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सांवलिया सेठ को अपना बिजनेस पार्टनर क्यों बनाते हैं भक्त? देखें अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय

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00:07मेरे तामरे की पुर्ली आजे
00:32जब बिजनस पार्टनर बन जाए खुद भगवान
00:43तो भक्तों के कारुबार में कैसे हो नुकसान
01:00लेकिन पार्टनर्शिप में भूल कर भी चीटिंग मत करना
01:12वरना सूद समेत सब वसूल लेगा सामलिया सेट का विधान
01:36शर्टनर्शिप में का
01:52कि नमस्कार मैं हूँ श्पेता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक
01:57कि श्रीक्रिष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान से पूरी दुनिया को कर्म करने का उपदेश दिया कर्म करो फल की चंता
02:04मत करो कर्मन्यवादिकार रस्ते माफलेशु कदाचल
02:07लेकिन यहां बेवाड के पावन भूमी से उनके जो भक्त हैं केवल कर्म नहीं करते बलकि अपने व्यापार में श्रीक्रिष्ण
02:18को अपना बिजनस पार्टनर बनाते हैं
02:21तो आज श्री सावलिया सेट से हम आपको ये अद्भूत और विश्वस्निय और कल्पनिय रूप दिखाने वाले हैं प्रभू श्री
02:30क्रिष्ण का
02:42दान में रकम आती है तो इतनी कि दिनों दिन गिनती ही पूरी नहीं हो पाती
02:52यहां पर जो चड़ावा आता है उसकी गिंती में सच में बहुत बहुत दिन लग जाते हैं
02:57जी अभी चे से साथ दिन लग रहे हैं हर साल जो चड़ावा है हर मन्त वो बढ़ता जा रहा
03:03है
03:07सिद्धी ऐसी की बड़े बड़े कारुबारी विनम्रता से उन्हें अपना बिजनस पार्टनर बनाने की विमिती करते
03:25प्रसिद्धी ऐसी की देशी नहीं विदेशों से पार्टनर्शिप की अरजी आती है
03:30और एक बात और समझ लीजिए जितना दान दिया जाता है उससे कहीं अधिक आए
03:36उस भक्त की होती है क्योंकि बिजनस पार्टनर बनाते हुए
03:40वो एक तैप परसेंटेज भगवान को देने की मननत मांगता है
03:48कोई मांगता है कि मैं अगर आना पोर्टूनर लेके आज़ों
03:52तो फिर वो क्या एक छोटा पोर्टूनर चांदी का बना के सांवले सेट को बेट करता है
03:56यहां तक कि कोई पेंट्रूल पंप खोलता है तो वो चांदी का पेंट्रूल बना के लाता है
04:00सांवले सेट करता है
04:02बगवान सांवले सेट धर्थी पे से कोई देवता नीजिसके नाम के पीछे सेट लगा हुआ
04:05केवाल एक ही है सावले सेट. ये लोगों के बिजनस में पार्ट कसिप में रहते हैं।
04:11और बालाइना है, जो भी बूलता हो धाकुर जी को बोलता है।
04:16उसको जैसे मुनापा होता है, वो पार्तनर की साबसे प्रसेंटेज थाकुर जी को पहेट करता है।
04:25जी, बिजनस पार्टनर, अद्भुत है न ये भाव, यहां कृष्ण, योगी राज कृष्ण नहीं, मुरली धर कृष्ण नहीं, केशव नहीं,
04:34माधव नहीं, मदुसूधन नहीं, जगनाद नहीं, वो यहां सेठ हैं, सेठों के सेठ, सांवलिया सेठ.
