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मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा के वक्त कैसा था कोर्टरूम का मंजर? देखें क्राइम कहानियां विद शम्स

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00:00आपने उसकार गुड़ इबनी सच्छेकार एक बार फिर आप तमाम नों का स्वागत है क्राइम कहानिया विद शंस
00:04मुझे मेरे डिस्टिक जेल की जड़ साहब ने घरत साबित कर दिया
00:07मुझे ही ललाका की उम्रकायत की सजा होगी
00:10मुसकान और साहिल को
00:11लेकिन उनोंने दोनों को मिरती उड़न दिया
00:15मैंने अपने जनरिजम के करियर में करीब 500 से जादा बार
00:19कोट का रुख किया होगा
00:21अदालत के अंदर गया
00:23तमान तरह की बहस सुनी दलीलें सुनी
00:25बड़े बड़े केसिस क्या गवारा
00:28लेकिन एक चीज मिसिंग थी
00:30मैं हमेशा सूसता था कि
00:32किसी केस में जब कोई जज
00:33किसी को मौत की सजा सुनाता है
00:36तो एक तो वो
00:37सजा किस तरह से सुनाता है
00:39उस वक्त क्या होता है
00:41वो क्या क्या बोलते है
00:42और उससे पहले जब आप सजा सुनाते है
00:45तो उस सजा पर बहस होती है
00:46एक आखरी मौका मिलता है
00:49दोनों तरफ के वकीलों को
00:50क्योंकि सजा पर बहस तब ही होती है
00:52जब आप गुनाइगार ठैरा दिये जाते है
00:55तो जो सजा पर बहस होती है
00:57वो कैसे होती है
00:58उसमें क्या-क्या दलील ने रखी जाती है
01:00कोट का सीन कैसा होता हुआ वहां बैठे लोग क्या करते हैं क्या सोचते हैं वकील कैसे बोलते हैं जजज
01:06साहब उन्हें कैसे सुनते हैं उनके हावभाव क्या होते हैं चेहरे का रियक्शन क्या होता है बहुत दिनों से ये
01:13मेरे मन में था तो जैसे ही 30 सितंबर को मेरे डिस्ट
01:28कर लिया था कि जब quantum of punishment यानि की सजा पर बहस होगी और सजा पर बहस के बाद
01:35जद सहाब जब अपना फैसला सुनाएंगे तो मैं चाहता हूँ कि मैं उस पल का गवाह बनू और उस courtroom
01:42की सारी कारवाई को अपनी आँखों से देखूं और फिर उस आँखों देखी को आप तक पह
01:58ये भी जानकारी मिल गए थी मुझे 13 अक्तूबर को ही कि मेरट कोट में हर्ताल है वकीलों की तो
02:03वहां सिर्फ दो ही चीजों की सुनवाई चल रही है एक किसी मुकदमे का आखरी फैसला और दूसरा अगर किसी
02:09की जमानत की अर्जी लगी उस जमानत पर फैसला तो बाकी को�
02:26पूरी को लेकर सुबा सुबा दिली से मैं मेरट के लिए रवाना हुआ मेरट एक्स्पेस बनने के बाद अब सफर
02:32दिली से मेरट का बड़ा कम हो गया है करीब एग घंटा लेकिन शहर के अंदर जाकर कचैरी रोड पर
02:38मेरट डिस्टिक कोट है तो वहां जाने में थोड़ा
02:41वक्त लगता है लेकिन फिर भी मैं वक्त से करीब दस मिनट पहले पहुँच चुका था मेरट कोट के बाहर
02:48तब बिलकुल आम महाल था जैसा होता है चुक्छे वकीलों की अरताल है तो इसलिए वैसी भीर नहीं थी जैसी
