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  • 2 days ago
Bahu ki bhuk sasur ke sath New romantic web series

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00:06जेड जी ये माल पुवा माल पुवे का इंतजार कर रहा था मैं
00:11जी खा लिजेगा अब मैं चल दी हूँ अरे बिल्कुल खा लेंगे कहां चली
00:17अभी हमने कहां होली खेली है तुमारे साथ बस थोड़ा रंग लगा ले
00:45अरे जेड जी खाने में आज क्या बनाया है
00:58आपका फेवरेट माल पुवा होली हो और उसके साथ माल पुवा भी हो फिर तो क्या मज़ा है
01:06अब एक काम करो मैं जा रहा हूँ अपने कमरे में पर माल पुवा बिजवाना ना भूलना जल्दी से बिजवा
01:13देना
01:28वैसे तो नई दुलन की आरती सास उतारती है
01:31सास ना सही और उसकी अम्मा सही
01:34बबू एकदम चांद जैसी बहु लेकर आये हो
01:40चांद कुगरे प्रविश्टो करवालो
01:42खरवाते हैं
02:31मैंने तुम से जादा खुबसरत लड़की आस तक नहीं देखी
02:42कविता तुम्हें मुझसे कुछ पूछना है
02:46हमें इसलिए कह रहे हैं
02:48क्योंकि आज हमारी जिंदगी की एक नहीं शुरुवात है
02:54हमें कुछ नहीं पूछना है
02:56क्यों?
02:58क्योंकि मान ने कहा था कि सुहाग रात के दिन बाते नहीं करते
03:04तु क्या करते है
03:09प्यार
03:12क्योंकि मुझसे कुछना है
03:39सुनो
03:49खठसकी जब लाउर को तक को मां पर पर राहर को प्तार नपोर।
03:51है आ खचे आ पर नहीं हम नहीं अचेत ब़ाई सब रहले कि जग और अग्टर को में अच्ट्यों प्तार
04:02थे हाँ
04:05वो
04:31अाह
04:41अज़े तेरे जेट जी है, पैर तो छूओ
04:47जीती रहो, जीती रहो
04:49खुश रहो बेटा, खुश रहो
04:51अच्छा हुआ पागया, और अस तो ए गिरी जाती
04:54शादी पे तो आनी पाया, लेकिन आज देखो, बिल्कुल साई टाइम पे आ गया
04:59और शोटे, जितना भी तुने बताया था न, ये बहु उससे भी कहीं ज़्यादा खुबसूरत है
05:07और इसके लिए मैं एक खास तोफ़ा लाया हूँ
05:14अभी दिखाता हूँ
05:22तुम्हारे लिए तो हमेशा कोई ना कोई तोफ़े लेके आता हूँ
05:25लेकिन इस बार खास तोफ़ा है बहु के लिए
05:29तुम्हारे लिए बहु
05:36मेरी तरफ से
05:38क्या है इसमें जड़ जी?
05:40जब खोलोगी तब खुदी तुम्हें पता चल जाएगा
05:43तुम्हारी शादी का खास तोफ़ा है ये
05:49जलो भई अब हमें नेंद आ रही है बहुत थकान हो गई सफर की
05:54हम अपने कमरे में जा रहे हैं
05:56सुबह सबसे चैन से मुलाकात करेंगे
05:58गुड़ नाइट
06:01गुड़ नाइट
06:01गुड़ नाइट
06:36सुबह बुड़ नाइट
06:39सुबह बुड़ नाइट
06:54चैन
06:58सुबह नाइट
07:00सुबह नाइट
07:22सुबह नाइट
07:25सुबह नाइट
07:32कविता
07:33कविता बहू
07:34तोलिया देना
07:42सुबह नाइट
07:44सुबह नाइट
07:44सुबह नाइट
07:45सुबह
07:45सुबह
07:46सुबह
07:48सुबह
07:48सुबह
07:50सुबह
07:53सुबह
07:54सुबह