04:42भक्तों के बिजनस पार्टनर समलिया सेट
05:10इश्वर और भक्तों के बीज आस्था का संबंद होता है
05:13लेकिन जब उस संबंद में अर्थ शास्त्र आ जाए तो होगा नहीं अद्भुत
05:18कैसे बने भगवान किसी आम इंसान के बिजनस पार्टनर
05:25मेरे भी 2011 से मैंने अपना बिजनस टार्ट किया
05:30तो भगवान को उसी दिन से जो भी हमारा प्रसेंट ते है वो भगवान के बंडार में डाल देते हैं
05:41जब भगवान पार्टनर हो तो लिखापढ़ी का क्या कोई सिस्टम होता है
05:46कैसे बनता है भगवान से पार्टनरशिप का कॉंट्राक्ट
05:55आज कल जो बिजनेस पार्टनर्शिप होती है तो उसमें तो इतना कोर्ट के डॉक्यमेंट पर साइन करके भी लोग चीटिंग
06:02कर देते हैं दूसरे से यहां तो केवल मन में बोल रहे हैं लेकिन इमानदारी से पूरी आकर बिल्कुछ सांवरिया
06:09सेट के यहां जिसने जो बोल
06:33किसान भी नौकरी पेशा भी सब सांवरिया सेट से पार्टनर्शिप कर सकते हैं बागी तो छोड़िए यहां तो छोटे-छोटे
06:41बच्चे भी अपनी पार्टनर्शिप का प्रस्ताव लिए सांवरिया सेट के दर्बार में अर्जी लगाते हैं
06:46बस इमानदारी से यह साज़ेदारी निभानी होती है वैसे भी भगवान से चोरी तो संभवी नहीं है
06:57आज अदभुत और विश्वसनिये और कल्पनिये में हम आपको दुनिया के सबसे अनूठे बिजनस पार्टनर से मिलवाएंगे
07:05उनकी कमाई भी बताएंगे उनका खजाना भी दिखाएंगे और ये भी बताएंगे कि भगवान कृष्ण यहां सेठों के सेठ सावलिया
07:15सेठ क्यूं है
07:22श्री कृष्ण बासुरी के तान में भी है युद्ध के मैदान में भी है गीता के ज्यान में भी और
07:29बात जब व्यापार की मुनाफिकी आती है
07:32तो कृष्ण जी सावरिया सेठ बनकर गर्दी पर विराजमान है और आस्था और अर्थ शास्त्र का अध्भूत संगम दिखाते हैं
08:00एक नहीं, दो नहीं, पूरे साथ दिन चलती है चड़ावे की गिंती
08:07केवल भारत नहीं, उननीस बीस देशों की फॉरेन करेंसी का चड़ावा आता है
08:18दस बीस नहीं, दो सो से ज्यादा लोग अलग-अलग शिफ्ट में गिंती करते हैं
08:27कुछ ऐसा है सावलिया सेठ का बंडार
08:31राजिस्थान के चित तौरगड में मंडाफिया गाउं में स्थित
08:35सावलिया सेठ का मंदिर पूरी दुनिया में इकलोता ऐसा मंदिर है
08:39जहां भगवान के नाम के आगे सेठ लगा है
08:47नाम से ही आपको एक स्री सावलिया सेट बगवान के आगे किसी के सेट लगता नहीं है
08:54तो ये स्वयम सेट हैं तो सेट ही तो व्यापार से इनका नाता है व्यापारी भी इनके उपर विश्वास करते
09:01है
09:24सावलिया सेट के रूप में कैसे स्थापित हुए इसकी कहानी आगे सुनाएंगे
09:29पहले आपको लिए चलते हैं वहाँ जहां इनसान और भगवान पार्टनर्शिप के धागे में बनते हैं
09:36बहुत माननेता था इनका तीशली दर्सन करने लिए पहली बार आ रहा है
09:40गैसा मैंस में सुनाएं आपर आपर अच्छा भग अश्षें हुआ हुआ है अट्स एक शुरू हुए है और बिएकोल भी
09:49ऐसा लग रहता एक्षिप बड़ती जारी बद्टी जारी बहुत शरदा आ रहें बहुत ज्यादा
10:11कोई यहां आता है अपने कारोबार में बेहतरी की कामना लेकर और सावलिया सेट को अपना पार्टनर मान कर मन
10:18ही मन मुनाफे में उनका पसेंटेज तै करके चला जाता है
10:46कोई यहां आता है बाकाइदा स्टैंप पेपर पर सावलिया सेट को अपना बिजनस पार्टनर घोशित करके
10:53कारोबार के लाब में उनका हिस्सा तै करके चला जाता है
