब देशों से आये इन प्रवासियों को ना अपनी भाशा का वकील मिलता है
06:48और ना ही उनके देश के दूतावास को समय पर सूच ना दी जाती
06:51मक्का की उस मजजद में उस दिन क्या हुआ था
06:53इसका सच शायद अब हमेशा के लिए दफन हो चुका है
06:57किन इस खटना ने विदेशों में महनत मजदूरी करने वाले लाखो प्रवासियों की सुरक्षा
07:01और उनके कूटनीतिक अधिकारों पर एक बहुत बड़ा सवाल या निशान खड़ा कर दिया
07:06एक कहानी सिर्फ दो मोटों की नहीं
07:08कहानी है एक ऐसी विवस्था की जहां बंद कमरों में फैसले होते हैं
07:13और बिना किसी को बताए दो जाने खत्म कर दी जाती
07:16इस पूरे मामले पर आपकी क्या राहे हैं
07:18अपनी बात नेचे कॉमें सेक्शन में ज़रूर बताए
07:20फुलाल बस इतना ही देश और दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए देखते रही
07:24One India हिंग

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