07:55सुबह
08:00सुबह
08:10सुबह
08:12क्या हुआ है वो भाई साहब को भाई साहब की नजर वो मुझे बहुत अलग तरीके से देख रहे थे
08:29अरे भाई साहब हैं ही ऐसे सबसे अलग तिखा वो तुमारी शादी में भी नहीं आया थे फिर भी उन्होंने
08:36तुमारी लिए गिफ्ट दिया ना
08:39जानती हो बच्पन में हमारे माबाप की कार एक्सिडेंट में डेथ हो गई थी उसके बाद सब भाई साहब नहीं
08:47किया है मुझे वरुन को सब प्यार दिया है
08:51अरे मैं तो भूली गया मैं तुमारे लिए कुछ लाया हूँ क्या
09:06मैं तुमारे लिए लेके आया हूँ एक सेक्सी सी ड्रेस
09:12अरे वाँ
09:13जाओ पहन कराओ
09:15मैं अब भी पहन के आई
09:20उसको लगता क्या है कि मैं उससे प्यार नहीं करता हूँ क्या
09:24उससे बखुत प्यार करता हूँ मैं
09:39देदी
09:40अरे कवीता बड़ी जल्दी उठ गई
09:43हाँ
09:45तु बैट मैं तेरे लिए नाश्टा लेकर आती हूँ
09:47अरे नहीं हम तो आपको हेल्प करने आये हैं दीदी
09:50अरे सारा काम हो गया है
09:53तू ओ छोड़ तू बता कैसी रही तेरी सुहाग राद
09:56ठेक थी
09:59सिर्फ ठीक थी
10:02हाँ
10:11ये सारे मर्दना एक जैसे होते हैं
10:14वो बिस्तर पे सिर्फ अपनी पड़ी होती है
10:17हम औरतों का तो कोई सोचता ही नहीं है
10:22कोई बात नहीं दीदी पहले बार था शायद इसलिए
10:26तू इन मर्दों को नहीं जानती मैं जानती हूँ
10:30एक मर्द प्यार क्यों करता है प्यार पाने के लिए
10:34नहीं, गलत, औरत के साथ सोने के लिए, और एक औरत मर्द से प्यार क्यों करती है, क्यों, प्यार पाने
10:42के लिए, यही फर्क होता है एक औरत में और एक मर्द में, आप सही कह रही हैं दीदी, और
10:50एक बात और, जल्दी बाजी में बच्चा बच्चा पैदा मत कर लेना, क्यों
10:54जिस दिन बच्चा पैदा कर लिया, उस दिन गुलाम बन गई
10:57जो पती बोलेगा, वही करना पड़ेगा
11:00उपर से फिगर भी खराब कर लेगी
11:01आंटी लगेगी
11:05अच्छा दिदी, आपकी शादी को कितने साल हो गए?
11:08चार साल
11:09तो आपने अब भी तक फैमिली प्लानिंग नहीं की?
11:12वरुन तो बहुत कहता है, बट मैं मना कर देती हूँ
11:14क्यों? अब तो चार साल हो गए
11:16दस साल होने दे, उसमें क्या?
11:20देख, मर्द शादी होने के बाद बच्चा पैदा क्यों करना चाहते हैं?
11:23क्यों?
11:24उन्हें लगता है कि उन्हें मर्दान्गी का लैसेंस तब मिलेगा जब वो बाप बन जाएंगे
11:31और उन्हें ये लाइसेंस देता कौन है?
11:34हम
11:36करेक्ट
11:37तो बाहर जा, बाकी काम मैं कर लूँगे
11:40ठेक है
12:10अरे वा, ये तो बहुत खुबसूरा थे डिडी
12:15ये कहां से सिखा आपने?
12:17बस इस घर ने सिखा दिया
12:20सुबह घर का काम खतम करके दिन कटना बहुत मुश्किल हो जाता है
12:23तो पेंटिंग बना लेती हूँ
12:26तुम बता, तुम्हे क्या पसंद है?
12:28अरे, ये पेंटिंग वेंटिंग कहां दिडी?