02:55हमेशा होती है
02:57मैं और शिकारपूरी कैमरे के साथ कोट रूम या नि कोट के कैमपस के अंदर दाखिल होते हैं हमारे वहां
03:05के रिपोर्टर अस्मान चौधरी वो पहले ही आ चुके थे फिर वो हम दोनों को साथ लेकर चलते हैं पर
03:11देरे देरे हम पहुंसते हैं उस कोट रूम के बाहर जो �
03:15जबिंद कुमार मिश्राजी की अदालत थी और जहां अज मुस्कान और साहिल के किसमत का फैसला होना था पहर भी
03:23अतनी भीर नहीं थी वकीली दो दर कुछ टहल रहे थे दरवाजा बंद था बाहर दो पुलिस वाले थे तो
03:31पूछा कि ये क्यों बंद है तो कहा गया कि अं�
03:45जा चुका हूँ वहाँ अगर ऐसी बहस होती है सजा पर फैसला है तो मीडिया के लोग जा सकते हैं
03:51यहां तक की वकील भी जाते हैं तो फिर वो जो नाजिर एक शब्ध वहां का टेकनिकल पता चला कि
03:57वही इसकी इजाज़ा देंगे कुछ देर के बाद नाजिर साहब मिले �
04:01उनसे थोड़ी रिक्विस्ट की फिर बताया कि ऐसी कोई बंदिश पाबंदी तो है नहीं उन्होंने अपनी मजबूरी जताए और कहा
04:07कि नहीं अगर आपको जाने देंगे तो बागी भी मीडिया वाले हैं बागी भी वकील हैं सब को जाना देना
04:11पड़ेगा देखे बहुत
04:31तीस चारीस लोगों के बैठने की जगा होगी जो कुरसी और बिंच वकील थे उस वक्त वहां पे मौजूद करीब
04:4115-20 कुछ स्टाफ थे कुल मिलाकर 35 लोग से जादा नहीं होगे मैं सुभा ही बात कर लो जद
04:50साहब अपने कुरसी पर बैठ चुके थे जब मैं दाखिल हु
05:02जद साहब के राइट हैंटर और जो मुसकान और साहिल की वकील वो दूसरी तरफ थे यानि कि जद साहब
05:08के लेट साइड में और दोनों तरफ के वकीले खड़े हुए थे ठीक घड़ी में दस बचकर दस मिनट हुआ
05:19चार लोग थे जो मॉनिटर और लाइव लिंक जोड़ रहे थे जेल से उन्होंने सब कुछ जोड़ लिया था जद
05:25साहब के आने से पहले ही ओके हो चुका जद साहब के स्टाफ को बताया गया फिर वो कंगरे से
05:30आकर बैठ गये थे
05:32अब मैं वहाँ खड़ा देख रहा था घड़ी पर एक दिवार लगी थी दानी तरफ उसमें वक्त लगा था दिखा
05:40रहा था बारी थी मुस्कान की वकील की अनि जो रेखा जैन है उनकी
05:48तो मेरे मन में यह था कि सदा पर बहस क्या होती है क्योंकि यहाँ यह चीज याद रखिए कि
05:53सदा पर बहस का मतलब यह है कि अब आप वहाँ यह नहीं कह सकते
05:56कि हमारा मुख्कील बेकसूर है उसने कुछ नहीं किया उसे छोड़ दी है
06:01क्यों? क्योंकि और लड़ी वो 30 सितंबर को ही मुस्कान और साहिर को गुनेहगार कोट ने ठहरा दिया है
06:07तब वो वाली अब फेस नहीं है कि आप यहां पर वो पुरानी बातों को रखेंगे
06:12यहां तो सिर्फ यह कहना है कि जिस सिक्षन में सजा दी गई है गुनेहगार ठहरा गया उसमें कितनी सजा
06:20है
06:20अब इसमें नया BNS पुराना IPS 302 अब 103 हो गया तो इसमें में था सबसे बड़ा मडर
06:27और मडर में दो ही सजा हो सकती है या तो कम से कम उम्र कैद या जाद से जादा