11:20कोई यहां कारोबार में लाब होने पर सावलिया सेट से तै की गई पार्टनर्शिप की शर्तों के रूप में उनका
11:26हिस्सा देने आता है
11:29जब भी बिजनस पार्टनर्शिप होती है बहुत लिखा पढ़ी होती है मन में यह चिंता भी लगी रहती होगी कि
11:36पता नहीं
11:38कोई छीटिंग न कर जाए
11:40लेकिन यहां सावलिया सेट के साथ कैसे पार्टनर्शिप होती है कोई भी व्यक्ति आये हाथ जोड़े और यह कहे कि
11:47प्रभू मेरी जो कमाई है उसमें से इतना प्रतिशत है तब वो एक प्रतिशत भी हो सकता है पांच प्रतिशत
11:52भी हो सकता है कितना भी प्रतिशत हो सकता
11:56कमाई मेरी होगी उसमें से मुनाफे का इतना प्रतिशक में आकर आपको चढ़ाऊंगा बाकी किसी भी जगे चीटिंग हो सकती
12:05है लेकिन यहां सावरिया जी सेठ है एक-एक पैसे का हिसाब करते हैं तो कोई भी व्यक्ति अगर मन
12:12में सोचके जाता है तो वो चीटिंग विल्क
12:31भूल कर भी कोई सावरिया सेठ से तै किये गए परसेंटेज में बेइमानी नहीं करता
12:42इसी रूप से सावरिया सेठ देता है तो फिर लेता भी है
13:09लोग सावरिया सेठ को वादा की हुई राशी को लेकर इतना सजग रहते हैं
13:13कि दुनिया के किसी भी कोने में रहें समय पर वो परसेंटेज भेजना नहीं भूलते
13:18हाँ जिसका जितना सामर्थ उसी के अनुसार भगवान को अपनी आस्था के बंधन से जोड़ता है
13:25और कामना पूरी होती है तो चड़ावे का वादा पूरा करता है
13:32सामर्या सेफ को अगर लोग अपना पार्टनर बनाते हैं तो ऐसा नहीं है कि कोई बहुत बढ़ी रकम की आपेट्शा
13:38पीश्वर उनसे करते हैं क्रिशन जी उनसे करते हैं अपने सामर्थ के अनुसार दस्दस रुपए के नोट से लेकर
13:45एक ऐसी राशी भी जो कहते हैं कि जब दान पेटी खुलती है तो कई-कई दिन लग जाते हैं
13:53जिन्ती करने ले
13:58कोई मुठी भर छोटे-छोटे नोटों की भेट के साथ भगवान के दरबार में अर्जी लगाता है
14:05तो कोई भगवान से मांगा हुआ मिल जाने पर पूरी श्रद्धा और समर्पन के साथ सोने चांदी की भेट लेकर
14:13आता है
14:16आप लुगों ने जो आज चारा काटने के मशीन चड़ाई है ऐसा क्यों ये मेरे भाई ने साई इसको सावरिया
14:25सेट को बिजनिस पार्टनर बना रखा है बाबा की बहुत महरवानी है जो बाबारे बोला था उसने जो बाबाने पूरा
14:30किया है इसलिए आज में चड़ाने क
14:50अज़ा बनाया तब से जीवन कैसा चला उसके बाद इतना सफल हो गया कि मैं कैब नहीं सकती कि बाबा
14:55का कितना दन्यवाद दूब बाबाने उसके बाद हम बहने हमें भी गाइड करता है ये बाबा को आप बिजनिस पार्टनर
15:02बनाओ बाबा की यहां आओ मेरी ये चीज प
15:13बाबा मुझे अपने आप देता है यानि जो जिस काम में सावलिया सेट को अपना पार्टनर बनाता है उसी हिसाब
15:23से फिर सोली या चान्ती में अपनी भेट लेकर आता है
15:30लोगों को पेदल आते हुए देखा है हमने और अगले महिने ही वो गाड़ी लेकर आते हैं और फिर चान्ती
15:36की गाड़ी सावलिया सेट के बेट करते हैं
15:54हिंदू कैलेंडर के हिसाब से हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर दशी को राजभोग आरती के बाद मंदिर का
16:02मुख्य दान पात्र खोला जाता है
16:04साल में 11 बार यहां गिंती होती है जिसमें दीपावली के समय दो महीने की गिंती एक साथ होती है