12:32मुझे तो किताबे पढ़ना पसंद है
12:35अच्छा
12:37जेड़ जी के रूम में न धेर सारी किताबे पढ़ी हुई है
12:40उन्हें भी किताबे पढ़ना बहुत पसंद है
12:42तो तु वहाँ पे टाइम पास कर लिया कर
12:46ठीक है दिडी, देखती हूँ मैं
12:49अच्छा, मैं चलती हूँ
13:19पीक
13:35नीलम की शादी होके दस साल हुए थे
13:39लेकिन वो अपनी शादी शुदा जिन्दगी से खुश नहीं थी
13:42उसके पती ने पैसे कमा के बैंक बैलेंस तो भर दिया था
13:47लेकिन प्यार से महबबत से अपनी पतनी का दिल भरना भोल गया था
13:52एक दिन नीलम की नजर रोहन पे गई
13:55जो नीलम का पडोसी था
13:57पहली नजर में दोनों को एक दूसरी की जरूरत का एहसास हुआ
14:03दोनों एक दूसरी को मिलने के लिए तड़प रहे थे
14:06एक दिन नीलम घर पे अकेली थी
14:09तभी डोर की बेल बजी
14:11नीलम ने डोर खोला तो सामने रोहन था
14:16रोहन को देखके नीलम शर्मा गई
14:20रोहन ने कहा
14:23आंटी शक्कर है
14:26नीलम ने कहा
14:30अभी लेके आती हूँ
14:32नीलम शक्कर लेने जाती है किचन में
14:35तभी रोहन ने पीछे से कसके पकड़ लिया
14:38नीलम शादी शुदा थी
14:41लेकिन फिर भी वो रोहन को रोक नहीं पाई
14:44रोहन नीलम को बहुत ही रफली किस किये जा रहा था
14:50रोहन निलम को उठा केक
15:38मेरा नाम महेश है
15:39मुझे एक लड़की बहुत पसंद है
15:42क्योंकि उषकी शादी हो गई है
15:46मैं कुछ ना कुछ बहाना करके
15:49उसे देखने उसके घर जाता हूँ
15:51उसके घर वालों को काम में मदद करता हूँ
15:55उसे भी काम में मदद करता हूँ
15:58मैं उसे पसंद करता हूँ
16:00ये उसे पता नहीं है
16:04लेकिन मैं देखने के सिवा और कर भी क्या सकता था
16:08मैं रोज उससे बाते करने की कोशिश करता था
16:11एक दिन मैंने उसे उसकी पती के साथ
16:15नीचे वाले रूम में सेक्स करते देखा
16:19मैं मचल गया
17:06करते देखा
17:08यही तो रखी थी मैंने कहां चली गई
17:14पता ने मेरा भी दिमापना आजकल पता नहीं कहां रहता है
17:40करते देखा
17:41करते देखा
17:46करते देखा
17:49करते देखा
18:15करते है
18:29मास्ता ने कहां ने
18:55कविता
18:58हादीद
18:59मैं बाहर जा रही हूँ
18:59मंदे
19:00किर्टन के लिए
19:01किर्टन
19:02हाँ तुझे भी चलना है तो साथ में चल
19:05अरे नहीं दिदी
19:06थोड़ा काम है मुझे
19:07आप हो आईए
19:08अच्छा ठीक है
19:09मैंने खाना बना दिया है
19:11भाई साब को अगर भूख लगे तो खाना पर उस देना
19:14ठीक है
19:14ठीक है
19:15और हाँ उनके ना पैरों में आजकल थोड़ा दर्द रहता है
19:18तो अगर उनके पैरों में दर्द हो तो तेल लगा कर थोड़ी मालिश कर देना
19:22ठीक है दीदी
19:24चलो मैं आती है
19:36जेट जी अपने ही बहु को गंदी नजरों से देखने लगते है
19:40बहु को भी उनकी नजर समझ में आती है
19:43लेकिन वो उन्हें रोप नहीं रही है
19:46जेट जी का छोटा भाई अभी तक कुवारा है
19:49ये तो बिल्कुल इस घर की ही कहानी है
19:53अब उससे समझ आ गया था
19:55कि जेट उसके साथ क्या करना चाहते है
20:06जानवे
20:16जानवे
20:24जेट जी दीदी वो किर्टन में गई है
20:27कोई बात नहीं
20:29मैं आपके लिए पानी लेके आती हूँ
20:32अच्छा रुको
20:46नहीं पाने नहीं चाहिए
20:48बस थोड़ा अराम करना चाहता हूँ
20:52भर रद्ल्ण शर्यं चाहता हूँ
21:22गुट मॉर्णिंग
21:24गुट मॉर्णिंग
21:27अच्छा एक बात कहूं
21:29बोलो
21:30मुझे न वो जड़जे की नजर कुछ ठीक नहीं लगती
21:34इसमें उनकी गलती नहीं है
21:36तुम हो इतनी खुबसुरत
21:37जो तुमें देखता है
21:39देखता ही रह जाता है
21:41ऐसी बाते मत करो
21:43मैं सच कह रही हूं
21:44अरे हां तो
21:45हम भी सची कह रहे ना
21:49जाओ
21:49मैं तुमसे कोई बात नहीं करूंगी
21:51अच्छा तुम बताओ क्या करे
21:53उनको बोल दे कि अपनी आखे बंद कर ले
21:54वो बड़े हैं तुमें देखते हैं आशिरवात की तौर पर वो
21:57बिल्कुल बच्ची हो तुम
21:58क्या कर रहे हो बोला है न यहां नहीं चुना
22:03खराब कर दिया पूरा सिंदूर मेरा हटो यहां से
22:39कविता कविता कविता वो मेरी तेल की शिशी लाना
22:44बहुत दर्द हो रहा है पैर में यह दीजिए तो बहु
23:06जेड जी दीजे मैं लगा देती हूँ अरे मैं लगा लोगा अपने आप तुम रहने तो
23:12मैं लगा देती हूँ न दीजे आप मुझे ठीक है यहां पैर में यहां यहां दर्द हो रहे है
23:30तुम्हारे हातों में तो जादू है तुम्हारे चूते ही दर्द बिलकुल कम हो गया
23:38और आपके कलम में मैंने आपके कविताओं की बुक पड़ी
23:44सच में यह तो बहुत अच्छी बात है मेरी बड़ी बहु को पेंटी का शौक है और छोटी को पड़ने
23:52का
23:54और क्या-क्या शौक है तुम्हारे मेरा मतलब क्या-क्या करना अच्छा लगता है
24:02मुझे ना घूमना अच्छा लगता है और नए नए लोगों से मिलना अच्छा लगता है उनके ट्राडिशन कल्चर को जानना
24:15अच्छा लगता है और मुझे किताबे पढ़ना भी बहुत पसंद है
24:21मुझे खाना बनाना भी अच्छा लगता है
24:24एक सेकेड थोड़ा उधर करना गर्दन ये क्या है
24:35ये तुम्हारी गर्दन में तिल है
24:39हाँ यहां भी है
24:41तुम्हारे शरीर में न और भी बहुत से जगह तिल होगे
24:45हाँ, एक यहाँ पे भी है, यहाँ भी है, और एक यहाँ भी है, और एक
24:53कुछ ने, कुछ ने
24:57लेकिन आपको कैसे पता?