06:33फांसी तब उनकी वकील को यहीं बताना था
06:40कि भाई कम सजा दिये यानि उम्र कायद
06:44मैं उस वक्त जब ये बहस चल ले थी तो बिलकुल पीछे ख़ड़ा था
06:47क्योंकि आगे की सारी जगा घिरी वही थी
06:50और तमाम वकील थे और उनसे आगे आप जाने सकते
06:53तो मैं अपनी एडी पर एक तरह से उचक कर खड़ा था
06:58और जद सहाब और वकीलों का चेहरा देखने की कोशिश कर रहा था
07:02मुस्कान की वकील की जो दलील थी वो यही थी
07:05कि देखिए क्योंकि गुनाइगा ठहरा जा चुके है
07:09मुस्कान और साहिल की उमर 28-29 साल है
07:12दोनों का कोई क्रिमिनल बैक ग्राउन नहीं है
07:15पढ़े लिखे हैं अच्छे परिवार से हैं
07:19मुस्कान की दो बेटियां भी हैं
07:22साहिल के एक बुड़ी नानी है
07:26और गल्ती तो हुई
07:28लेकिन पहला जुर्म कम उम्र
07:31और इनकी जिम्मेदारियों को देखते हुए
07:33अदालत इन पर रहम करें
07:35और इने कम से कम सजा दे
07:37और इस बारे में उनने सुप्रिम कोट के
07:39बहुत सारे केसेस के हवाला दी है
07:40जिसमें एक कहा गया
07:41कि सजा ए मौत
07:44मतलब अपवाद है
07:46उम्र कैद
07:48देनी चाहिए
07:49और एक बड़ी इंपोर्टेंट बाता आप रुखी
07:51कि सुप्रिम कोट भी कहता है कि
07:53मौत देने से पहले यह देखिए
07:55कि जिसे आप सजा सुनाने जा रहे है
07:57उसके सुधरने की कुई गुण जाइच है कि नहीं
07:59तो उन्होंने पूरी बात रखी
08:18साहिल जो है वो जेल में खेती बाड़ी कर रहा है
08:20बागवानी कर रहा है
08:22और बिल्कुर ठीक ठाक है
08:24वक्त पर उठता है वक्त पर सोता है
08:26जो भी जेल में कहा जाता है वो करता है
08:29एक बार भी उसने दंगा फसाद भी नहीं किया
08:31तो इन तीदों से लगता है कि
08:33दोनों में सुधरने की गुंजाईश है अगर ये दोनों कल को जेल से बाहर आते हैं और समाज में रहते
08:37हैं तो फिर एक जमेदार नागरिक के तोर पर रह सकते हैं तो इनके सुधरने की गुंजाईश इनकी कम उम्र
08:43और इनके पहले जरुम को देखते हुए अतालस से दर्खा
09:03उन्होंने अपनी दलील खत्म की
09:06जब वो बोल रही थी तो जट साहब कुछ भी नहीं बोल रहे था
09:09वो सिर्थ सुन रहे थे और बहुत ध्यान से सुन रहे थे
09:15उन्होंने उनकी पूरी बात सुमी जब उन्होंने अपनी बात खत्म की तब्जत सहाब ने सरकारी वकीर क्रिश्ण कुम हर चौबे
09:24उनकी तरफ देखा और गाओ
09:27कि अपसदा सुनाने से पहले आप अपनी आखरी बात आखरी दलील कोट के सामदे रखना चाहते हैं तो रखी
09:34कि कि जो 24 आप अपनी पूरी वकीरों के टीम के साथ मौजूद थे
09:40बाकादा पूरा टेपर पॉइंटर सुप्रिम कोट के जो अलग अलग केसेज में से फैसले हुए इसी तरह के क्राइम में
09:48उस सारी चीज़ें लेकर आए हुए थे पूरी तैयारी से
09:51फिर उन्होंने बोलना शुरू किया उन्होंने अपना तरक देने के साथ साथ जो रेखा जाएंगी मुस्कान की वकीर थी