16:11इस गिंती में 200 से अधिक लोग शामिल होते हैं जो CCTV के निगरानी में काम करते हैं
16:18इनमें मंदिर के सभी पदाधिकारी, प्रिशासनेक अधिकारी और बैंक कर्मचारी शामिल होते हैं
16:24और ये तो किवल नगद या ओनलाइन राशी की बात हुए
16:27यहाँ पात्निशिप में सोने चांदी का भी भरपूरदान होता है
16:34वैसे तो सामरिया जी का जो खजाना है वो तो हर और है आपको हर और देखेगा
16:38लेकिन यह जो कक्ष है यह बहुत महत्वपूर इसलिए है क्योंकि यहाँ पर आप चांदी का जूला भी देख रहे
16:44हैं
16:44चांदी का यह रत देख रहे है पीछे जो आप बता रहे है कि 1960 में मुंब़ भी सबन कराया
16:51था
16:51तो यह यह रत कितने कितना क्यांदी होगा स्कॉत है इसमें लगए 400 कि लिख अभू चांदी लगी है
16:58400 कि ल chut chamado है हुई है ए और यह रत 2012 में मना के मगवाया था
17:04और वो रत 1960 से लेकर के 2016 तक उस रत को उप्यूग मिलिया था
17:10हर साल जल जूलनी एकादशी के दिन स्री सामलिय जी इसमें बिराजते हैं
17:15बाल स्वरूप उनका और फिर पूरे नगर में ब्रह्मन करते हुए
17:22जूलनी जाते हैं फिर उसके बाद आपीस आएं
17:28लंबा बनाया हुआ है उसे खींचते हैं लोग परंपरा वही है कि अपने भक्तों के बीच में पहुचते हैं
17:37कि सठीजिए बरत को के वीच में जाते हैं और बगत इस पूरे रत को खीज करके पूरे गाउं में
17:44बर्मन कराते हैं
17:45यह जूला भी चांदी का है जिस रावनमास में सावर्य जी के बाल स्वरुप को इसमें बेटा करके पूरे सावर्य
17:55मास में जुल्वाते हैं
17:56उसका बजन कितना होगा चांदी का इसका 100-700 किलो चांदी उसमें भी है
18:02तो भक्त आप देखेंगे यहां पर जितने हैं वो सब कोई भी किसी तरीके से अपने मन में नहीं रखता
18:08है पूरा जो सावर्या सेट उन्हें देते हैं वो वापस सावर्या जी पर लुटाते हैं
18:37कारुबारी और कामकाजी लोग ही नहीं, बच्चे भी सावलिया सेट की भक्ती में आस्था रखते हैं।
18:44बहुत देर तक सामरिया जी के सामने हाँ जोड़कर खड़ी थे हैं।
19:14उनके सामने हाढ जोड़ कर आज जोडने के लि के तोnh मांगा है आज कुछ गुछ मांगा जी से के
19:24लिखा है
19:25कुछ मागा क्छ नहीं मागा क्या नम है एच्छ लकता है अच्छ लगता है उनका चहरा बहुत अच्छ्छ
19:41चहरा अच्छा लगते है सावड जी का हाँ और सावरिया जी लगते हैं किता भेव आप लोग को प्रेम करते
19:48है उत नहीं हां पका harus
19:54कि यहां पर आज स्कूल से सब आये हैं सारे और ऐसे आने को मिलता है तो अच्छा लगता है
19:59सबको यहां पर आके
20:12यहीं हमारी नज़र टिकी सीरियल तारक महता का उल्टा चश्मा की अभिनेत्री अंजली पर
20:19कि आप भाभुग विधी दर्शन करते हुए जी सावर्या सेथ के क्या वज़े जो ऐसा इमोश्टू कनेक्ट वैसूस करती है
20:27प्रथम वार हमाएं यहां पर आज आमंत्रन मिला है सावर्या
20:33चेटका और कहते हैं कि जब अच्छे लोग संत महंत और भगवान के प्रांगन में जाने का अवसर मिलता है
20:40ना वो एक संकेत होता है कि आप सही प्रवाह में बह रहे हो तो यह जो हमारे जन्म से
20:49पहले हमारे माता-पिता की जन्म के बीज बोए गये हैं संसकार के प्रेम के �
20:54और श्रद्धा के भक्ति के वो सारे जब हम बच्चे ऐसे परिसर में जाते हैं तो वो पूरे परिवार का
21:02जो भक्ति धागा होता है वो जागरुत होता है तो शायद वहीं हमें कमपन दिख रहा है आपको और आप
