Skip to playerSkip to main content
  • 38 minutes ago
भारत-US ऊर्जा सहयोग और मोदी-ट्रंप के रिश्ते पर क्या बोले मार्को रुबियो-सर्जियो गोर?

Category

🗞
News
Transcript
00:01राश्ट्रपती ट्रंप ने कहा था कि भारत और अमेरिका एक समझोते पर हस्ताक्षर करने के करीब हैं।
00:06मैं ये जानना चाहता हूँ कि क्या वाशिंग्टन भारत को इस व्यापार समझोते के लिए प्रतिसपर्धी टैरिफ लाप देने के
00:12लिए तैयार है।
00:14मैं किसी भी समझोते का विवरन आपको नहीं बता पाऊँगा जब तक कि वो पूरे नहीं हो जाते हैं।
00:44संधों में निरंतरता बनाए रखने को लेकर हैं। तो क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस समझोते के बाद
00:49नियमों में संशोधन की आवश्यक्ता नहीं होगी।
00:53जी बिलकुल यही बात है।
00:56किसी समझोते का उद्देश चे लोगों के लिए निवेश के मौके सुनिश्चित करना होता है।
00:59व्यापार और वानिज्जे के नियम लोगों को पता होने चाहिए और यही वो लक्ष्य है हम जिस पर काम कर
01:04रहे हैं।
01:05मुझे आशा है कि हम जल्द बहुत अच्छी स्थिती में पहुंचेंगे।
01:35अमेरिका में भी जबरदस्त निवेश आ रहा है। राश्ट्रपती ने हाल ही में ओवल आफिस में उनका स्वागत किया।
01:41वो अमेरिका में अर्बों डॉलर की फैसिलिटीज खोल रहे हैं जिनसे वहाँ स्थानिये लोगों के लिए नौकरियां पैदा हो रही
01:47हैं।
01:47कई अमेरिकी कंपनीज यहाँ आई हैं खासकर आईटी सेक्टर में। उनके यहाँ आने से देश में नौकरियों को बढ़ावा मिलता
01:54है।
01:55इसलिए हमारा लक्ष आपसी व्यापार को बढ़ाते रहना और ऐसे मौके पहचानना है जिनसे दोनों पक्षों का फाइदा हो।
02:25और चीज को सिर्फ एक देश या एक संघर्ष के नजरिये से नहीं देखा जा सकता। हम अभी रूस और
02:30युक्रेन के बीच युद्ध को लेकर बेहत चिंतित हैं और इसे खत्म करवाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं खास
02:36तोर पर ग्लोबल एकॉनमी पर इसके असर के चलते
02:38साथ ही हॉर्मुज और अब रेट सी में जो हालात दिख रहे हैं उन्हें भी।
03:08विविद्ता लाए दरसल हर देश को आत्म निर्भर होना चाहिए। भारत पहले से ही इस दिशा में आगे बढ़ रहा
03:14था। तो बात रूसी तेल कम खरीदने की नहीं है बलकि ज्यादा अमेरिकी कच्चा तेल या वेनेजवेला या पश्चिमी गोलार्ध
03:21के अन्य देशों
03:22से तेल खरीदने की है। ये भारत के हित में हैं और जाहिर है कि हम इसमें मदद करना चाहते
03:27हैं। सबसे जरूरी बात ये है कि भारत में असली क्षमता है, यानि कच्चे तेल को इस्तिमाल लायक प्रोड़क्ट बनाने
03:34के लिए उसे रिफाइन करना जरूरी है। भारत में �
03:37न सिर्फ ये क्षमता है बलकि इस क्षेत्र में निवेश लाने की भी क्षमता है
03:44इसलिए आप जामनगर गए थे
03:45क्या यह एनरजी सहयोग बढ़ाने के लिए था
03:50भारत और हमारे बीच पहले से ही एनरजी सहयोग है
03:52जामनगर में हम उस फैसिलिटी को देखकर समझना चाहते थे कि वहाँ कैसे काम हो रहा है
03:57वो एक बहतरीन जगह है लेकिन इसी कंपनी का अमेरिका के ब्राउन्स विले में भी निवेश है
04:02जो उम्मीद है दो हजार उनतीस तक चालू हो जाएगा
04:11मुझे लगता है कि इस सुविधा के जरीए हमें अपने क्षेत्र में कच्चे तेल को रिफाइन करने में मदद मिल