24:59मुझे मेरी जन्दगी के तजुर्वे से पता है
25:03कि जो लड़कियां खुबसूरत होती है न
25:08उनके शरीर में बहुत सी जगते लोते हैं
25:11और तुम बहुत खुबसूरत हो
25:18अच्छा, थैंक यू
25:25अच्छा, एक बात पूछो
25:28पूछो
25:28आपको इतना सब लड़कियों के बारे में कैसे पता?
25:32सब लड़कियों में नहीं, केवल खुबसूरत लड़कियों में
25:37वो क्या है ना, खुबसूरती लड़कियों के लिए एक वर्धान है
25:43जिसके दम पर ना, वो कुछ भी पा सकती है
25:47अच्छा, जैसे?
25:52अब क्या बताएं तुमें?
25:56तुम तो बस हमें ये बताओ, कि वो क्या खुआईश है तुम्हारी, जो केवल हम ही पूरी कर सकते हैं
26:04सच कह रहे हैं, तुम्हारी वो खुआईश पूरी करने के लिए ना, हम इस समाज की सारी हदे तोड़ देंगे
26:12अच्छा, देखती हो कैसे, मैं चलती हूँ
26:22आयाये, तुम खुब सूरत ही रही, बहुत चालाग भी हो, और चालाग लड़कियां हमें बहुत पसंद है
26:57हेलो, हेलो, हाँ शेकर आप कब तक आओगे? तीन-चार गंटे लग जाएंगे, तुम खाना काकर सोजाओ
27:04ठीक है, सबने खाना खा लिया है, सिर्फ आपी बाकी थे
27:07ठीक है, तुम सोजाओ
27:11मैंने बेडरूम का दर्वाजा खुला ही रखा है, ठीक?
27:14हाँ, ठीक है, ठीक है
27:51हाँ, ठीक है, तुम खाना खाना खाना खाना खाना
28:37दीदी
28:41अरे सोचती रहेगी यह कुछ बोलेगी भी
28:44कुछ नहीं
28:51देख कवीता, अब जो मैं तुझे बोलने जा रही हूँ न, उसे ध्यान से सुन
28:55अपने पती को बोल कि तू उसके साथ बिस्तर पे खुश नहीं है
28:58और उसे यह बोल कि वो बिस्तर पे थार एक्साइटमेंट दिखा है
29:01मैंने बोला दीदी उनको, कितनी बार
29:06तो एक बार बात करके देखना
29:08अगर कोई रिजल्ट नहीं आया तो अपनी इच्छा कहीं और पुरी कर
29:12यह आप क्या कह रहे हैं दीदी
29:16देख कवीता, पती लोग अपने आपको खुश करने के लिए सौ जगह मुँ मारते हैं
29:21अगर हम और देख जगह मुँ मार भी लिये तो कौन सा पहार तुट जाएगा
29:25खुश रहना है अगर जिन्दगी में तो सबसे पहले खुद को खुश रखना सीख
29:29फिर दूसरों को, समझी?
29:51क्या हो अकवीता? बुक सहला आते हुए क्या सोच रही हो?
30:01कवीता, क्या सोच रही है?
30:05वो दीदी, कोई भी चीज को सहलाने से वो बड़ी नहीं हो जाती है
30:10अच्छा दीदी, एक बात पुछूँ
30:11हाँ, पुछो
30:15ये साइस का कोई असर होता है क्या?