10:02जो उन्होंने पॉΑंट टुटा है थे उस पर पहले जवाब दिया उन्होंने कहा कि डिफेम्स लायर ये कह रही है
10:10कि उनका पहला जुर्म है
10:13सरकारी वकीर का कहना था कि ऐसे बहुत सारे इंसिडेंट हमारे सामने है
10:17जिसमें पहले जुर्म के बाद लोगों ने कई जुर्म किये
10:20तो पहला जुर्म इस बात का पैमाना नहीं है
10:23कि पहला जुर्म है तो माफ कर दो
10:24क्योंकि इनसान पहले जुर्म के बाद और भी जुर्म करता है फिर पेशे वर अपरादी हो जाता है
10:29तो कोट को इस बात को मानना ही नी चाहिए कि यह उसका पहला जुर्म है या दूसरा जुर्म है
10:34दूसरी बात उन्होंने कहा कि जेल में इनका आच्रन बरता हो सुधरनी की गुंजाईश है अच्छा बरता हो है
10:42सरकारी वकील का जवाब था
10:46कि जेल में इन दोनों का अच्छा बरताओ भी एक साजिश का हिस्सा है
10:50तो नोंने कहा कि कैसे
10:52उन्हों कहा कि इन दोनों को पता है
10:54कि इने सजा तो होगी
10:56लेकिन सजा में कई बार जेल में काटे दिन
10:59कैसे काटे
11:01कैसा उनका बरताव रहा वो बड़ा मायने रखता है कोट के सामने रिपोर्ट पेश की जाती है
11:06तो उनने कहा कि इन दोनों को पता था है कि ये कोट में जल्दी फैसला आएगा
11:10तो इन्होंने जान भूज कर जेरी में अपना बरताव अच्छा रखा
11:13कोई भांगावा नहीं किया कोई बदमाशी नहीं की कोई नियम नहीं तोड़े
11:16और सारे काम माम भी कर लिए अपनी मर्जी से
11:19क्योंकि सदायाफता कैदी को काम करना ज़रूर नहीं होता है
11:23तो इसलिए ये अच्छा बरताव एक साजिश के तहत था
11:28ये उनकी दलील थी
11:32दूसरा उनने का कि इनकी कम उम्र
11:34उननने का कि ये उम्र कम क्या
11:3628-39
11:38जिस तरीके का इन्होंने क्राइम किया है
11:41वो इनकी कुरूरता वो इनकी विभचता वो इनकी मानसिक्ता को दर्शाता है
11:46क्योंकि यह अचानक किया गया क्राइम नहीं था
11:48यह एक पेशेवर हाट कोर क्रिमिनल की तरह सोच कर किया गया कतल था
11:54जिसमें उन्होंने प्लैनिंग की प्लैनिंग के तहट फिर उसे मारा
11:58पिर बॉडी को कैसे डिस्पोस करना है, पिर बॉडी को कैसे चुपाना है, पिर कैसे लाश के टुकडे किये, फिर
12:05ड्रम में पैक किया
12:07तो यह सारी चीजें एक नौसिखिया या पहली बार क्राइम करने वालों का काम नहीं हो सकता
12:15देशाक इन्हों ने पहला क्राइम किया, लेकिन इनकी सोच बहुत ज़ादा करूर है
12:21पिर उनका कि ऐसे लोगों को समाज में वापस लाने का मतलब नहीं बनता
12:26दूसरा, ऐसे लोगों के सुधरने की उमीद भी नहीं बनती
12:31और तीसरा, कि अगर सुधरने के नाम पर ही फैसला होना है
12:36तो बहुत सारे ऐसे हैं जो क्राइम करने के बाद पच्चता रहे हैं
12:39फिर उनको सुधरने के नाम पर छोड़ दिया जाए, सजा कम कर दिया जाए
12:42रिहा कर दिया जाए, तो इसका कोई मतलब नहीं बनता
12:47फिर उन्होंने अपने सुप्रिम कोट के कई हवाले दिये