21:13जैसे प्रतिभाय यहां उपस्तित होना आप खुद कहिए
21:16यह वाइब्रेशन कैसे है हमें एक दूसरे को मिलने में देर नहीं लगी तो यहीं कृष्ण का जादू है प्रेम
21:24भक्ति और निसवार्थ भाइचारा और एकता यही है राधा कृष्ण और उनका प्रेम तो आइक पील आपका यहां होना और
21:35हमारा इस वक्ति यहां होना आ�
21:40सेख ने आशिरवाद दिये हैं आदभूत रहता है मंदिर प्रांगण में भक्ति का माहर जहां हर कोई सावरियाजी की भक्ति
21:59में जूनता रहता है
22:01मिथी मिथी मेरे काम रे की पुर ली आजे रादे हो कर शाम की दिवानी राता रानी आजे
22:38यहां पर जो बहुत सुन्दर पतिमाय आप देख रहे हैं
22:48यहां पर गाउवालों द्वारा ही बनवाया गया था
22:52उसके बाद धीरे धीरे विस्तार होते होते इस भव्य रूप में यह मंदिर आज दिखाई देता है
22:58लेकिन इन मूर्तियों के मिलने की कथा भी आलोकिक है
23:21जो रूप संसार में और कहीं नहीं वो राजिस्थान के इस गाउं में सावलिया सेट के रूप में कैसे स्थापित
23:28हुआ
23:31बिजनस गौड के रूप में भक्ती का जो भाव कहीं नहीं
23:34वो यहां मान्यताओं में कैसे आया और भगवान सेट कैसे बन गए
23:40इन सवालों के जवाब कुछ इस रूप में मिलते हैं
23:58कहते हैं कि सुदामा जब भगवान कृष्ण से मिलने द्वार का आये
24:02तो उनके निर्धन परिवार की मदद भगवान कृष्ण ने सेट के रूप में की थी
24:07तो वो सावरिया सेट कहलाए जो बाद में सावलिया सेट हो गया
24:13मानिता ये भी है कि गुजरात के कृष्ण भक्त नर्सी की नातिन के विवाह में
24:18भगवान कृष्ण ने भात की रस्म एक सेट के रूप में अदा की थी
24:23तो वो सेट कहलाए
24:25ये माना जाता है कि साधूओं की एक तोली थी
24:29जिसके पास भगवान कृष्ण की चार मनुहारी प्रतिमाय थी
24:33जिन में से एक आज सावरिया सेट के रूप में स्थापित है
24:37मीरा भाई जो पहले से ही भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थी
24:42एक बार उन्होंने साथों की टोली के साथ भगवान के इस रूप के दर्शन किये थे
24:47जिसमें वो ऐसी रम गई कि फिर महल छोड़ दिया
24:52कहते हैं औरंगजेप के समय में जब मठ, मंदिर और मूर्तियां तोड़ी जा रही थी
24:58तो साथों ने भगवान कृष्ण की मूर्तियां मेवाल क्षेत्र के बांगुण में एक पेड के नीचे दबा दी
25:05समय बीता गया और मूर्तियां वहीं जमीन में दबी रही
25:08फिर कहते हैं अठारा सो चालीस में भोला राम गुर्जर नाम के एक शक्स को एक स्वपन के बाद ये
25:16मूर्तियां मिले
25:17जिनको यहाँ पर दो सदी से अधिक पहले मिले सावरिया जी उनके ही परिवार से आप हैं सुरेश जी
25:25आप बताईए कि कौन सी पीड़ी अब हो गए हमारी साथ वी आट वी पीड़ी चल रही है अभी वरतमान
25:31में
25:32बोली राम जी का जनम दूदा जी के पुत्र थे वो अठारा सो एक के आस पास उनका जनम हुआ
25:38है
25:38और उसके बाद 1834 में सावरिया जी की मूर्ती यहां से 7 किलोमेटर दूर हमारा मुख्य काम गायों को गाय
25:47पालन का था
25:47तो हम यहां से 7 किलोमेटर दूर हमारे पूरवज वहां गाय चराने के लिए दूर दूर तक जाते थे तो
25:53वहां सब नाया था
25:54और वहीं उनको मूर्ती मिली थी
25:57बोली रामजी बड़ाना गुजर को
25:59जो सबसे उत्म जगज़ होती है
26:03वो हमारी पानी पीने की जो परेंडी होती है