04:15सकती है
04:15इससे दुनिया की मिडल इस्ट पर निर्भरता भी कम होगी
04:21आप क्वाड के विकास को कैसे देखते हैं
04:23खास कर चीन के बढ़ते दबदबे के मद्दे नजर
04:26भारत और अमेरिका मिलकर जरूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने
04:29और चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए और क्या कर सकते हैं
04:37क्वाड दरसल एक ऐसा धाचा है जिसे हमने विक्सित किया है
04:41सेकरेटरी ओफ स्टेट के तौर पर मेरी पहली मीटिंग क्वाड में ही थी
04:44पिछले डेड़ साल में हमने विदेश मंत्राले के स्थर पर क्वाड की रिकॉर्ड मीटिंग्स की है
04:48अब हम जल्द ही नेताओं की मीटिंग करेंगे
04:57प्रेसिडेंट ट्रम्प के कारेकाल में हम इस मंच को और आगे बढ़ाएंगे
05:01और ये सिर्फ इसलिए अहम नहीं है कि इसमें चार देश एक दूसरे से तालमेल बैठा रही है
05:08हमें इसके नतीजे दिखने लगे हैं
05:10हमने मैरी टाइम अवेरनेस पर काफी काम किया है
05:22सप्लाई चेन को लेकर भी बड़े पैमाने पर सहयोग संभव हैं
05:26हम दुनिया के किसी एक देश पर ज्यादा निर्भरता नहीं चाहते
05:30और यहां मैं सिर्फ चीन की बात नहीं कर रहा हूँ
05:33हमारे पास चीजों को खुद करने की घरेलुक शमता होनी चाहिए
05:40मुझे लगता है कि भारत की भी यही दिल्चस्पी है
05:43और प्रेसिडेंट ट्रम्प की भी निश्चित रूप से इसी में दिल्चस्पी है
05:46यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर हम मिलकर काम कर सकते हैं
05:50यानि ऐसे प्रमुख क्षेत्र जिनमें हम दोनों देश फायदेमन तरीके से घरेलुक शमताएं विकसित कर सकते हैं
05:56चाहे वो AI हो, Tech हो, Bio Medicine या Pharma Industry और Non-Critical Minerals कुल मिलाकर लिस्ट लंबी है
06:07सेक्रेटरी रूबियो आपके मताबिक अमेरिका खुद को फिर से इंडस्ट्रियलाइज करने की प्रक्रिया में है
06:14तो क्या अमेरिका को पहले की तरह भारतिय प्रोफेशनल्स का स्वागत नहीं करना चाहिए
06:18बजाए इसके कि उनके Work Visa और भारतिय चात्रों के लिए कीमतें बढ़ाई जाएं
06:30देखिए, ये हमारे Immigration कानूनों में बदलाव है और ऐसा भारत को ध्यान में रखकर नहीं किया गया है
06:35ये सही है कि इसका असर उन भारतियों पर पड़ता है जो अमेरिका आकर काम करना चाहते हैं
06:40या जिनहें हमारी कमपनियां बुलाना चाहती है
06:42पर इसे ग्लोबल परिप्रेक्षे में देखिए
06:45दरसल सालों से अमेरिका का Immigration सिस्टम खराब रहा है
06:48जिसके चलते लाखों लोग गैर कानूनी तरीके से अमेरिका आए
06:52कई मामलों में बड़े पैमाने पर धोखा धड़ी और कानूनों का गलत इस्तेमाल हुआ है
06:57इसे लेकर अमेरिका में भी खासा विरोध हुआ
06:59इसलिए नियमों में बदलाव किया गया
07:11लेकिन इनका मकसद भारत को निशाना बनाना नहीं है
07:14ये नियम हर देश पर लागू होते हैं
07:16चाहे ट्रेड हो या इमिग्रेशन
07:20जिन देशों पर अमेरिकी पॉलिसी बदलाव का असर पड़ता है
07:27उन्हें लग सकता है कि उन्हें निशाना बनाया गया
07:30पर ऐसा नहीं है
07:31हम एक ऐसा सिस्टम बनाएंगे जो अमेरिका के लिए काम करे
07:38मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार भी भारत के लिए यही चाहेगी
07:42प्रेसिडेंट ट्रम्प के नित्रत्व में