12:49कि अगर जर्म संगीन है
12:52तो पिर कड़ी सजा मिलनी चाहिए
12:54ताकि समाज तक एक मैसेज जाए
12:57जब उन्होंने का कि ये मैसेज जाए
12:59तक जड़ साहब जब तक सरफ सुन रहते हैं
13:01उन्होंने का कि उन्हें भी लगता है
13:03कि समाज और लोगों की राय भी जरूरी है
13:06कि वो क्या चाहते हैं इन केसों में
13:08इस बीट में जड़ साहब ने एक और काम कराया था
13:10उन्होंने जेल से पुरी रिपोर्ट मगाई
13:13मुसकान और साहिल की
13:14उनके बढ़ताओं की
13:16उनके कोई और क्राइम है की नहीं
13:18फिर पुलिस से भी रिपोर्ट मगाई
13:20उन सारी रिपोर्ट को भी देखा
13:23उनकी पढ़ाई लिखाई
13:24उनके पेरेंस डिपेंडेंट आजश्रित कितने
13:27वो सारी चीज़े मगाई ली थी
13:28अपना फैसला सुनाने से पहले
13:31तो अब सरकारी वकील बहस कर रहे थे
13:33मैं पीछे लगाता और खड़ा वाद सुन रहा हूँ
13:34मुझे अच्छा भी लग रहा है
13:36जो एक दूसरे को जवाब दे रहे हैं
13:40और वो बोलते गए
13:42इस तुरान में सुप्रिम कोर्ट के
13:44पांच-छे अलग-अलग केसों का हवाला दिया
13:46पिर सुप्रिम कोर्ट ने ऐसी केस में
13:48किस तरह सजाय मौत तक दी थी
13:50तो यहां कोई रहम करने की ज़रूद नहीं है
13:52सिर्फ पहला क्राइम कम ओमरी
13:55या फिर उनके
13:57डिपेंडन्ट
13:58या फिर ये की दो बेटी
14:00हाँ छोटी मुस्कान की
14:01और आखिर में उन्होंने अपनी बात
14:03खत्मी की कंक्लूजन जो था उनका वो ये था
14:06कि जिस तरह का ये जुर्म किया
14:08इसने समाज में
14:09एक तरह से
14:11एक हल्चल सी मचा दी थी
14:13इस निले ड्रम के चलते
14:14और उसके बाद एक बाड़ सी आ गई थी देश में
14:18पत्मियों के हाथों पती के कट लिए
14:20पिर उन्होंने इसमें
14:22आपके
14:24सोनम का हवाला दिया
14:25आपके जो पूरे वाला केस है
14:28केतन अगरवाल
14:29उसका हवाला दिया
14:32और भी दो तिन केसे के से हवाले थी
14:34जिसमें पत्नी या गल्फरेड ने अपने पती को मारा
14:36और उन्हों कहा कि ये एक तरह से
14:38मुसकान की इस हरकत के बाद
14:43ऐसे क्राइम अचानक बढ़ गए
14:45तो मुसकान ने जो किया
14:46उसका समाच पर बहुत गहरा असर पड़ा था
14:50इसलिए
14:51ऐसे लोगों के साथ
14:52रहम ने होनी चाहिए
14:54और
14:55सरकार में वकील के चॉबएй सहब का
14:57की मांग थी आखिर में
14:59आश्र इनका मैं चाहता हूँ कि
15:01इन दुनों को सजा मौत मिले
15:03उस से कम नहीं
15:05ये कर उन्हों उन्हों न
15:06अपनी बात खत्मी कि
15:07जब उन्होंने अपनी बात ख़त भी की
15:09तब जद साहब ने घड़ी की तरफ देखा
15:12दोनों वकीलों की तरफ देखा
15:14कोट में मौझूद लोगों को देखा
15:16फिर मुस्कुरा है कुरसी से खड़े हुए
15:18और कहा कि अब लंज के बाद
15:20मैं अपना फैसला सुनाओंगा
15:23वोट कर पीछे उनके कुरसी के
15:26चेम्बर था वहाँ चले गए