26:05उस पर लाके उनको विराजमान किया
26:07अभी भी मंदिर की मूर्ती है
26:09वो कच्चा इस्तानी है अभी तक
26:12मूर्तियां निकालते समय एक मूर्ती खंड़ित होगई थी तो उसे वापस जमीन में समाधी दे दी गई बाकि तीम मूर्तियां
26:20निकाल ली गई
26:24एक मूर्ति मन्राफिया में भोलाराम जी के घर के मंदर में स्थापित हुई जहां आज मुख्य सावलिया सेथ मंदर है
26:31दूसरी मूर्ति भादसोडा में मंदर बना कर स्थापित की गई और तीसरी मूर्ति बांगुण में एक मंदर में स्थापित है
26:41तीनों मूर्तियां कुछ किलोमीटर के दाइरे में ही हैं और सावलिया सेट भक्ती का त्रिकोन बनाती है
26:48इस पूरे क्शेत्र को सावलिया सेठ क्शेत्र कहा जाता है
26:52अधिकतर भक्त तीनों मंदिरों की वार्शिक यात्रा भी करते है
27:27मंदिर का निर्माण जरूर लगभग दो सदी पहले हुआ
27:31लेकिन सावलिया सेठ की मूर्ती बेहद प्राचीन है
27:37गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते है योग अक्षेमम वहाम्यहम यानि की भत्त की हर जरूरत और सुरक्षा का जो
27:46जिम्मा है वो मेरा है
27:48अब अलग-अलग रूपों में आपने प्रभू श्री कृष्ण की अराधना होते देखी है
27:54यहाँ पर जिस रूप में है वो अलग है सेठों के सेठ, सावरिया सेठ ये मेवाड और मारवाड का क्षेतर
28:03है
28:03बड़ी संख्या में उद्यमी, उद्योग पती होते हैं यहाँ पर, तो यहाँ पर भक्ती, यहाँ पर सुरक्षा, यहाँ पर जरूरते
28:13जलती हैं, तो ईश्वर भी उसी रूप में सामने आ जाते हैं।
28:35हमारा केलू पोश जो गर निवास करते थे हम, उसमें सामरेजी को बिराजबान किया था, जैसे जैसे ख्याती और गाव
28:42के लोगों ने समय के साथ सयोग करते गए, उसके बाद बड़ा मतलब यह तीसरा मंदीर था, मतलब मेरा तो
28:51दो मंदीरी देखे मैंने, लेकिन हमारे पू
29:02कुछ मकान में पहले सामरेजी को बिराजबान किया थे, और उसके बाद जैसे जैसे इंकम बढ़ती गई, गाव का चंदा
29:09सयोग जैसे मिलता गया गाव के लोगों का, उसके अनुसार मंदीर को एक दिरे दिरे इसको बहविक किया गया
29:18कहते हैं 1842 में, जब मनडाफिया में मूर्ती की स्थापना हो रही थी, तब उसक्षेत्र में मेवार के व्यापारियों का
29:27अच्छा रसूख था
29:28कुछ व्यापारी मूर्ती स्थापना के समय वहां मौजूद थे और उन्होंने भगवान से प्रात्ना की कि उनका व्यापार अच्छा हो
29:36जाए, तो कमाई का एक हिस्सा हर साल चढ़ाएंगे
29:40कहा जाता है कि व्यापारियों का कारोबार अच्छा चल निकला और इस तरह शाम सुंदर भगवान सावलिया सेथ हो गए
30:11अपर के माथो बाहा भाए अच्छा निकले हो बंका तरहों का एक हुआ तरहता है
30:26कर मोई इस भीज़ प्षक्दर dabह भित इस तरहता है
30:39आप लोग कब से भजन काते हैं सामरिया जी के यहां वैसे तो परंपरा चली आ रही है
30:44मतलब 40-50 बरसों से हम में जब से यहां मंदिर में 2005 से तो में रेगुलर कंटीडूर ठागुर जी
30:51ने लगा रहा है मेरे को
30:52हरी किरतन करने के लिए उनकी किरपा बगेर कोई नहीं पाता है पर फिर भी उन्होंने बड़ी कृपा है जब
30:58आप लोग भजन का रहे थे तो ऐसा लग रहा था जैसे कि
31:02एक समान्य रूप से गा नहीं रहे हैं बलकि वो दिल से निकल रहा है बगवान के नाम में ही
31:11बगवान है बगवान के नाम से ही यह सारा अनम जो बगवान के नाम में ही है और यह कहीं