30:19तो हम सही थे, तुम्हारे दिमाग में कुछ तो खुरा भात चल रही है
30:29हमें नहीं पता, हम बहुत संसकारी लड़की है
30:32अरे दीदी, बताओ ना, आपको पता होगा
30:35नहीं पता कवीता
30:39अच्छा, तब आपको भी पता नहीं
30:42देखो कवीता, जितना मैंने पढ़ा और जितना मैंने सुना है
30:45साइज से कुछ जादा फर्क नहीं पड़ता है
30:50अच्छा
30:51और यह आज तुभारी दिमाग में साइज की बात कहां से आ गई
30:55कुछ नहीं दीदी, वो बस ऐसे ही
30:59ऐसे तो नहीं आई होगी, बताओ क्या बात है
31:03आप वो सब छोड़िये, आप आपकी पेंटिंग दिखाये, कंप्लीट होई की नहीं
31:09वाव, वड़ ब्यूडिफुल पेंटिंग
31:12थैंक यू
31:14अरे वादी दी, आप तो फ्री टाइम में बैट बैट कर एक नंबर की पेंटर हो गई हो
31:25नमस्ते भीया
31:27जीते रहो, जीते रहो, कहां जा रहे हो? आफिस जा रहा हूँ
31:31अरे मैंने तुम्हें बताया था ना, कि मुझे आज ग्राम पंचाय जाना है
31:34भाई साब थोड़ा वो आफिस में आज जरूरी मीटिंग है, इसलिए जा रहा हूँ
31:37हाँ, ठीक है, मैं अकेले ही जाघा जाऊँगा
31:42के आती है कविटा है ना, उसको बोल देता हूं में
31:44उसे क्या ज़रूरत है परेशान करने की इस में परिशानी के भाई साब
31:48कविता कविता
31:54कविता तुम भाई साब के साफ पंचाय जओ ठीक है
31:59बैसाब मैं जा रहू हूँ हाँ
32:01जड़ा ठीक है
32:02अरे रुकिये बारिश हो रही है
32:04मैं छाता लेकर आती हूँ
32:10ये लीजे
32:17अच्छा तो कब चलना है जेड जी
32:19बस ये बारिश जैसे खतम होगी न
32:21तब ही हम निकल चलेंगे
32:23ठीक है
32:24ठीक है
32:36ऐसा कौन सा काम है जेड जी
32:38जिसमें मैं आपकी मदद कर सकती हूँ
32:39अरे आज बस ग्राम पंचाय तुम्हें एक मेटिक है
32:43वहाँ तुम्हें साज चलना है
32:46वहाँ इस साल में जितनी लट्प्यों की शादियां होगी है
32:48न उन सभी को बुलाए हूँ
32:49क्यूँ?
32:51अरे जवानी के जिवोश में ये बच्चे
32:55शादी होते ही बच्चे पैदा करने की जल्दी रहती है
32:57बस ये समझाना है कि उतने ही बच्चे पैदा करो जितनों को संभाव सको
33:06सच कहा जेड जी आपने
33:12वैसे तुमने मेरी कविता पड़ी?
33:14जी, सारी पड़ी
33:15कैसी किताबे पढ़ना पसंद है तुम्हें?
33:18बस, किताबे इंट्रस्टिंग होनी चाहिए
33:20पढ़ के मज़ा आना चाहिए
33:22बस
33:24मैंने किताब लिखी है
33:26मैं बता रहा हूँ तुमें
33:28तुम्हारे इंटरस्ट का पूरा मैटेरियल मिलेगा उसमें
33:30बहुत अच्छा लगेगा तुम्हें वो किताब पढ़की
33:33फिर तो मैं वो जरूर पढ़ूँगी
33:38पती लोग अपने आपको खुश करने के लिए सौ जगह मू मारते हैं
33:42अगर हम और ते एक जगह मू मार भी लिए तो कौन सा पहार तुख जाएगा
33:45खुश रहना है अगर जिन्दगी में तो सबसे पहले खुद को खुश रखना दे
33:49फिर दूसरों को
34:06आशर्मा जी
34:09अरे नहीं यार इतना बजट नहीं है मारा
34:12कोई और देख लो फिर तब क्या हुआ अच्छा ऐसा करते कि मैं पैसे ट्रांसर कर देता हूं मैं ठीक
34:18है
34:18हाँ क्या हुआ कुछ नहीं गई ब्रुकर का कॉल था वो जो फ्लैट पसंद आया था उसका तेड़ करोड बता
34:26रहे है इतना पैसा नहीं है