07:44अमेरिका हमारे लोगों और हमारे वर्कर्स को सबसे पहले रखेगा
07:51हमारे मौझूदा साजा हित और पुराने रिष्टे
07:53हमें मदभेदों को सुलजा कर ऐसे नतीजे तक पहुँचने में मदद करेंगे
07:57जो दोनों देशों के लिए बहतर हो
08:05सेकरेटरी रुबियो राष्टरपती पुतिन ने कहा
08:07कि रूस अमेरिका और यूकरेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए
08:10त्रिपक्षिय बैठक करने को तयार है
08:12रूस यूकरेन संगर्श को खत्म करने का सही रास्ता आपको क्या लगता है
08:19इस संघर्ष को खत्म करना बेहद मुश्किल है
08:22हालाकि राश्टरपती टरंप ने इसमें काफी समय दिया है
08:24और हमारी कोशशें अब भी जारी है
08:30पर मेरे मुताबिक यह युद्ध दरसल डॉन्बस को लेकर है
08:34यह यूक्रेन के उस 11 फीसदी हिस्से के बारे में है
08:37जिसे रूस चाहता है लेकिन सैन ने ताकत से हासिल नहीं कर पा रहा
08:40और जिसे यूक्रेन छोड़ना नहीं चाहता
08:43और इसके पीछे उनके अपने कारण है
08:51यह युद्ध सैन ने तरीके से हल नहीं होगा
08:54यह युद्ध केवल कूट नीतिक तरीके से ही खत्म होगा
08:58सवाल ये है कि क्या कोई ऐसा समधान संभव है जिसमें दोनों पक्षों को रियायतों के साथ फाइदा मिले
09:03पर इसके लिए दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर आना होगा
09:06हम इस मामले में मध्यस्त की भूमिका निभाने को तैयार हैं क्योंकि दोनों पक्षों के साथ आए बिना इसका हल
09:12संभव नहीं है
09:29आपका राश्ट्रपती के साथ काम करने का ये अनुभव कैसा रहा
09:36देखे राश्ट्रपती एक अद्भुत व्यक्ती हैं मैं उन्हें कई सालों से जानता हूँ वो बस नतीजे चाहते हैं और राश्ट्रपती
09:42हमेशा इसी पर ध्यान देते हैं जैसे प्रधानमंत्री मोदी हैं
09:46वो उसी तेज़ी से आगे बढ़ना चाहते हैं हर ग्लोबल लीडर नतीजों पर इतना ध्यान नहीं देता कई नेता प्रेस
09:53कॉन्फरेंस और मीटिंग्स करना ज्यादा पसंद करते हैं पर राश्ट्रपती टरंप नतीजे चाहते हैं वो चाहते हैं कि काम अभी
09:59हो
10:01और प्रधान मंत्री मोदी के साथ उनका तालमेल
10:05वो बहुत अच्छे दोस्त हैं और इसलिए चीजें बहतर काम करती हैं
10:08क्योंकि वो आगे बढ़ने, काम पूरा करने और नतीजे देने के मामले में
10:12एक जैसी सोच रखते हैं
10:14वो पीम मोदी का बहुत सम्मान करते हैं
10:30साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा है
10:36टरंप एक एतिहासिक व्यक्ति हैं, इसमें कोई शक नहीं है
10:39मेरे मताबिक राश्ट्रपती पद के लिए वो सबसे बहतर हैं
10:42वह कोई पारंपरिक राजनेता नहीं है
10:43वह बिलकुल भी राजनेता जैसे नहीं है
10:45बतोर बिजनसमैन उन्होंने हमेशा समझदारी भरे फैसले लिए
10:53पर खास बात ये है कि राश्ट्रपती टरंप दूरदर्शी है
10:56वो ऐसा कुछ सोच पाते हैं जिसे लोग नामुमकिन समझते हैं
10:59पर वो जो ठानते हैं, हासिल करते हैं
11:01और कर दिखाते हैं, कोई पारंपरिक राजनेता ऐसा कभी नहीं कर पाता
11:10हमें से जो लोग उनके लिए और उनके साथ काम करते हैं
11:13हमें यह सब जानकर विशेश उर्जा मिलती है
11:15मुझे लगता है कि विदेश, नीती और दुनिया
11:17खास तोर से ग्लोबल मामलों के लिहाज से
11:19यह काम करने का बहुत रोमांचक समय है

Recommended