31:17पर भी बैटके कर सकते हैं कोई भी है ना क्योंकि नाम नाम संकिर्टनी चला रहा है यह
31:24वो सब के लिए कर सबके कल्यान के लिए और ये कोई साउंड का और इसा नहीं सीधा सिंपल करते
31:30हैं तो मरी के दिल से उस समय निकल जाता है आमको पता नहीं रहता है क्या हो रहा है
31:34इतनी एनरजी प्रभु के दरबार में आपाती है अपने किसी डिस्को डीजे पर भी अगर �
31:40कर नाचना चाहें तो न नाच पाएंगे इतना अनंद और उस सब एक सिंपल आ भार्मोने और तबले पर ये
31:46इस आवाज पर इतना किसी को नाचना प्रभु के दरबार के अलावा कहीं संभाव नहीं अती होता है पूरा बनता
31:54है पूरा है एक साथ भगवान की नाम का एक सा
32:16सब के पार्टनर अता है जब से मैं ने हो समाला तब से ड्रेस बना रहा हूं
32:37तो ठाकूर जी मुझे इतना दे रखा है कि अब कोई जरूत नहीं यह है अमर इतनी कृपा है और
32:43इनके कपड़े डेली नहीं बनते हैं और वो पिनाते हैं बस यही काम है हमारा
32:48साल उन्नीस सो में महराणा फत्र सिंग ने मंदर का विस्तार करवाया
32:54पत्थर की सीडियां संगे मर्बर की दीवारें बनमाई आजादी के बाद 1950 में मंदर का प्रिशासनिक धाचा सावरिया मंदर समिती
33:03बनाई गई
33:05पहले अध्यक्ष बने भीलवाडा के एक कपड़ा व्यापारी जिन्होंने मंदर में दान रिजिस्टर प्रणाली लागू की
33:11ताकि सारा ब्योरा पारदर्शिता से सामने रहे
33:151970 में उद्योगों का विकास शुरू हुआ तो सावलिया सेट के दर्बार में दूर दूर से व्यापारी आने लगे और
33:23मंदर की प्रसिद्धी पूरे भारत सहित विदेशों तक फैल गए
33:281985 में आधिकारिक रूट से मंदर को श्री सामरिया सेट मंदर ट्रस्ट मंडाफिया भूशित किया गया
33:37मंदर के चड़ावे से अस्पताल, सडकें, आसपास के गाउं में बिजली और बाकी धर्मार्थ काम शुरू हुए
33:47मंदर के साथ में 16 गाउं और हैं जिनमें भी हम विकास कर रहाते हैं
33:53मंदर के आसपास के 16 गाउं है उनमें भी सामरिया जी मंदर सडकें उनके वहाँ पर रोल लाइट, इस्कूल की
34:01विवस्ता, होस्पिटल की विवस्ता हैं
34:12मंदर वर सभास की बना हुई है यहां पर जितने स्कूलgrass सारे स Авघलाजी मंदर की योर से नाम से
34:22बाइब वाइब
34:36अज भी मंदिर के चढ़ावे से बहुत से समाध सेवा के काम होते हैं और एक विशाहल गौशाला भी चलाई
34:43जाती है
34:45सामलिया सेट के दर्बार से जुड़ें लोगों के ऐसे ऐसे अनुभव हैं जो उन्हें वो किसी चमतकार से कम नहीं
34:51लगते
34:53जो सबसे पुरानी और जो सबसे फेमस कता है वो यह है कि एक वियापारी था जो कि अफीम की
35:01गाड़ी लेके भगवान को अफीम चलाने आया था बट उसकी गाड़ी पुलिस ने बीच में पकड़ ली थी
35:05तो उसने बगवान को कहा था कि बगवान मेरी ये गाड़ी आप बचवा दीजिए तो मैं पूरी ट्रक आपको चड़ा
35:11दूँआ
35:11तो जब पुलिस ने उस गाड़ी को खोला तो उसमें वो अफीम गुड बन गया
35:25सावलिया सेज की क्रिपाओं का बखान उनके भक्तों को अंदर तक श्रद्धा भाव से भीगो देता
35:31जब वो दर्बार में आते हैं तो दुनिया भूल कर खुद को सावलिया सेज के चर्ड़ों में सौप देते हैं
35:45यह अद्भूत आर्थी सवा घंटे तक चलती है यहाँ पर देखिया हर कोई भक्ती में तलीम यह आर्थी लगातार चलती
35:53रहती है
35:53सुबह 10 बजे जो चुरुआत हुई थी वो सबा 11 बजे तक चलती है अलंकि आर्थी का समय अलग अलग