34:28हमारे पास अच्छा इसका मतलब है मेरा शहर जाने का सपना सपना ही रह जाएगा जिंदगी भर इसी गौव में
34:34रहका सडूंगी मैं और फिर शुरू हो गई दूसरा फ्लैट देखने को कहा तो है पता नहीं वो कब देखेगा
34:40तब तुम बुकिंग करोगे और कभ हम वहां
34:42पर रहने जाएंगे फिर रोना शुरू हो गया तो मत रूलाओ न मुझे एक ही इच्छा है मेरी दिली जाके
34:48रहने की वो भी पूरी नहीं कर पारे हो तुम भाईया कोशिश कर तो रहे हैं ठीक है आके बात
34:53करते हैं
35:03क्या देख रहे हो कुछ नहीं बत सोच रहा हूं कि हमारा बच्चा कब होगा बच्चा वो भी नहीं जल्दी
35:10हमारी शादी को अभी तीन महीने भी नहीं हुए हैं तो क्या तीन साल तक बेट करें
35:18मैं ये नहीं कह रही हूं तुम भाईया भावी को देखो उनकी शादी को चार साल हो गये हैं तो
35:25क्या उनकी जिंदगी खुशियों से भरी हुई नहीं है
35:31देखो तुम मेरी बात सुनो हमारी जल्दी ही शादी हुई है अगर हमारा बच्चा हो जाएगा तो हमारी भी जिन्दगी
35:37में खुशी आ जाएगी हमारा परिवार पूरा हो जाएगा तो हमारा परिवार अभी कौन सा दूरा है हमने कह दिया
35:43ना बच्चा हमें चाहिए लेकिन
35:45हमें नहीं चाहिए, खुद पैदा कर लो
35:53कविता है तो बहुत खुबजुरत
36:01बस उसी का ख्याल आ रहे है
36:06बस एक बर देख जाये तो मन को शांती मिले
36:18कर देख जाये तो मन को शांती मिले
37:01कैसी आवाज थी है
37:03कुछ नहीं बाहर वो में पानी पीने गई थी तो दर्वाजा बंद किया
37:10चीक है
37:23जब ही ना उसके करीम जाता हूँ
37:26मेरी धड़का ने खुद बखुद बढ़ते लगती है
37:30मेरी ने ना उसके करेंथे लगते लगते हैं
37:35कर द में वो दो दूब बखुद दो दो मेरी तो इड़ा है
38:23झाल झाल
38:44जिस तरह बारिश की बरस्ते बुंदों से
38:48सारे बेड़ पौदे हरे भरे हो जाते हैं
38:51ठीक वैसे ही तुम्हें देखकर
38:53मुझे सुकून मिल जाता है
39:11अच्छी वारगेनिंग तुने की आज
39:14मोलभा बहुत अच्छा कर लेती हो तो
39:17देख कविता एक महिने हो गए लेकिन तु अपनी प्रोब्लम अभी तक सॉल्व ने कर पा रही है
39:23तेरा पती कोई असमान से टपका हुआ नहीं है
39:26सारे मर्दों को सेक्स की भूख होती है
39:28अरे नहीं दिदी वो ऐसे नहीं है
39:32तो फिर कुछ ऐसा करो जिसे तुम्हें देख कर ये उनको सेक्स करने का मन करे
39:36क्या करूं मैं
39:38मिठी मिठी बाते करो छोटी छोटे कपड़े पहनो उनके सामने रोमांटिक स्टोरीज पढ़ो
39:45मूट तो बन ही जाएगा ना उनका भी
39:47मूट बनाने से बनता है ऐसे थोड़ी बनता है
39:54अब उसे समझ में आने लगा था
39:56जो रात को चोरी-चोरी उसे देख रहा था
40:00उसकी पती के सामने आके उसे छू रहा था
40:03वो कोई और नहीं जेड जी ही थे
40:06लेकिन अब उसे कैसी शरम
40:08उसे अब अपने जिसम को खुश करना था
40:11उसे समाज रिस्तों और नातों की अब कोई परवा नी रह गई थी
40:15लेकिन उसे अपने पती को भी एक बार और रिजाने का मन कर रहा था
40:23आज ओफिस नहीं जाना है क्या?
40:26नहीं आज घड से ही काम कर रहा हूँ
40:33कॉफि लाओं?
40:35नहीं
40:41अच्छा सुनो ना हम तुम्हें एक चीज देंगे तुम उसको पढ़ो गया है?
40:47क्या है तो?
40:53यह क्या है?