15:28अदालत में क्या होता है
15:30जद साहब का चेहरा कैसा होता है
15:32किस तरह का वो सीरियस चेहरा लेकर आते हैं
15:35गुस्से में होते हैं
15:36नॉर्मल होते हैं
15:37हसते हैं, मुस्कुराते हैं
15:39क्या होता है
15:40हाजार तरह के सवाल थे
15:42तो गंटी वजी में आगे खड़ा हो गया
15:44सब अपनी जगा पर जो चार टेक्निशिन
15:46जो मनें आपको बताया कोट के स्टाफ थे
15:48आदियो वीडियो लिंक जुड़ गया था
15:49वो अब तक वहाँ बैठे हुए थे
15:51गंटी विस्ती वो भी दीवार के साथ
15:53खड़े हो गए
15:56अब कोट में सारा स्टाफ
15:59खड़ा है
16:00जद साफ का इंतजार हो रहा है
16:03अचानक परदा अटता है
16:04जद साफ की कुर्शी से पांच कदम पीछे
16:06उनका चेमबर है
16:08परदा उनके स्टाफ ने हटाया
16:10जद साफ परदे के बाहर
16:13बिल्कुल मुस्कुराते हु�ے छेहरे के साथ
16:15यूँकी परस्नलिटी भी बहुत अच्छी
16:16अच्छे आसी कत-काथी है
16:18आवाज भी बहूत असर्दार है
16:20तो मुस्कुराते हुए
16:22मुझे लगा था कि ये जज साहब आएंगे और ये ऐसा मामला है जिसमें किसी को उम्रे का दिया अब
16:27हाँ सी दो बनती है अब ये मैक्सिमम परिश्मेंट है हमारे कानून में इस से मतलब ज़ादा और तो कोई
16:34सदा होई नहीं सकती है तो जज साहब भी बड़े सीरियस टाइ�
16:38लेकिन जब पर्दा हटा तो देखा कि एक बड़ा मासूम और मुस्कुराता हुआ चेहरा अपने चैंबर से बाहर निकला और
16:47जैसी वो दो स्वेड़ी चड़कर ऊपर की तरफ आए तो मुस्कुराए ते हुए आए दोनों हाथ जोड़ा और जितने भी
16:56कोट में थे उन्हो
16:59को ऐसे देखते चले और फिर दाहिनी तरफ अब उन्हों का आई लूप था अब इत्तिफाक कहें कि मैं सबसे
17:09आगे खड़ा था और मैं खोया हुआ था कि ये जजस साहब मुस्कुराते वे आए अभी पता नहीं क्या होगा
17:14मतलब मैं कहीं थोड़ा सा लॉस टाइप था अ�
17:29अचानक ऐसे वे तब सवाली अंदाज में हाथ खोल कर और मेरी तरफ देखते हैं और मुस्कुराते हैं और तब
17:37आप यहां कैसे फिर वो सबकी तरफ देखते हैं और उसके आप मुस्कुराते हुए कहते हैं कि मैं महावारत के
17:46कुछ अंच पढ़ना चाहता हूँ इसके बा�
17:54परहा वो संस्कृट में दो लाइने हैं तो लाइने मुस्से गलत न हो जाए इसलिए मैं पढ़ूंगा ने लेकिन वो
18:01लाइने आपको स्क्रीन पर जरूर दिखाऊंगा तो यह जो दो लाइने हैं यह माभारत की लाइने हैं इस लाइन में
18:09का अर्थ हिंदी में वो मैं आप
18:11को बताता हूँ, इन दोनों लाइनों का मतलब ये है, कि अर्थात बिना समाच के दंड कानून का वद्ध हो
18:18जाता है, दंड कानून एक साथ है, कि अर्थात बिना समाच के दंड कानून का वद्ध हो जाता है, वद्ध
18:25मतलब गतल, और दंड कानून रहित समाच भी काट दिया �
18:30जाता है इसलिए दंड कानून को चाहिए कि वो समाच की रक्षा करें और समाच को चाहिए कि वो अपने