36:00है
36:00इस समय की आर्थी जो हम यहाँ पर देख रहे हैं इसके बाद सामरिया जी विश्राम करेंगे उसके पीछे की
36:07सोच भी और कल्पनी है
36:27सामरिया जी को पुकारते पुकारते कब आखें भीगने लगती है
36:31कब मुस्कुराहटे तैर जाती है
36:33कब सुदभुद खो जाता है इसका अंदाजा भक्तों को लगता ही नहीं
36:38सब सामरिया जी का हो जाता है और सब सामरिया जी के हो जाते है
36:43सामलिया सेट के प्रतिभक्ती का ये द्रिश्ट अद्भुथ है
36:46तो सामलिया सेट की आरती का क्रम भी उतना ही अद्भुथ है
37:11सुबे के साढ़े पाँच बजे मंगला आरती से सावलिया सेट की पूजा दर्शन शुरू होते हैं
37:16और देर रात तक उनके दर्शन होते हैं
37:20यहां सावलिया जी की पूजा करने वाले पूजारी भी अद्भुत हैं
37:28क्या परंपरा है कौन पूजा कर सकता है सावलिया जी की पूजा खाली पूजा दी कर सकता है और नहीं
37:34कर सकता है
37:58कितना अद्भुत संबंद है यहां भगवान और भक्त का जो पारिवारिक रिष्टों जैसा है
38:04जिसमें विश्वास सबसे उपर है
38:25कारोबारी व्यस्ताओं में एक बात कही जाती है कि दम लिर्ट की भी फुरसत लिए
38:30कुछ ऐसी ही व्यवस्ता सावलिया सेट की भी है
38:32जो पूरे दिन में केवल दो से धाई घंटे ही आराम करते हैं
38:36बाकि पूरा समय भक्तों की पुकार सुनते हैं
38:40जब हम यहां पर आरती देखते हैं आरती के बाद अभी जब कपाट बंद होंगे
38:45तो सावरिया जी के विश्राम की जो सोच है वो उसके पीछे क्या कारण है
38:52उसका कारण यही है कि बगवान सुबह से लेकर रात तक जो लाखो शद्धालूं को अपना आशिरवात देते हैं
39:00तो दो गंटे के लिए बगवान को भी थोड़ा सा आराम देने के लिए वो प्रक्रिया है
39:21कहने को कहा जा सकता है कि क्या भगवान को भी आराम की जरूरत होती है
39:25लेकिन जब रिष्टा ही भगवान से पार्टनर का हो तो भक्ती भाव में भगवान को विश्राम की भी व्यवस्था की
39:32जाती है
39:32प्रति दिन भगवान को उनकी रुची के अनुसार अलग-अलग भोग भी चड़ाया जाता है
39:41भोग क्या लगाते हैं?
39:42भोग यहां पर कभी जले भी लगती है, कभी काजू कतली लगती है, कभी देसी गी से बनता है लड़ू,
39:49मठड़ी
39:49भगवान को मीठा पसंद है?
39:51मीठा बिलकुल पसंद है, सुबह साड़े पांच बजे माखन मिश्री का भोग भी डेली लगता है
39:55और शाम को अभी भोग लगा है, तो चक्की का भोग लगा है, देसी गी की चक्की का
40:06दरसल भक्त जब अपना कारुबार सावलिया सेट को सौपते हैं, तो ये भाव रहता है कि भगवान ही कारुबार की
40:12असली मालक है
40:13और वो खुद सिर्फ केर टेकर, और जब भाव केर टेकर और मालक का आता है, तो स्वत ही भगवान
40:21को शास्त्रों से अलग पिता, भाई या मित्र मान लिया जाता है, जो जीवित हैं और सब तरह से मदद
40:28करते हैं, और यही है सावलिया सेट के प्रती, भक्ती का सबसे अद्
40:33रूप, भक्तों को जिस रूप में आवशकता होती है, लीला धर वो रूप धर के भक्तों की साहता करते हैं,
40:46अद्भुत, अविश्वस्निय, अकल्पनिय में आज के लिए इतना ही, पियुश मुंद्रा, अभिशेक सिंग और कैमरा परसन सेयद मौसन और हितेश
40:54कुमार के स
40:55मुझे दीजे इजाजत, देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहिए आज तक

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