40:54पढ़ो ना
41:02कोमल को सुहाग रात के दिन ही पता चल जाता है कि उसके पती को प्यार करने में कोई रूची
41:07नहीं है
41:08वो सोच में पढ़ जाती है कि अपने पूरी जवानी ऐसे पती के साथ कैसे निकाले
41:12जिसे प्यार करने में कोई रूची नहीं है
41:15तब वो ठान लेती है कि वो ऐसा कुछ करेगी कि उसका पती उसके साथ रफ सेक्स करे
41:21उसे हर तरह के कामा सुत्र पोजीशन में सुख दे
41:25क्या बखवास है ये? क्या परती रती हुए ये? बागल हो?
41:29खबरदार, आइंदा से ऐसा कुछ मत पढ़ना, पकड़ो ये
42:08जब पती से सुख ना मिले तो कहीं और जाने में कोई बुराई नहीं है
42:12नहा इसी सोच में थी कि वो रमेज के साथ सोए या नहीं
42:18वैसे तो रिस्ते में वो उसके पती का बड़ा भाई था
42:21लेकिन ऐसा कुछ लग रहा था
42:26अरे? ये तो बिलकुल मेरे कहानी जैसी है
42:29नहा की हालत और मेरी हालत में कोई फर्क नहीं
42:34उसका पती भी उसे वो सुख नहीं दे पा रहा है
42:38जो शेखर मुझे नहीं दे पा रहा है
42:42इसका मतलब हम किसी ग्यार मर्द के साथ भी अपना सुख बाढ़ सकते हैं
42:48खेर आगे देखते हैं क्या होता है नहा के साथ
43:18क्या है
44:01आप अभी तक नाराज हैं नई देखिए हम तो बस आपको खुश देखना चाहते हैं
44:15एसे एसे गंदे बुक्स पढ़ कर हम ऐसे अगर गंदे बुक्स पढ़ेंगे क्या सन्सकार देंगे बच्चो को बात वो नहीं
44:21है आप समझने रहे हैं
44:23मैं नहीं समझ रहा हूँ
44:25क�िता अच्छा इनसान बनने के लिए बहुत कोशिश करनी पड़ती है
44:29सारी भावनाओं को मारना पड़ता है
44:31इच्छाएं कम करनी पड़ती है
44:33और बुरा बनने के लिए
44:34कुछ भी करो
44:35आप समझ नहीं रहे हैं
44:37बात वो नहीं है
44:39तुम ऐसा कुछ करो इमत
44:40जो मुझे समझाने की जुरुत पड़े
44:51क्या हुआ कविता
44:52सुभा सुभा तेरा मूँ क्यों उत्रा हुआ है
44:55कल हमने उन्हें एक रोमैंटिक स्टोरी पड़ने को दी
44:58कुछ काम बना
44:59काम बना
45:00या और बिगड़ गया
45:02क्यों
45:04अरे गुसा हो गय
45:06और कहने लगे
45:07ये गंदी कहानिया क्यों पड़ती हो
45:09कहते हैं हम संसकारी लोग हैं
45:11संसकारी
45:13देख तुझे न उसमें कुछ आग जलानी पड़ेगी
45:16अरे कैसे जलाओं आग
45:18थंडा पड़ा है पूरा
45:22बताना तो नहीं चाहती थी लेकिन बताना पड़ेगा
45:24क्या
45:25देख किसी को कहना मत
45:27जब हमारी नई नई शादी होई थी ना
45:29मेरे पती बहुत रोमैंटिक थे
45:34किसी ने सुना तो नहीं न
45:36चला तुझे बताती हो
45:38यह बात उन दिनों की है
45:40जब गर्मियों की छूटियां चल रही थे
45:43घर पर कोई नहीं था
45:44मैं और वो अक्केले थे
45:47और फिर
45:51अरे दीदी बताओ न
45:52कितना शर्माओगी
45:54अच्छा ठीक है सुन
45:58वाव दीदी
46:00आप तो बहुत लख्की हो
46:01वो तो हम है
46:04काश
46:05ऐसा ही रोमांस हमारा पती भी हमारे साथ करता
46:09अच्छा कभी ते एक बात बता
46:11तुझे कौन सी सबजी पसंद है
46:12क्यों दीदी
46:13अरे बता तो सही
46:15आलू की सबजी
46:17फेवरेट है मेरी
46:18अच्छ एक बात बता
46:21अगर मैं तुझे रोज आलू की सबजी खिलाऊ तो
46:24रोज आलू की सबजी
46:26बोर हो जाऊंगी
46:27बस
46:28तो ऐसे इनसान बोर हो जाता है
46:31रोज एक तरह की चीजे खाके
46:33रोज एक तरह की चीजे करके
46:34तो करना क्या पढ़ता है
46:36नए तरीक के ढूंडने पढ़ते हैं
46:38एक्साइट्मेंट लाना पढ़ता है