18:36भीतर दंड कानून को समाहित करें अपने अंदर ले ले इसके बाद वो मॉनिटर की तरफ देखते हैं और कहते
18:43हैं हाँ भईी साहिल शुकला और मुसकान तो अब मैं आ�
18:59और साहिल की वकील है, उन्हों लगा कि आप इतनी परिशाना घबराईए, मुझे लग रही है, आप घबराईए, मत परिशान
19:04मत हुए, सब अच्छा होगा, अब इतना मुस्कराता चेहरा है, इतनी अच्छी बाते हैं, मुझे लगा कि इनकी मान पूरी
19:12हो गई, उमर कैद सद
19:13मिल जाएगी, इसके बाद अचानक वो मॉनिटर की तरफ देखकर, अब कोट रूम में किसी को नहीं देख रहे हैं,
19:20मॉनिटर की तरफ उनकी नजरे हैं, मॉनिटर पर दो चेहरे हैं, मुसकान और साहिल के, और शायद जेल सुप्रेंटिनेंट भी
19:28थे उसमें, क्योंकि उन्
19:37आप दोनों ने जो अपरात किया है, और मुसकरा रहे हैं, मैं उसके लिए आप दोनों को मिर्तिव रण देता
19:45हूँ, अब जैसे उन्होंने ये लाइन कही, इतनी देर में कोट के अंदर नाले बुझने लेगे बारत माता की जाया
19:51और तालियां, और मैं इधर ये सोच रहा ह
19:54पता नहीं कि मैं भूल गया है उस पल को, कि मैं कोट में हूँ, तो मुझे लगा कि जैसा
20:01मजाग कर रहे हैं, क्योंकि ऐसे कौन मुसकरा कर किसी को बोलता है, कि आपने जो अपरात किया है, उसके
20:07लिए मैं आपको मिर्तिव डण देता हूँ, ऐसे कोई मौत की सजा, मेरे लि
20:23आपके थे, क्योंकि फिर जो अगली लाइन आई, वो ये थी कि और इसके लावा साक्षे मिटाने या सबूत मिटाने
20:30के लिए आपको साथ साथ साल की सशर्म कारवास, जब उन्होंने ये कहा तब मुझे पहली बार उस पल में
20:39ये हैसास हुआ, कि फैसला तो फूच चुका,
20:42और ये सुना चुके, और जिसे मैं सुनने आया था, वो इतनी एजी वे में, इतनी आसानी से, जज साहब
20:48ने मुस्कुराते हुए सुना दिया, मतलब किसी को मौत की सजा दी जा रही है, और इस तरीके से, मैं
20:55सोची नहीं सकता था, मतलब अगर कोई मुझे आकर बाहर से बत
21:12सुबा से कोट्रू में खड़ा हूँ, उसका क्लाइमेक्स इस अंदाज में होगा, इसके बाद तो फिर कोट में जो शोर,
21:19नारे, तालियों की गूंच, फिर जज साह में क्या क्या का, मुझे नहीं मालूँ, पर उसी मुस्कुराते हुए चेहरे के
21:26साथ, फिर उन्होंने कलम
21:27उठाया, साइन किया, पेपर पर रखा, बाद में पता चला कि वो पेन डस्ट बीर में डाल दिया गया था,
21:34पर वो डस्ट बीर में डालते हुए मैंने नहीं देखा था, और फिर खड़े हुए, फिर वही उनका मुस्कुराता चेहरा,
21:41दोनों हाते हैं प्र नाम की मुद्रा
21:43में फिर ऐसे उन्हों में चारों तरफ देखा फिर हम दोनों का आई कॉन टिक्ट हुआ तीसरी बार और वो
21:49मुस्कुराए मैंने भी उन्हें नमस्ते किया और फिर वो वापस चेंबर में
21:56तो किसी को मौत की सजा कोई जज इतने प्यार भरे अंदाज में सुना सकता है ये मेरे लिए बिलकुल
22:08एक निया तजर्बा था मतलत अब सोची नहीं सकता था
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