46:40और सबसे बड़ी बात हार नहीं माननी पढ़ती है
46:43चाहे जितनी बार भी कोशिश करो
46:45कभी हार ने माननी चाहिए और फिर से ट्राइ करना चाहिए समझी कुछ
46:52अच्छा चलो मुझे काम है मैं चलती हूं ठीक है
47:17अरे कवीता इतनी रात हो गई तुम सो इने अभी तक नई दीदी वो नीनने आ रही थी क्या हुआ
47:26कुछ बात हुई क्या नई नई कोई बात नहीं शेखर ने कुछ कहा नई नई दीदी ऐसी कोई बात नहीं
47:35है मैं बात करूं उससे
47:38नहीं दीदी उनकी तो आदत है थोड़ी थोड़ी बात पर गुस्सा करने की लेकिन वो थोड़ी देर में फिर ठीक
47:44हो जाते हैं तो तु इतनी रात में भी यहां क्या कर रही है मैं तो वो जीर जी का
47:49इंतजार कर रही हूँ वो अभी तक आये नहीं है न तो एक काम कर तु �
47:54जाके सोजा मैं हूँ ना मैं देख लूँगी अरे नहीं दीदी आप किचन में भी सारा का मकेले ही करती
48:01हैं आप जाएए सोईए जेड जी आते हैं मैं उनको खाना खिला के फिर सो जाओंगी चल ठीक है सो
48:08जाना ठाइम पे
48:25हैपी होली हैपी होली हैपी होली हैपी होली आपको भी तो बड़ी बहु जी खाने में आज क्या बनाया है
48:50आपका फेवरेट माल पुआ होली हो और उसके साथ
48:54माल पुआ भी हो फिर तो क्या मज़ा है अब एक काम करो मैं जा रहा हूं अपने कमरे में
49:02पर माल पुआ भिजवाना ना भूलना ठीक है जल्दी से भिजवा देना जरूर जरूर चलो
49:17जेड जी ये माल पुआ माल पुआ का इंतजार कर रहा था मैं जी खा लिजेगा अब मैं चल दी
49:24हूं अरे बिल्कुल खा लेंगे
49:25कहां चले अभी हमने कहां होली खेली है तुम्हारे साथ बस थोड़ा रंग लगा ले बस थोड़ा सा भावी खाना
49:47आज बहुत टेस्टी बना हुआ था थेंक यू चलिए मैं चलता अपने रूम में हां आरे सुनो कविता खाना तो
49:54लेके गई पाने ले जाना भूल गई
49:55तुम भाई साब को दे दोगे क्या पाने ठीक है ठीक है ठीक है ये लो
50:16हाँ शर्मा जी हाँ हाँ आपका फाइल भेजता हूं मैं अरे खुली है खुली मनाई अपने परिवार के साथ आपको
50:23कर दूँगा मैं सब कुछ मेल
50:24हाँ हाँ ठीक है चले ठीक है एपी हुली बाई बाई
50:43बाई साब पानी रख दे बेटा बहु अब हमारे सोने का टाइम हो गया है
50:55अब हम सोते हैं शाम को बात करेंगे
51:04अच्छा एक बात बताओ है बोलो तुम कब तक आ रहे हो अरे हम वह आ नहीं पाएंगे
51:11क्या लेकिन क्यों रहा दफ्तर में बहुत काम है अच्छा ठीक है हम अकेले ही सोजाते हैं लेकिन एक बात
51:30तो बताओ सुबह कब तक आओगे रहे हमें आते आते बारा बज जाएंगे
51:33कि बारा बजे हम चलो ठीक है हम दो पैर का खाना रेडी रखेंगे जल्दी आ जाना ओके ठीके बाई
51:45गुड़नाइट गुड़नाइट गुड़नाइट अरे
52:03क्या बात है ये बलाउस खुदी खुल गया या मेरे लिए खोल के रख है आपके लिए ही खोला है
52:09आप जैसे वो स्टोरियों में लिखते हैं न वैसे ही कीजे न भीग है आज मैं तुभे बिल्कुल वैसे ही
52:20प्यार करूँगा जैसे मैं कहानियों में लिखता हूँ वो नश
52:33निशाना बना लिया वो उसके साथ भी आज रात हम विस्तर हो गए उसने उसकी पूरी जवानी को लूट ली
52:41उसके पती का ना आना उसके लिए वर्दान साबित हुआ ये कहानी तो मेरी कहानी है इसका मतलब जिड जी
52:49की कहानी का सिर्फ एक पात्र थी मैं ये इतने दुनों मे
52:52सब कुछ जो चल रहा था वो मेरी खुद की कहानी थी और मुझे पता ही नहीं चला मतलब मेरा
52:58इस्तमाल की आजेड जी ने वो भी किताब जानी तो

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